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स्वास्थ्य मंत्री जी, इस सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर से कराना है उपचार तो मरीजों को करना पड़ता है एक सप्ताह इंतजार

सुपेला के लाल बहादुर शास्त्री शासकीय अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टर से इलाज कराना है तो आपको सप्ताहभर अपनी पारी का इंतजार करना होगा।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Dec 22, 2019

स्वास्थ्य मंत्री जी, इस सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर से कराना है उपचार तो मरीजों को करना पड़ता है एक सप्ताह इंतजार

स्वास्थ्य मंत्री जी, इस सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर से कराना है उपचार तो मरीजों को करना पड़ता है एक सप्ताह इंतजार

भिलाई . सुपेला के लाल बहादुर शास्त्री शासकीय अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टर से इलाज कराना है तो आपको सप्ताहभर अपनी पारी का इंतजार करना होगा। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति करने के बजाए जिला स्वास्थ्य विभाग ने दुर्ग जिला अस्पताल के विशेषज्ञों की साप्तहिक रोटेशन में ड्यूटी लगाई है। शहर व आसपास की लगभग सात लाख आबादी के लिए लाल बहादुर शास्त्री शासकीय अस्पताल एकमात्र सिविल अस्पताल है। यहां ओपीडी में रोज औसतन 400 मरीज उपचार कराने आते हैं।

मौसमी संक्रामक बीमारी के दिनों में यह संख्या करीब डेढ़ गुना हो जाती है। कहने को तो यह सौ बिस्तर अस्पताल है, मगर विशेषज्ञ चिकित्सक और सुविधाएं नहीं होने के कारण यहां केवल प्राथमिक उपचार ही हो पाता है। बाकी यह रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। ऐसे में मरीज व उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ती है। यहां तक कि दवाइयां भी मरीजों के पैसे (दस रुपए शुल्क) से खरीदनी पड़ती है।

सेटअप में अस्थि रोग विशेषज्ञ मगर आज तक नहीं हुई पोस्टिंग
सौ बिस्तर अस्पताल की घोषणा के साथ ही यहां सेटअप में अस्थि रोग विशेषज्ञ का पद रखा गया। इसके पीछे मंशा यह थी कि राष्ट्रीय राजमार्ग में आए दिन हादसे होते रहते हैं। हड्डी आदि फ्रैक्चर होने पर जीई रोड के बिलकुल किनारे लगे इस अस्पताल से त्वरित चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी, लेकिन आज तक अस्थि रोग विशेषज्ञ की पोस्टिंग नहीं हो सकी है। पीजीएमओ के रूप में डॉ. डीके पटेल की नियुक्ति की गई है। वे भी अभी फेलोशिप के लिए लंबे अवकाश पर हैं।

कैसे हो मरीजों का इलाज
अभी वर्तमान में प्रभारी डॉ. संजय वालवंद्रे और डॉ. सुरेश अग्रवाल दो ही मेल डॉक्टर हैं। डॉ. डीके पटेल फेलोशिप के लिए लंबे अवकाश पर हैं। नाइट शिफ्ट ड्यूटी में असमाजिक तत्वों द्वारा मारपीट करने की घटना के बाद डॉ. बी. मेश्राम ने अपना तबादला जिला अस्पताल करवा लिया है। इनके अलावा महिला चिकित्सकों में डॉ. रचना दवे, डॉ. बबीता सक्सेना, डॉ. बीएन वाहने, डॉ. मंजू राठौर, डॉ. अंकिता कामड़े और डॉ. विलियम (अटैच ) हैं। ये सभी पीजीएमओ या एमओ हैं।

इन चिकित्सकों की तत्काल आवश्यकता
वैसे तो यहां 11 चिकित्सकों की पोस्टिंग है, मगर एक भी स्पेशलिस्ट नहीं है। यहां एमडी मेडिसिन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशुुरोग विशेषज्ञ, अस्थिरोग विशेषज्ञ की जरूरत है। लाल बहादुर शास्त्री शासकीय अस्पताल सुपेला के प्रभारी डॉ. संजय वालवंद्रे ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सक और सुविधाओं की जरूरत तो है, लेकिन फिर भी उपलब्ध संसाधनों से ही लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने पूरा प्रयास किया जा रहा है। सभी चिकित्सक व स्टाफ की भरसक कोशिश रहती है कि यहां आने वाले मरीज स्वस्थ होकर लौटे।

वैकल्पिक व्यवस्था से ही चलाना होगा काम
विशेषज्ञ चिकित्सों की कमी को देखते हुए सिविल सर्जन ने यहां सप्ताह में एक दिन जिला अस्पताल के डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है।
सोमवार
डॉ. एके गणवीर- ईएनटी विशेषज्ञ
मंगलवार
आरके मल्होत्रा- शिशु रोग विशेषज्ञ
बुधवार
डॉ. केके जैन- मेडिकल विशेषज्ञ
गुरुवार
डॉ. केडी तिवारी- अस्थि रोग विशेषज्ञ
शुक्रवार
डॉ. सरिता मिंज- सर्जरी विशेषज्ञ
शनिवार
डॉ. ममता पांडेय- स्त्री रोग विशेषज्ञ