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लोक अदालत में फैसले के 4 साल बाद भी राजस्व न्यायालय में तारीख-पे-तारीख मिल रही, पढ़ें खबर

वर्षों से लंबित बंटवारा विवाद का निराकरण लोक अदालत में हो चुका है,लेकिन पक्षकारों को राहत नहीं मिली है। चार साल बाद भी मामला जस का तस का है।
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दुर्ग

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Satya Narayan Shukla

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Updated: 1 Jul 2018, 9:41 PM IST

durg news

लोक अदालत में फैसले के 4 साल बाद भी राजस्व न्यायालय में तारीख-पे-तारीख मिल रही, पढ़ें मामला

दुर्ग. वर्षों से लंबित बंटवारा विवाद का निराकरण लोक अदालत में हो चुका है,लेकिन पक्षकारों को राहत नहीं मिली है। चार साल बाद भी मामला जस का तस का है। लोक अदालत के फैसले के आधार पर जमीन को दो हिस्सा कर ऋण पुस्तिका बनाना है। यह कार्य तहसीलदार को दस्तावेज व लोक अदालत में हुए फैसले के नकल के आधार पर करना है। ऋण पुस्तिका की जगह उन्हें केवल तारीख मिल रही है। खास बात यह है कि जिस जमीन का नामांतरण होना है वह जमीन बहुत कीमती है। उस जमीन पर सरकारी निर्माण भी हो चुका है। पक्षकारों का कहना है कि २०१३ में नेशनल लोक अदालत में दो भाईयों के परिवार के बीच आपसी सहमति से जमीन का बंटवारा हो चुका है। इसके बाद भी जमीन को उनके नाम पर राजस्व रिकार्ड में दर्ज करने के लिए अधिकारी सिर्फ तारीख ही दे रहे हैं।

जमीन पर बिना सहमति के सड़क व घाट भी बना दिया
श्यामसुंदर शर्मा का कहना है कि शिवनाथ तट की बेशकीमती जमीन उनके दादा-परदादा की है। सरकारी रिकार्ड में जमीन उनके ही नाम पर है। जिस जमीन के लिए वे वर्षो से लड़ रहे हैं वहां पर अलग-अलग विभाग ने बिना उनकी सहमति के सड़क व घाट का निर्माण किया है। उनका कहना है कि अगर जमीन उनके नाम पर आ जाती है तो संबंधित विभागों से मुवाजा लेने में आसानी होगा।

नेशनल लोक अदालत का फैसला

जमीन स्थान महावीर श्यामसुंदर कुल रकबा
खाली भूमि महमरा एनिकट ०.३२, ०.१५,०.१२एकड. ०५९ एकड़

दर्जन बार से अधिक हो चुकी है नाप-जोख

पक्षकारों का कहना है कि तहसील न्यायालय से कई बार जमीन चिन्हित कर नाप-जोख करने का आदेश हो चुका है। पटवारी मौका निरीक्षण कर प्रतिवेदन भी प्रस्तुत कर चुके है। इसके बाद भी जमीन उनके नाम पर दर्ज नहीं किया जा रहा है। जमीन ऋण पुस्तिका भी नहीं बन पा रहा है।

मकान व खेत हो चुका है बंटवारा
खास बात यह है कि नेशनल लोक अदालत के फैसले के आधार पर ही पक्षकार के अन्य संपत्ति मकान व खेत का बंटवारा हो चुका है।बंटवारे के बाद वे अपने-अपने अधिकार के खेत व मकान का उपयोग कर रहे हैं।

प्रक्रिया के तहत कार्रवाई

तहसीलदार प्रकाश टंडन ने बताया कि प्रकरण विवादित है। इसलिए निराकरण करने में समय लग रहा है। वर्तमान में आपत्ति लगी हुई है। आपत्ति का निराकरण करने के बाद ही कार्रवाई होगी। वैसे भी पक्षकार ने दूसरे न्यायालय में प्रकरण स्थानंतरित करने का आवेदन लगाया है। प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारी रुचि ही नहीं ले रहे
पक्षकार श्यामसुंदर शर्मा ने बताया कि आपसी सहमति के आधार पर लोक अदालत में फैसला हुआ है। लोक अदालत में फैसला होने के बाद अपील भी नहीं किया जा सकता। अधिकारी प्रकरण का निराकरण करने रुचि ही नहीं दिखा रहे हैं।