
किसान आत्महत्या: प्रशासन की जांच से नाखुश भाजपा की 3 सदस्यीय टीम पहुंची मातरोडीह, कहा 25 नहीं 60% फसल बर्बाद, शर्मनाक घटना पर पर्दा डाल रही सरकार
दुर्ग. मातरोडीह के किसान की आत्महत्या के मामले में भाजपा ने नकली कीटनाशक और प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी के प्रदेश आलाकमान के निर्देश पर पहुंची भाजपा की तीन सदस्यीय जांच दल ने शुक्रवार को मृतक किसान डुगेश निषाद के खेत की जांच की। जली हुई फसल के सैम्पल लिए और उपयोग में लाए गए कीटनाशकों की जानकारी ली। भाजपा नेताओं ने दर्जनभर किसानों से भी पूछताछ की और अधिकारियों को तलब कर घटनाक्रम और अब तक की कार्रवाई की जानकारी ली। जांच के बाद जिला मुख्यालय पहुंचकर नेताओं ने नकली कीटनाशक और प्रदेश सरकार को घटना के लिए कटघरे में खड़ा किया। मातरोडीह के किसान डुगेश निषाद ने एक सप्ताह पहले अपने खेत के पेड़ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। किसान ने आत्महत्या से पहले सुसाइडल नोट भी छोड़ा था। जिसमें फसल खराब होने से व्यथित होने का जिक्र किया गया है।
भाजपा नेताओं ने डेढ़ घंटे तक की जांच
भाजपा के जांच दल में भाजपा के प्रदेश महामंत्री नारायण चंदेल, उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा और भिलाई विधायक विद्यारतन भसीन शामिल थे। तीनों नेता एक दर्जन से ज्यादा कार्यकर्ताओं के साथ दोपहर डेढ़ बजे मातरोडीह पहुंचें और किसान के पिता डिलन निषाद और परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद नेता खेत गए और फसल का मुआयना किया। इसके बाद ग्रामीणों और कृषि व राजस्व विभाग के अफसरों से जानकारी ली। नेता गांव में करीब सवा घंटे रहे।
इन पर रहा जांच दल का फोकस फसल की
मौजूदा स्थिति -
मातरोडीह के ग्रामीणों के साथ किसान के पिता कहना है कि दवाई छिड़कने के बाद फसल ठीक होने के बजाए उल्टे झुलस गई। जांच दल ने इसके लिए खेत जाकर फसल की पड़ताल की। इसमें किसान की फसल बुरी तरह झुलसा हुआ पाया गया। जबकि दूसरे किसानों के फसल की स्थिति ठीक पाई गई। जांच दल इसे असमान्य मानकर चल रहा है।
कीटनाशकों की गुणवत्ता
- ग्रामीण फसल जल जाने का कारण नकली अथवा गुणवत्ताविहीन कीटनाशक को मान रहे हैं। अधिकारी कीटनाशकों के सैम्पल लेकर जांच की बात कह रहे हैं। जांच में फसल बुरी तरह खराब पाया गया। पड़ताल में कीटनाशक बाजारों में एमआरपी से बेहद कम कीमत में उपलब्ध होना पाया गया। इस आधार पर कीटनाशक को नकली अथवा गुणवत्ताविहीन माना जा रहा है।
जिला प्रशासन की रिपोर्ट
- प्रशासन द्वारा प्रारंभिक जांच में किसान की 25 फीसदी फसल खराब होने की पुष्टि की गई है। जांच दल ने फसल को देखने के बाद प्रशासन की रिपोर्ट को खारिज कर दिया। उनका कहना है किसान की कम से कम 60 से 70 प्रतिशत फसल खराब हुई है।
कृषि विभाग की भूमिका
- शासन के नियमानुसार ग्रामीण इलाकों में कृषि विभाग के अधिकारियों को कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। जांच दल ने मामले में ऐसा किया गया है अथवा नहीं इसकी पड़ताल की। नेताओं ने कहा कि जिले में कृषि विभाग का कार्य शून्य है। अधिकारी जानकारी नहीं देते।
परिवार की माली हालत
- मृतक के परिजनों के मुताबिक किसान ने खेती के लिए रेग की जमीन मालिक के नाम पर 17 बोरी खाद सोसायटी से कर्ज में लिया है। इसके अलावा 25 हजार निजी लोगों से कर्ज लिया था। फसल खराब होने के कारण कर्ज चुकाना संभव नहीं था। इसलिए किसान चिंतित था। जांच दल ने इस संबंध में जानकारी ली।
जांच के बाद दावा
- नकली कीटनाशक के कारण फसल खराब
मातरोडीह में किसान परिवार से मुलाकात के बाद जिला मुख्यालय लौटकर नेताओं ने प्रेस कॉंन्फ्रेंस कर जांच और निष्कर्ष के संबंध में जानकारी दी। भाजपा नेताओं ने कहा कि किसान फसल खराब हो जाने से व्यथित था। फसल में बार-बार कीटनाशक छिड़कने के बाद भी फसल की स्थिति नहीं सुधरी, उल्टे फसल और झुलसकर खराब हो गई। इस तरह फसल खराब हो जाने के पीछे घटिया कीटनाशक जिम्मेदार है।
सीएम, गृहमंत्री और कृषि मंत्री पर साधा निशाना-बोले हाइप्रोफाइल जिले में घटना शर्मनाक
किसान की आत्महत्या और जांच के बहाने भाजपा नेताओं ने प्रदेश सरकार के मंत्रियों पर जमकर निशाना साधा। भाजपा नेताओं ने कहा कि सीएम भूपेश बघेल और कृषि मंत्री रविंद्र चौबे का गृह जिला और गृह मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में किसान को आत्महत्या करने बाध्य होना पड़ रहा है। इसी से पूरे प्रदेश की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार और सरकार के लोगों की मिलीभगत से प्रदेश में नकली खाद और कीटनाशकों का कारोबार चल रहा है। सोसायटियों में भी घटिया कीटनाशक मिल रहा है। कीटनाशकों की तरह प्रदेश में घटिया बीज का भी कारोबार चल रहा है। नेताओं ने नकली कीटनाशक संबंधी कृषि मंत्री रविंद्र चौबे के बयान पर भी पलटवार किया। नेताओं ने कहा कि 22 माह के कार्यकाल में ऐसे मामलों में नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या मुख्यमंत्री को उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए।
सरकार के सामने रखी तीन मांगे
- बोले 25 लाख दे मुआवजा
मातरोडीह से लौटने के बाद भाजपा नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जांच के निष्कर्ष रखते हुए प्रदेश सरकार से तीन मांगें रखी। नेताओं ने कहा कि मृतक किसान के परिवार की माली हालत ठीक नहीं है, इसलिए कम से कम 25 लाख रुपए मुआवजा दिया जाना चाहिए। परिवार के एक सदस्य के उचित रोजगार का प्रबंध सरकार के द्वारा किया जाना चाहिए। भाजपा नेताओं ने इसके अलावा नकली कीटनाशक के मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विधानसभा में उठेगा मामला
भाजपा नेताओं ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार से तीन सूत्रीय मांग रखी जाएगी। इसके अलावा विधानसभा में भी मामला उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नेताओं ने दावा किया कि प्रदेश में नकली कीटनाशकों का कारोबार चल रहा है। उन्होंने किसानों से बातचीत के हवाले से बताया कि बाजार में 30 से 70 फीसदी कम कीमत पर नकली कीटनाशक बिक रहा है। इतनी छूट में केवल नकली कीटनाशक ही बेचा जा सकता है।
Published on:
10 Oct 2020 11:04 am
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