
दुर्ग. छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस से दो और मरीजों की मौत हो गई। सेमवार को इससे पीडि़त भिलाई की 61 वर्षीय बी. लक्ष्मी और कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ की 76 वर्षीय करूणा वर्मा की मौत हो गई। इस बीमारी से पहली मौत छह दिन पहले भिलाई में ही हुई थी। भिलाई निवासी बीएसपी कर्मी में फंगस की पुष्टि के साथ ही उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। दुर्ग जिले में ब्लैक फंगस (Black fungus in Durg) तेजी से पांव पसार रहा है। स्वास्थ्य विभाग (CG Health department) ने प्रदेश में ब्लैक फंगस के 76 मरीजों की पुष्टि की है। हालांकि 100 से ज्यादा मरीजों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। एम्स (AIIMS Raipur) में भिलाई , कबीरधाम, दुर्ग, रायपुर, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, राजनांदगांव व कुछ अन्य जिलों के 50 मरीज भर्ती हैं। 12 मरीजों का सफल ऑपरेशन हो गया है। रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में चार, बिलासपुर के सिम्स में तीन और कई निजी अस्पताल में और भी मरीज भर्ती हैं।
मरीज को समय पर नहीं लग पाया इंजेक्शन
मिली जानकारी के अनुसार दुर्ग जिले में मेडिकल कॉलेज, कचांदुर में दाखिल बी लक्ष्मी (61 साल) ने सोमवार की सुबह ब्लैक फंगस से संघर्ष करते हुए दम तोड़ दिया। चंदूलाल चंद्राकर अस्पताल, नेहरू नगर के वेंटिलेटर से उसे सीएम मेडिकल कॉलेज में रविवार को सिर्फ इस वजह से शिफ्ट करना पड़ा था क्योंकि इंजेक्शन नहीं मिल रहा था। सरकारी अस्पताल के लिए इंजेक्शन रखा हुआ था, मरीज की हालत बिगड़ रही थी। तब तय किया गया कि सरकारी में दाखिल कर देते हैं जिससे मरीज को इंजेक्शन तो लग सके। जिले में ब्लैक फंगस से पहली मौत सेक्टर-9 अस्पताल में हुई थी। 11 मई को सेक्टर-1 में रहने वाले श्रीनिवास राव 48 वर्ष ने दम तोड़ा था।
ब्लैक फंगस के अलावा था दूसरा मर्ज
बलैक फंगस से दुर्ग जिले में दूसरी मौत के बाद सीएमएचओ दुर्ग डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर ने बताया कि मरीज को ब्लैक फंगस के अलावा दूसरा मर्ज भी था। प्लेटलेट कम होने की वजह से इंजेक्शन भी नहीं लगाया जा सका और उनकी मौत हो गई। मरीज को निजी अस्पताल से एक दिन पहले ही सीएम मेडिकल कॉलेज में दाखिल किया गया था। मरीज की हालत खराब थी वह वेंटीलेटर में थी।
क्या है म्यूकोरमाइकोसिस
म्यूकोरमाइकोसिस (Blck fungus mucormycosis) एक फंगल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से उन लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, जो पहले से डायबिटीज जैसी किसी अन्य बीमारी से ग्रस्त हैं। यह संक्रमण वातावरण में मौजूद रोगजनकों के खिलाफ लडऩे की शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है। वातावरण में मौजूद फंगल बीजाणुओं के संपर्क में आने से लोग म्यूकोरमाइकोसिस का शिकार बनते हैं। किसी घाव के जरिए भी यह शरीर में प्रवेश कर सकता है, और संक्रमण का कारण बन सकता है।
Published on:
18 May 2021 11:23 am

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