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हरिजन शब्द लिखने से सतनामी समाज नाराज

सतनामी व छत्तीसगढ़ समाज ने संयुक्त तौर पर गुरुवार को घड़ी चौक में दोपहर राज्य सरकार का पुतला फूंका।

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Satya Narayan Shukla

Apr 08, 2016

Harijan word for sage writing angry Satnami societ

Harijan word for sage writing angry Satnami society

भिलाई.
सतनामी व छत्तीसगढ़ समाज ने संयुक्त तौर पर गुरुवार को घड़ी चौक में दोपहर राज्य सरकार का पुतला फूंका। इसके बाद वे सड़क जाम करने फोरलेन में आ गए। सांकेतिक तौर पर करीब 20 मिनट तक चक्काजाम किया। यातायात पुलिस इस दौरान वाहनों के लिए रास्ता बनाने में जुटी रही। समाज के प्रतिनिधि इस बात से नाराज थे कि राज्य सरकार ने पुस्तिक में नाम बाबा गुरु घासीदास लिखा है, लेकिन फोटो किसी और का लगा दिया है। इसी तरह से बाबा के लिए प्रतिबंधित शब्द (हरिजन) के घर में जन्म लेने की बात कही है। प्रदर्शनकारियों ने इस संबंध में कलक्टर व एसपी के नाम

ज्ञापन सौंपा।


हरिजन शब्द पर भारत सरकार ने लगा दिया है प्रतिबंध

समाज के लोगों ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार लोक शिक्षा केन्द्रों में नव साक्षर साहित्य अभियान के तहत गुरु बाबा घासीदास की जीवनी पुस्तक बांट रही है। इसमें उन्हें हरिजन परिवार में जन्म लेना लिखा गया है। जबकि हरिजन शब्द पर भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है।


छत्तीसगढिय़ा क्रांति सेना

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुस्तक में बाबा के जीवन के संबंध में बताया जा रहा है, तो उनका मूल चित्र लगाया जाना चाहिए। इस तरह से अन्य फोटो लगाने का क्या तुक है। छत्तीसगढिय़ा क्रांति सेना ने आरोप लगाया है कि यह प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने आरएसएस के इशारे पर समाज की छवि को धूमिल करने के लिए किया है।


भारत सरकार ने लगाया है प्रतिबंध

हरिजन शब्द पर सरकार ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। मध्य प्रदेश सरकार के आदेश क्रमांक 2140 / 29-6-1989 के अनुसार हरिजन शब्द किसी को बोलना या कहना लिखना कानूनी अपराध है। अविभाजित मध्य प्रदेश सरकार ने 29 अगस्त 1991 को सख्ती से पालन करने निर्देश जारी किया था। बाबा के लिए बार-बार हरिजन शब्द का उपयोग करने से समाजिक भावना आहत हुई है।


मंत्री, सचिव जिम्मेदार

विवादित पुस्तक के प्रकाशन के लिए प्रदेश सरकार के शिक्षा मंत्री केदार कश्यप एवं शिक्षा सचिव सुब्रत साहू जिम्मेदार हैं। इसके पहले सचिव साहू ने प्रदेश के स्कूलों में उडिय़ा भाषा को अनिवार्य तौर पर लागू करने का तुगलकी फरमान जारी किया था, जिसका छत्तीसगढ़ी समाज ने विरोध किया था।

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