
निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के मामलों में जांच के आदेश दिए पर जांच नहीं की
दुर्ग . नगर निगम में निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के दर्जनभर से ज्यादा मामलों के खुलासे हो चुके हैं। इन मामलों में ठेकेदारों के साथ जिम्मेदार अफसरों पर भी कार्रवाई किया जाना है,लेकिन कार्रवाई तो दूर निगम प्रशासन इन मामलों की जांच तक शुरू नहीं हो पाई है। नगर निगम में बारिश में सड़कों के उखडऩे की शिकायतों के बाद निर्माण व विकास कार्यों की क्वालिटी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेसी सड़कों की गुणवत्ता के मामले में महापौर और सत्ताधारी दल के पार्षदों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वहीं भाजपाइ इसमें बचाव की मुद्रा में आ गए हैं। ऐसे में महापौर ने एक बार फिर ठेकेदारों के साथ जिम्मेदार अफसरों पर भी कार्रवाई की चेतावनी जारी की है।
सिर्फ नोटिस जारी हुआ
इससे पहले भी इसी तरह ठेकेदारों के साथ अफसरों पर भी कार्रवाई की चेतावनी जारी की जा चुकी है। इसके बाद भी हालात नहीं सुधरी है। पहले की तरह अब भी नोटिस देकर काम चलाया जा रहा है।
कांग्रेसी भी धरना प्रदर्शन तक सीमित
घटिया निर्माण और गड़बड़ी के मामलों पर विपक्षी दल की भूमिका भी केवल धरना-प्रदर्शन तक ही सीमित रह गया है। केवल शौचालय निर्माण में गड़बड़ी के मामले में सभापति राजकुमार नारायणी ने पहल की है।
सड़कों के मामले में फिर वही राग
इधर करोड़ों की लागत से बनाई गई आधा दर्जन सड़कें फिर उखड़ गई है। इसका भी प्रमुख कारण घटिया निर्माण है। इस मामले में एक बार फिर निगम के ठेकेदार और अफसर कटघरे में आ गए हैं। ऐसे में फिर ठेकेदारों के साथ अफसरों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है। हालांकि इस मामले में भी अब तक मामला नोटिस से आगे नहीं बढ़ पाया है।
यहां हुई गड़बड़ी
केस - 1 मुक्तिधाम को नहीं बख्शा : शिवनाथ मुक्तिधाम में 25 लाख की लागत से प्रतीक्षा स्थल बनाया गया है। यहां क्वालिटी की स्थिति यह है कि निर्माण के दौरान ही बीम और फ्लोर में दरारें पड़ गई। ठेकेदार ने इसे छुपाने के लिए कॉलम खड़ा कर पुट्टी भर दिया। निर्माण की दो बार जांच हो चुकी, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हुई।
केस - 2 शौचालय एक, भुगतान दो को : पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट के शौचालय को भी निगम के ठेकेदारों और अफसरों ने नहीं बख्शा। हालात यह रहा कि एक शौचालय बनाकर दो-दो एजेंसियों को भुगतान कर दिया गया। ऐसे 9 मामलों के खुलासे हो चुके हैं। मामले में भी केवल नोटिस से खानापूर्ति कर ली गई।
केस - 3 ढह गई एक करोड़ की दीवार : सतरूप शीतला तालाब का एक करोड़ से सौंदर्यीकरण किया गया। इसके तहत तालाब के चारों को रिटेनिंग वॉल बनाई गई। यह दीवार बारिश शुरू होते ही भरभराकर ढह गई। जांच में बिना छड़ व बेस के निर्माण के कारण दीवार ढहने का खुलासा हुआ, लेकिन नोटिस तक जारी नहीं किया गया।
केस - 4 हड़पी मृतकों की पेंशन : निर्माण और विकास कार्यों के साथ निगम के जिम्मेदारों ने सरकारी पेंशन योजना तक को नहीं बख्शा। यहां मिलीभगत कर मृतकों के नाम और फर्जी हितग्राही खड़ा कर पेंशन की राशि हड़पे जाने का भी खुलासा हो चुका है। सत्यापन में ऐसे करीब 2200 नाम सामने आए थे,जिनके नाम पर पेंशन निकाली जाती रही।
एक ही बारिश में उखड़ गई सड़क
इस संबंध में नेता प्रतिपक्ष लिखन साहू का कहना है कि सड़कों के डामरीकरण में जमकर बंदरबाट किया गया है। एक ही बारिश में सड़क उखड़ जाने से यह प्रमाणित भी हो गया है। निगम प्रशासन सड़कों की दोबारा निर्माण के बजाए डामर का घोल डालकर मरम्मत की बात कही जा रही है।
अमानत राशि राजसात की जाएगी
नगर निगम के लोककर्म प्रभारी दिनेश देवांगन ने बताया कि सड़कों के निर्माण में गड़बड़ी को गंभीरता से लिया गया है। ठेकेदार की अमानत राशि राजसात कर सड़क की मरम्मत कराई जाएगी। वहीं निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के मामलों में भी सख्ती बरती जा रही है। अब ठेकेदारों के साथ अफसरों की भी जिम्मेदारी तय होगी।
Published on:
21 Sept 2018 12:49 am
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