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किसान की आत्महत्या से कृषि विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल, नकली दवा की जांच के लिए सालभर में सिर्फ 6 दुकानों से लिया सैंपल

Farmer suicide in Durg: कीटनाशकों की जांच में संबंधित अफसरों की बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है। जिले में कीटनाशकों की 316 लाइसेंसी दुकानें हैं। अफसरों ने पूरे साल में इनमें से केवल आधा दर्जन दुकानों से 41 सैंपल लिए।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Oct 07, 2020

किसान की आत्महत्या से कृषि विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल, नकली दवा की जांच के लिए सालभर में सिर्फ 6 दुकानों से लिया सैंपल

किसान की आत्महत्या से कृषि विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल, नकली दवा की जांच के लिए सालभर में सिर्फ 6 दुकानों से लिया सैंपल

दुर्ग. दुर्ग जिले में आत्महत्या करने वाले मातरोडीह के किसान डुगेश निषाद ने जिस कीटनाशक दवाओं का उपयोग अपनी फसल में किया था उसकी गुणवत्ता को लेकर संदेह है। इधर कीटनाशकों की जांच में संबंधित अफसरों की बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है। जिले में कीटनाशकों की 316 लाइसेंसी दुकानें हैं। अफसरों ने पूरे साल में इनमें से केवल आधा दर्जन दुकानों से 41 सैंपल लिए। खास बात यह है कि अब फसल कटाई का समय आ गया और इनमें से केवल 19 की जांच रिपोर्ट आई है। अफसरों का कहना है कि रिपोर्ट में भी सभी सैंपल सही पाए गए हैं।

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व्यथित होकर किसान ने की आत्महत्या
मातरोडीह के किसान डुगेश निषाद ने झुलसा रोग से फसल को बचाने के लिए तीन बार दवाई का छिड़काव किया था। इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी, उल्टा फसल बुरी तरह झुलस गया। इससे व्यथित होकर उसने आत्महत्या कर ली। माना जा रहा था कि किसान ने जिस कीटनाशक का उपयोग किया था वह अमानक अथवा नकली था। इसके बाद से बाजार में बिक रही दवाईयों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। क्योंकि इसमें प्रशासनिक अफसरों की बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है।

22 की रिपोर्ट कब तक यह पता नहीं
कृषि विभाग के अफसरों के मुताबिक सीजन में 41 सैम्पल लेकर जांच के लिए लैब भेजा गया था, लेकिन इनमें से अब तक केवल 19 की रिपोर्ट आई है। शेष 22 सैम्पल की रिपोर्ट कब आएगी यह अफसर भी बता पाने की स्थिति में नहीं है। खास बात यह है कि जिन दवाईयों का सैंम्पल रिपोर्ट नहीं आई है, उसे भी दुकानदार किसानों को बेच चुके हैं।

औसतन 10 फीसदी की जांच का नियम
नियम के मुताबिक हर सीजन में औसतन 10 फीसदी कीटनाशकों का सैम्पल लेकर जांच किया जाना चाहिए, लेकिन हर साल गिनती के सैम्पल से खानापूर्ति कर लिया जाता है। जिन दुकानों की शिकायतें मिलती है, केवल उन्हीं में जांच कर सैम्पल ले लिया जाता है। सैम्पल लेने के बाद रिपोर्ट आने तक विक्रय रोकने का भी प्रावधान नहीं है।

सरकारी सोसायटियों में अमानक सामान
जिले के किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से भी खाद-बीज और कीटनाशकों की सप्लाई की जाती है। यहां भी अमानक सामग्री बिकने का खुलासा हो चुका है। इसी कृषि सीजन में 3800 क्विंटल अमानक बीज का मामला सामने आया था। जब तक बीज के अमानक होने की रिपोर्ट आई, तब तक कई किसानों ने उपयोग कर लिया था। डीडीए दुर्ग एसएस राजपूत ने बताया कि हर सीजन में खाद-बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता की जांच का नियम है। इस आधार पर इस साल 41 सैम्पल लिए गए थे। इनमें से 19 की रिपोर्ट आई है। सभी सैम्पल में गुणवत्ता सही पाई गई है। पिछले तीन दिनों से लगातार दुकानों की जांच की जा रही है। कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।