
Patrika
भिलाई.चना, गेहंू, मसूर, सरसों सहित अन्य अनाज का समर्थन मूल्य तय होने के बावजूद किसानों को उत्पाद का उचित दाम नहीं मिल रहा है। सहकारी समितियों में खरीदने की व्यवस्था नहीं होने की वजह से किसान मार्केट में बिचौलियों के पास बेचने का मजबूर हैं। चना में किसानों को प्रति क्विंटल 500-600रुपए तक कम कीमत मिल रही है। सरकार की ओर से चना की समर्थन मूल्य 42 सौ रुपए तय की गई है, लेकिन बाजार में किसानों को 3900 सौ रुपये में बेचना पड़ रहा है। ठीक ऐसे ही हालात गेहंू, मसूर, सरसों, तिवड़ा और अरहर का भी है।
चना का समर्थन मूल्य 4620रुपए
2018-19 के लिए चने का समर्थन मूल्य 4620 रुपए तय की है। बाजार में इतने ही कीमत पर चना बिकना चाहिए। बाजार में किसान का चना 3900 रुपए में बिक रहा है। बाजार में पुराने कीमत पर भी चना लेने वाला कोई नहीं है। पिछले साल चना का समर्थन मूल्य 4400 रुपए था। उसमें 220 की वृद्धि हुई है। ठीक ऐसी ही स्थिति मसूर का है। मसूर का समर्थन मूल्य 4475 रुपए है। बाजार में समर्थन मूल्य से 575 रुपए कम 3900 सौ रुपए में बिक रहा है।
सरसों में सर्वाधिक नुकसान
सर्वाधिक नुकसान तो किसान को सरसों में झेलना पड़ रहा है। सरसो का समर्थन मूल्य से 800 रुपए कम में बिक रहा है। सरसो का समर्थन मूल्य 4200 रुपए निर्धारित की है। बाजार में 33-35सौ रुपए तक बिक रहा है। इसी तरह से कुसुम, तिवड़ा, मूंग में भी नुकसान उठाना पड़ रहा है
1600रुपए में बिक रहा गेहंू
बाजार में गेहंू बेचने पर किसानों को प्रति क्विंटल २४० रुपए तक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बाजार में गेहंू 1600रुपए प्रति क्विंटल में बिक रही है। गेहंू का समर्थन मूल्य १८४० रुपए है। सरकार ने गेहंू की अच्छी कीमत देने के लिए पिछले साल की कीमत में 105 रुपए की वृद्धि की थी, लेकिन इसका फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है। 2017-18 के समर्थन मूल्य १७३५ से भी कम कीमत में गेहंू को बेचना पड़ रहा है।
बड़ा सवाल- ऐसे में कैसे होगी किसानों की आय दो गुना
अनाज बेचने पर किसानों को समर्थन मूल्य ही नहीं मिल रही है। बाजार में समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए कोई भी तैयार नहीं है तो ऐसे में किसानों की आय कैसे बढ़ेगी। किसानों को तो बाजार में व्यापारियों के रेट पर अनाज बेचना पड़ रहा है। इससे उन्हें प्रति क्विंटल 500-800 रुपए तक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अच्छी कीमत देने के लिए तय की है समर्थन मूल्य
सरकार ने किसानों की आय में वृद्धि के लिए धान, गेंहू, चना, अरहर या अन्य अनाज की अच्छी कीमत देने समर्थन मूल्य घोषित किया है। खरीदी के लिए एक मापदंड और क्वालिटी भी तय की गई है कि उससे हल्का माल नहीं खरीदा जाएगा। किसान अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए शासन के हर मापदंड को पूरा करने के लिए भी तैयार है, लेकिन शासन स्तर पर मंडी या सहकारी समितियों में खरीदी की व्यवस्था नहीं है।
खरीफ के बराबर के रकबा में रबी की खेती
संभाग के दुर्ग, बेमेतरा, राजनांदगांव और कबीरधाम जिले ८ लाख से अधिक किसान खरीफ और रबी की खेती करते हैं। ज्यादातर किसान रबी की फसल में चना,अरहर, गेंहू और सरसों की ही खेती करते हैं। दोमट और काली मिट्टी की वजह से अच्छी फसल होती है। इस वजह किसान ज्यादातर रकबा में चना की ही खेती करते हैं। उत्पादन भी अच्छा होता है, लेकिन इस साल बेमौसम बारिश की वजह से फसल को काफी नुकसान हुआ है। उत्पादन में कमी आई है। बाजार में उचित कीमत नहीं मिल रहा है।
औने-पौने दाम में बेच रहे
प्रगतिशील किसान संगठन के सदस्य प्रसन्न टांक का कहना है कि कृषि उपज मंडी में चना की खरीदी की व्यवस्था नहीं होने की वजह से मजबूरी में किसानों को बाजार में चना औने-पौने दाम में बेचना पड़ रहा है। शासन को मंडी या सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर चना खरीदी की व्यवस्था शुरू करना चाहिए।
फसल आते ही बाजार में रेट कम
किसान के संतोष चंद्राकर का कहना है कि प्रदेशभर के किसान रबी फसल में गेंहू और चना की खेती करते हैं। जैसे ही किसानों की फसल आती है। बाजार में अचानक रेट कम हो जाता है। धान खरीदी की तरह इस पर भी नियंत्रण लगाना चाहिए ताकि किसानों को लाभ मिल सके।
होगी कार्रवाई
संचालनालय कृषि उपज मंडी बोर्ड के मुख्य सचिव अभिनव अग्रवाल का कहना है कि शासन स्तर पर खरीदी की व्यवस्था नहीं है। बाजार के भाव के अनुसार अनाज की खरीदी और बिक्री चल रही है। बाजार में कीमत कम होने का पता लगाया जाएगा। कालाबाजारी के मामले में कार्रवाई भी की जाएगी।
Published on:
08 Apr 2019 12:13 am

बड़ी खबरें
View Allदुर्ग
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
