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नहीं बेचा धान तो न्याय का भी नहीं लाभ, केवल सुगंधित धान पर मिलेगा प्रोत्साहन

पंजीयन कराकर समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेचने वाले किसानों को इस बार भी न्याय योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसकी जगह जिन्होंने सुगंधित धान बोया था और पंजीयन कराया है, उन्हें उन्हें सुगंधित धान की खरीदी की व्यवस्था नहीं होने के कारण न्याय योजना का लाभ दिया जाएगा। उद्यानिकी व दीगर फसल, जिनकी खरीदी की व्यवस्था नहीं है, उन्हें भी योजना में शामिल करने का बाद पंजीयन कराकर धान नहीं बेचने वाले किसानों को भी न्याय का लाभ मिलने को लेकर कयास लगाए जा रहे थे।

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राज्य शासन द्वारा धान की खेती को लाभकारी बनाने समर्थन मूल्य के साथ करीब 10 हजार रुपए प्रति एकड़ राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रोत्साहन के रूप में दिया जाता है। इस बार इस योजना में उद्यानिकी व दीगर फसलों के साथ सुगंधित धान को भी शामिल किया गया है, लेकिन इन फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते समर्थन मूल्य पर बिक्री के बिना भी केवल पंजीयन के आधार पर न्याय योजना का लाभ मिलने जैसी भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई थी। लिहाजा पंजीयन के बाद धान विक्रय नहीं करने वाले किसान न्याय के लाभ संबंधी आवेदन लेकर दफ्तरों के चक्कर तक लगा रहे हैं।


7063 किसानों ने नहीं बेचा धान
इस साल जिले के 7063 किसानों ने पंजीयन के बाद भी धान नहीं बेचा है। ये किसान भी न्याय योजना के लाभ की उम्मीद लगा रहे थे। इस बार समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के लिए 102652 किसानों ने पंजीयन कराया था। इनमें से 95699 किसानों ने धान विक्रय किया। वहीं 7063 किसान धान बेचने नहीं आए। किसानों से 4170968 क्विंटल धान की खरीदी की गई।


जिनका पंजीयन उन्हें प्रोत्साहन
अफसरों ने बताया कि शासन की घोषणा के अनुरूप उद्यानिकी व दीगर फसल जिन्हे न्याय योजना में शामिल किया गया है, उनका पंजीयन किया गया है। पंजीयन के साथ उनके रकबे का सत्यापन भी किया गया है। इसमें सुगंधित धान भी शामिल है। जिन्होंनेे पंजीयन कराया है, उन्हें न्याय की राशि मिलेगी। यह समर्थन मूल्य पर खरीदी के दायरे में आने वाले धान पर लागू नहीं होगा।

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