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अगस्त में अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका, उद्योगों के उत्पादन में दिखी साढ़े तीन साल की सबसे बड़ी गिरावट

बुनियादी उद्योगों का उत्पादन अगस्त में सालाना आधार पर 0.5 फीसदी रहा नवंबर 2015 में उद्योगों का उत्पादन सालाना आधार 1.3 फीसदी किया गया था दर्ज आठ बुनियादी उद्योगों का उत्पादन में देखने को मिली है सबसे बड़ी गिरावट

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की संसद से लेकर और तमाम विदेशी दौरों में ऐलान कर दिया है कि भारत अगले पांच सालों में 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने की ओर अग्रसर है। वहीं दूसरी ओर इकोनॉमी से जुड़े आंकड़े सामने आ रहे है वो पांच ट्रिलियन की इकोनॉमी को मदद करने वाली नहीं है। हालिया आंकड़ों के अनुसार देश के आठ बुनियादी उद्योगों का उत्पादन इस साल अगस्त में सालाना आधार पर 0.5 फीसदी नीचे रहा। यह पिछले साढ़े तीन साल में आई सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले बड़ी गिरावट नवंबर 2015 में 1.3 फीसदी की दर्ज की गई थी। आपको बता दें कि मोदी सरकार ने देश की इकोनॉमी को रफ्तार देने के लिए कॉरपोरेट टैक्स में छूट और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने वाले कई ऐलान किए हैं।

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इन उद्योगों में देखने को मिली कटौती
देश के आठ प्रमुख उद्योगों में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उवर्रक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल हैं। पिछले साल अगस्त में इन क्षेत्रों का उत्पादन सालाना आधार पर 4.7 फीसदी से ज्यादा था। वहीं सोमवार को जारी हुए आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2019 में कोयला में 8.6 फीसदी, कच्चा तेल में 5.4 फीसदी, प्राकृतिक गैस में 3.9 फीसदी, सीमेंट में 4.9 फीसदी, बिजली क्षेत्र में 2.9 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। वहीं रिफाइनरी उत्पादों की उत्पादन वृद्धि दर अगस्त 2019 में 2.6 फीसदी रही है, जो अगस्त 2018 की 5.1 फीसदी के मुकाबले कम है।

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इन क्षेत्रों में इजाफा
वहीं दूसरी ओर में उवर्रक और इस्पात क्षेत्र में उत्पादन बढ़ा है। दोनों में क्रमश: 2.9 फीसदी और 5 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। बता दें कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अगस्त अवधि में बुनियादी उद्योगों की उत्पादन वृद्धि दर 2.4 फीसदी है। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में इसी अवधि में इनकी वृद्धि दर 5.7 फीसदी थी। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. देवेंद्र कुमार पंत के अनुसार अप्रैल के बाद बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में आई पहली कमी है और यह दर्शाता है कि मांग कमजोर है।

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