
दुर्ग . बाल संप्रेक्षण गृह पुलगांव में एक वर्ष पहले चाकूबाजी और उपद्रव की घटना की मंगलवार को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की तीन सदस्यीय टीम ने जांच की। टीम के चेयर पर्सन आईआर कोरीलोज के नेतृत्व में जांच टीम ने बंद कमरे में 10 कर्मचारियों और दो अधिकारियों का बयान लिया। जिसमें दण्डाधिकारी जांच में दोषी पाए गए अधिकारी व अपचारी बालक भी शामिल रहे। बयान दर्ज करने की कार्रवाई शाम चार बजे तक करीब ६ घंटे चली।
घटना के समय संप्रेक्षण गृह से जुड़े हर पहलू पर जांच दल के सदस्यों ने तत्कालीन अधिकारी, घटना से पीडि़त कर्मचारी, अपचारी बालक और अन्य कर्मचारियों का एक के बाद एक बंद कमरे में बयान दर्ज किया गया। आयोग के निर्देश पर बाल संप्रेक्षण गृह से घर लौटे चुके दो अपचारी बालकों को भी विशेष तौर पर बुलवाया गया था। इस दौरान परिसर में केवल प्रशासनिक अधिकारी ही आना जाना कर रहे थे। कार्रवाई में व्यवधान न हो इसके लिए परिसर में मुलाकातियों और अन्य व्यक्तियों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
सभी सेल का निरीक्षण के बाद की बच्चों से बात
आयोग की जांच टीम सर्किट हाऊस से सुबह 11 बजे बाल संप्रेक्षण गृह पहुंची। संप्रेक्षण गृह परिसर में बने सभी सेल का निरीक्षण करने के बाद वहां रहने वाले अपचारी बालकों से बातचीत की। संप्रेक्षण गृह की व्यवस्था और मिलने वाली सुविधाओं के बारे में पूछा ली। जांच टीम ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि उपद्रव और हत्या जैसी गंभीर वारदात होने के बाद भी बाल संप्रेक्षण गृह में अधीक्षक का पद रिक्त पड़ी है। ]
तत्कालीन अधिकारियों से दो घंटे तक पूछताछ
जांच टीम के सदस्यों ने संप्रेक्षण गृह के तत्कालीन प्रभारी अधीक्षक, काउंसलर, हाउस फादर और प्रभारी अधिकारी से लगभग दो घंटे तक पूछताछ की। जहां बयान दर्ज किया जा रहा था वहां आसपास किसी को फटकने नहीं दिया गया। १२ जुलाई २०१६ को बाल संप्रेक्षण गृह में अपचारी बालकों ने जमकर उत्पात मचाया था। किशोर न्यायालय में न्यायाधीश के सामने एक पुलिस जवान पर चाकू से हमला कर दिया था। बाद में दो अन्य कर्मचारियों पर भी चाकू से हमला कर दिया।
अपचारी बालक संप्रेक्षण गृह को बंद कर किचन से रसोई गैस सिलेंडर को लकर छत पर चढ़ गए। बच्चों को समझाने जिला न्यायाधीश, कलक्टर और एसपी भी पहुंचे। उन्हें देखकर अपचारी बालक और उग्र हो गए। अपशब्द कहने लगे। चाकू लहराते हुए सिलेण्डर को ब्लास्ट करने की धमकी देने लगे। इस पर अधिकारी लौट गए। रात में सारे अपचारी बालक फरार हो गए। दूसरे दिन कुछ बालक लौटे। बाद में कुछ बालकों को उनके परिजन छोड़कर गए।
जो भी आया सामने लगाई फटकार
राष्ट्रीय मानव आयोग की जांच टीम छह घंटे तक बाल संप्रेक्षण गृह में थे। इस दौरान एडीएम संजय अग्रवाल संप्रेक्षणगृह पहुंचे। टीम के सदस्यों से मुलाकात कर वे लौट गए। इस दौरान कमरे के आसपास भटकने और बीच में व्यवधान डालने वाले अधिकारियों को फटकार लगाते हुए जांच टीम के सदस्य सख्ती से पेश आए। जांच टीम के चेयर पर्सन आईआर कोरीलोज ने मीडिया से बात करने से इनकार करते हुए कहा जांच चल रही है और यह गोपनीय है।
आज इनका हो सकता है बयान
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य बुधवार को जांच करेंगे। वे किशोर न्याय बोर्ड के नियुक्त सदस्यों का भी बयान दर्ज कर सकते है। आयोग ने उन्हें भी तलब किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने तत्कालीन सदस्यों को बुधवार को उपस्थि रहने पत्र जारी किया है। वर्ष २०१६ में उत्पात मचाने वाले चार अपचारी बालकों को अंबिकापुर, जगदलपुर और रायपुर बाल संप्रेक्षण गृह में शिफ्ट किया गया था।
एक अपचारी बालक के खिलाफ उत्पात करने के मामले में नया एफआईआर दर्ज कर उम्र १८ साल से अधिक होने पर जेल दाखिल किया गया था। अब इनमें से दो अपचारी बालक फिर बाल संप्रेक्षण गृह आ गए हैं। जिसे जेल भेजा गया था उसे जेल से रिहा होने के बाद राजनांदगांव पुलिस ने पुराने मामले में पकड़कर फिर संप्रेक्षण गृह पहुंचा दिया है। आयोग की जांच टीम ने इन अपचारी बालकों से भी पूछताछ की है।
बाल संप्रेक्षण गृह में हैं ,42 बालक
अपराध घटित होने पर पुलिस अपचारी बालकों के खिलाफ अपराध दर्ज करती है। उसे पकड़ कर किशोर न्याय बोर्ड में प्रस्तुत किया जाता है। किशोर न्याय बोर्ड के निर्देश पर अपचारी बालकों का बाल संप्रेक्षण गृह में रखा जाता है। उसके बाद प्रकरणकी सुनवाई शुरू होती है।
प्लेस ऑफ सेफ्टी में हैं ,17 बालक
यहां ऐसे बच्चे रखे जाते हंै जो अपचारी बच्चों की श्रेणी में आते हैं, लेकिन अपराध गंभीर प्रवृत्ति का होता है। जिसमें सजा ७ साल या अधिक का प्रवधान है। उम्र १८ वर्ष से अधिक होने पर बोर्ड को ३ माह के अंतराल में निर्णय लेना है कि प्रकरण बोर्ड में चलेगा या फिर बाल न्यायालय में।
विशेष गृह में रखे गए, १० बालक
विशेष गृह में ऐसे अपचारी बच्चों को रखा जाता है जिन्हे प्रकरण में सजा हो चुकी है। परिसर में अलग से भवन बनाया गया है। वहां का सेटअप और भोजन व्यवस्था बिलकुल अलग है।अपचारी बच्चों का मनोरंजन और अन्य संसाधन एक साथ उपल्बध कराया जाता है।
Published on:
20 Dec 2017 10:55 am
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