
प्रशासन ने माना आत्महत्या करने वाले दुर्ग जिले के किसान की 25% फसल हुई है खराब, कृषि और राजस्व विभाग ने सौंपी जांच रिपोर्ट
दुर्ग. ग्राम मातरोडीह के आत्महत्या करने वाले किसान डुगेश निषाद की 25 फीसदी फसल जांच में खराब पाई गई कृषि और राजस्व विभाग की ओर से तहसीलदार द्वारा की गई जांच में 25 फीसदी फसल खराब होने की बात कही गई है। इस नुकसान के एवज में किसान के परिवार को मुआवजा अथवा राहत की उम्मीद कम ही दिख रही है। किसान के रेग की जमीन की खेती और खुद के खेतों की फसल का बीमा नहीं कराया जाना इसमें बाधक बन सकता है। दूसरी ओर खेतों में उपयोग किए गए कीटनाशक दवाईयां असली हैं अथवा नकली इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। इधर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने मृतक किसान के पिता को बुधवार को शासन द्वारा घोषित चार लाख रुपए आर्थिक सहायता राशि का चेक सौंपा। साथ ही फसल को हुए नुकसान का मुआवजा दिलाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि कोई भी समस्या होने पर उन्हे बता सकते हैं। मदद का प्रयास किया जाएगा।
किसान ने की थी खुदकुशी
मातरोडीह के किसान डुगेश निषाद ने फसल खराब होने से व्यथित होकर शनिवार को खुदकुशी कर ली थी। किसान के परिवार से मिलने मातरोडीह पहुंचे गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कृषि विभाग के अधिकारियों को फसल क्षति के आंकलन के साथ खराब होने के कारणों का पता लगाने जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद कृषि और राजस्व विभाग की ओर तहसीलदार ने कृषि वैज्ञानिकों के साथ किसान के खेतों की जांच की। फसल की जांच के साथ प्रयोग किए गए कीटनाशक के भी सैम्पल लिए थे।
इसलिए कह रहे मुआवजा में अड़चन रेग की जमीन
प्राकृतिक आपदा से फसल क्षति की स्थिति में राजस्व पुस्तिका आरबीसी 6-4 के तहत शासन द्वारा क्षतिपूर्ति के रूप में मुआवजा दिया जाता है, लेकिन किसान ने 4 एकड़ जमीन गांव के दूसरे किसान से रेग पर लेकर बुआई किया था। वैधानिक तौर पर मुआवजा का हकदार भूमिस्वामी होता है। केवल डेढ़ एकड़ खुद की जमीन पर किसान को राहत मिल सकता है।
बीमा लाभ
किसान ने खुद के डेढ़ एकड़ जमीन की फसल का बीमा नहीं कराया था। वहीं रेग के 4 एकड़ जमीन पर 17 बोरी खाद लिया गया है। ऐसे में ऋण पर खाद क्रय करने के कारण अनिवार्य बीमा के तहत रेग की जमीन का बीमा लाभ मिलेगा, लेकिन यह लाभ भी भूमि स्वामी को मिलेगा। फसल बीमा लाभ के लिए पैदावार की गणना अब तक नहीं किया गया है।
सरकार की अनुकंपा पर निर्भर राहत
रेग की जमीन और बीमा नहीं कराए जाने की स्थिति में मृतक किसान को वैधानिक रूप से मुआवजा अथवा बीमा लाभ मिलना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में किसान के परिजनों के पास केवल सरकार की अनुकंपा का विकल्प रह जाएगा। जानकारों का कहना है कि सरकार चाहे तो मिसलेनियस मद से अथवा विशेष मंजूरी के माध्यम से किसान को मुआवजा के रूप में राशि दे सकती है। गृहमंत्री ने किसान के परिवार को इसका भरोसा भी दिलाया है।
नकली दवाई या ओवर डोज स्पष्ट नहीं
मृतक किसान के परिजनों ने बार-बार कीटनाशक डालने के बाद भी फसल बचा नहीं पाने के कारण व्यथित होने की जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि मृतक कम से कम 3 बार कीटनाशक का छिड़काव किया था। ऐसे में कम समय पर दवाई के ज्यादा छिड़काव से फसल जल जाने की भी आशंका व्यक्त की जा रही है। वहीं परिजन दवाइयों के असर नहीं होने की बात कह रहे हैं। इसलिए दोनों संभावनाओं के आधार पर जांच कराई जा रही है।
25 फीसदी फसल हो गई है खराब
उप संचालक कृषि दुर्ग एसएस राजपूत ने बताया कि किसान की करीब 25 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है। जांच के बाद इसकी रिपोर्ट आला अधिकारियों को सौंपा दिया गया है। कीटनाशक के सैम्पल की जांच की जा रही है। इसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। आगे की कार्रवाई आला अफसरों द्वारा की जाएगी। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन संयोजक राजकुमार गुप्ता ने बताया कि रेग और बीमा नहीं होने की स्थिति में वैधानिक तौर पर मुआवजा अथवा राहत में परेशानी हो सकती है, लेकिन सरकार चाहे तो विशेष प्रकरण के आधार पर राहत पहुंचा सकती है। आत्महत्या करने वाले किसानों के लिए केंद्र सरकार की ओर से भी मुआवजा का प्रावधान है।
Published on:
08 Oct 2020 12:25 pm
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