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लापरवाही-14 करोड़ खर्च के बाद याद आया वीआईपी लाउज व बेसमेंट, 7 करोड़ की दरकार, रिवाइज्ड प्लान में अटका साइंस कॉलेज ऑडिटोरियम

साइंस कॉलेज के ऑडिटोरियम निर्माण में अजब लापरवाही सामने आई है। पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने 14 करोड़ रुपए खर्च कर लिए, तब उन्हें समझ में आया कि ऑडिटोरियम में वीआईपी लाउज और बेसमेंट भी बनाया जाना है। इस पर अब 7 करोड़ अतिरक्ति जोड़कर 21 करोड़ का रिवाइज्ड प्लान तैयार किया गया है, लेकिन इसकी मंजूरी अब तक नहीं मिल पाई है। लिहाजा ऑडिटोरियम का काम भी करीब एक साल से बंद है।

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लापरवाही-14 करोड़ खर्च के बाद याद आया वीआईपी लाउज व बेसमेंट, 7 करोड़ की दरकार, रिवाइज्ड प्लान में अटका साइंस कॉलेज ऑडिटोरियम

मंजूरी में देरी के चलते एक साल से बंद है निर्माण कार्य

शहर में बड़े आयोजनों के लिए सर्वसुविधायुक्त स्थलों की कमी को ध्यान में रखकर साइंस कॉलेज परिसर में ऑडिटोरियम का निर्माण कराया जा रहा है। 750 सीटर इस ऑडिटोरियम को वर्ष 2018 में मंजूरी दी गई थी। प्लान के मुताबिक ऑडिटोरियम का निर्माण वर्ष 2020 की शुरूआत में पूर्ण कर लिया जाना था, लेकिन चार साल बाद भी ऑडिटोरियम का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। दरअसल पूर्व में स्वीकृत प्लान में ऑडिटोरियम में वीआईपी लाउज और बेसमेंट का प्रावधान नहीं किया गया था। इस आधार पर 14 करोड़ का काम कराया जा चुका है। लेकिन अब यहां वीआईपी लाउज और बेसमेंट की जरूरत को ध्यान में रखते हुए रिवाइज्ड प्लान मंजूरी के लिए भेजा गया है।


अदूरदर्शिता पड़ रहा भारी
बताया जा रहा है कि ऑडिटोरियम की स्वीकृति के दौरान तत्कालिन अफसरों ने दूरदर्शिता नहीं दिखाई और वीआईपी लाउज और बेसमेंट जैसे जरूरी सुविधाओं के प्रावधान के बिना ही प्रपोजल स्वीकृति के लिए सरकार को भेज दिया। सरकार ने भी बिना परीक्षण इसकी मंजूरी दे दी। तत्कालिन अफसरों की यह अदूरदर्शिता अब भारी पड़ रहा है।


साल भर से अटका है प्लान
वीआईपी लाउज और बेसमेंट के साथ देरी के कारण खर्च में बढ़ोतरी को मिलाकर अब ऑडिटोरियम में करीब 21 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इस आधार पर रिवाइज्ड प्लान बनाकर मंजूरी के लिए करीब सालभर पहले ही विभाग को भेजा जा चुका है, लेकिन इसकी मंजूरी अब तक नहीं मिल पाई है। कोरोना के कारण उपजे आर्थिक संकट को देरी का कारण बताया जा रहा है।


जनप्रतिनिधियों ने नहीं दिखाई गंभीरता
इधर ऑडिटोरियम का निर्माण करीब एक साल से बंद है। इस बीच अफसर व स्थानीय जनप्रतिनिधि स्थल निरीक्षण करते रहे, लेकिन रिवाइज्ड प्लान की मंजूरी अथवा काम शुरू कराने में ध्यान नहीं दिया। अफसरों का कहना है कि बिना मंजूरी काम शुरू कराना संभव नहीं है, जबकि जनप्रतिनिधि इस दिशा में पहल करने की बात कह रहे हैं।