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बीमा राशि नहीं देने वाले बैंक के खिलाफ किसान पहुंचे फोरम

बालोद जिले के 18 किसानों ने मुआवाजा नहीं दिए जाने पर बैंक को जिम्मेदार ठहराया है। पीडि़त किसानों ने उपभोक्ता फोरम में परिवाद प्रस्तुत किया है।

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Satya Narayan Shukla

Sep 20, 2016

Farmers who do not have insurance against banks ro

Farmers who do not have insurance against banks rose Forum

दुर्ग.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिलने से किसान ठगे से रह गए हैं। बैंक से सीधे प्रीमयम राशि जमा करने के बाद भी वर्ष 2015 में हुए नुकसान का अब तक मुआवाजा नहीं मिल पाया है। बालोद जिले के ग्राम खुरसूली गब्दी के 18 किसानों ने मुआवाजा नहीं दिए जाने पर बैंक को जिम्मेदार ठहराया है। पीडि़त किसानों ने कुल 12.70 लाख मुआवाजा की मांग करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद प्रस्तुत किया है। फोरम ने परिवाद को ग्राह्य करते हुए पंजीयन कर लिया है।


बीमा का लाभ नहीं मिला

किसानों ने अपने परिवाद में जानकारी दी कि उनके बैंक में खाते है। जहां से वे हर वर्ष खाद बीज के लिए ऋण लेकर कृषि करते हैं। केन्द्र सरकार की योजना राष्ट्रीय कृषि फसल बीमा के तहत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक ने उनके खातों से प्रीमियम राशि काटी थी। इस योजना के लिए बैंक ने बीमा कंपनी के साथ मध्यस्थता किया है। वर्ष 2015 में फसल पूरी तरह खराब होने पर उन्होंने नुकसान की भरपाई के लिए क्लेम आवेदन बैंक के माध्यम से प्रस्तुत किया, लेकिन उन्हें बीमा का लाभ नहीं मिला। योजना का लाभ नहीं मिलने पर बैंक बीमा कंपनी को दोषी ठहराते हुए उन्हें बैरंग लौटा दिया था।


इन्होंने किया परिवाद प्रस्तुत

राष्ट्रीय कृषि फसल बीमा योजना के तहत ग्राम खुरसुल निवासी मनोज जागड़े, एकनाथ देवागंन, पीताम्बर लाल साहू, किरण बाई, टूमन लाल, संतराम साहू समेत 18 किसान है जिन्होंने जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया है। पीडि़तों का कहना है कि मुआवाजा राशि के अलावा उन्हें मानसिक क्षतिपूर्ति और परिवाद व्यय भी दिलाया जाए।


इसी तरह के 11 परिवाद पंजीयन के लिए

राष्ट्रीय कृषि फसल बीमा योजना के तहत 11 परिवाद और भी है जिनका पंजीयन नहीं हो पाया है।पीडि़त किसानों का कहना है कि बैंक की लापरवाही के कारण वे बीमा योजना से वंचित हो गए। बैंक ने उनका प्रीमियम राशि काटा ही नहीं। मुआवाजा क्लेम आवेदन प्रस्तुत करने पर खुलासा हुआ कि उनका तो बांड ही नहीं है। वे बीमा के हकदार नहीं है, जबिक प्रीमियम राशि जमा कराने शासन ने बैंक को अधिकृत किया था।


और भी है मामले

किसान संघ के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने बताया कि इस तरह की अनियमित्ता केवल दुर्ग ही नहीं बालोद और बेमेतरा जिले में भी हुई है। हजारों किसान ऐसे हंै जिन्हें वास्तविक मुआवाजे की जगह केवल पांच से दस प्रतिशत राशि ही थमा दी गई है। शेष राशि उनके खाते में जमा ही नहीं कराई गई। वे ऐसे किसानों की सूची तैयार कर रहे हैं। सूची के आधार पर जल्द ही जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद प्रस्तुत किया जाएगा।


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