
नई दिल्ली: कोरोनावायरस महामारी के बढ़ते रहने की वजह से WHO पर भी निशाना साधा गया । अमेरिका ने तो सीधे तौर पर WHO के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए चीन के पक्ष में काम करने की बात कही थी । दरअसल who ने कई बार जो निर्देश दिये उनसे चीन को तो फायदा हुआ लेकिन ये महामारी पूरी दुनिया में फैल गई। इसीलिए अब अमेरिका ने WHO को दी जाने वाली फंडिंग रोकने का ऐलान कर दिया है। अमेरिका में अब तक 6 लाख से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं वहीं 25 हजार लोगों की मौत हो चुकी है ।
सबसे ज्यादा पैसा देता है अमेरिका- WHO की फंडिंग की बात करें तो अमेरिका सबसे ज्यादा पैसा देता है। अमेरिका ने पिछले साल WHO को 400 मिलियन डॉलर की फंडिंग दी जो कि WHO के कुल बजट का 15 फीसदी है। अगर चीन की बात करें तो उसने 76 मिलियन डॉलर की फंडिंग की है। यानि अमेरिका के कदम से WHO को बड़ा झटका लगेगा । वैसे WHO को इस बातका अहसास है और यही वजह है कि अमेरिका के ऐलान के बाद संगठन ने अमेरिका के फैसले की टाइमिंग को गलत बताया है।
पहले भी आमने-सामनेआ चुके हैं who और अमेरिका-
ये पहली बार नहीं है जबकि अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ के फैसलों पर नाराजगी जताई है । इसीलिए उन डिफरेंसेज की वजह से व्हाइट हाउस 2019 से लगातार विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिये जाने वाले अनुदान में कटौती करता रहा है । व्हाइट हाउस ( White House ) ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट में दिखाया है कि किस तरह साल दर साल वो who की फंडिंग कम रहा है । वित्तीय वर्ष 2021 में अमेरिका ने 57915 अमेरिकन डॉलर का अनुदान किया है जो कि पहले दी जाने वाली रकम के मुकाबले आधे से भी कम है।
बाकी देशों से मदद मांग रहा है WHO- कोरोना से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मुहिम चला रखी है जिसके तहत पूरी दुनिया से फंड की मांग की है इसमें भी यूएस ने 200 मिलियन डॉलर की मदद की है।
Updated on:
16 Apr 2020 07:18 am
Published on:
15 Apr 2020 11:34 am
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