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नई दिल्ली: शुक्रवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए black friday साबित हो रहा है। संसेक्स में 3000 अंक और निफ्टी 966 अंको की गिरावट दर्ज होने के बाद शेयर बाजार की ट्रेडिंग को लगभग 45 मिनट के लिए रोक दिया गया है। मार्केट इंडेक्स में मैनुफैक्चरिंग, स्टील, ऑयल, बैंक, इंश्योरेंस, सीमेंट, टेक्सटाइल सेक्टर हो या फार्मा इंडस्ट्री सभी लाल सागर में गोते लगाते नजर आए लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो भारतीय अर्थव्यवस्था का ये दौर 2 सालों से लगातार चली आ रही सुस्ती का नतीजा है । पिछले 2 सालों से देश की GDP की हालत खराब है । उसी का परिणाम आज हमें देखने को मिल रहा है।
अर्थव्यवस्था को जीवनदान देगी LIC-
सरकार ने वित्तीय व्यवस्था को किसी भी और गिरावट से बचाने का जिम्मा LIC को सौंपा है । लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर LIC कब तक भारतीय अर्थव्यवस्था को संभालने में कामयाब होगी जबकि ऐसे हालातों की पुनरावृत्ति होती रहती है। ये सवाल इसलिए और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि हाल के दिनों में NPA वाले बैंकों की वजह से एलआईसी पर बुरा प्रभाव पड़ा है और इसका खामियाजा आखिर में भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा ।
बदलनी होगी नीति-
ट्रेड यूनियन ज्वाइंट एक्शन कमेटी के कंवेनर विश्वास उतागी ने इसके लिए सरकार को जिम्मेदार मानते हैं । उनका कहना है कि जब तक सरकार अपनी अमीरों को पुचकारने की नीति में परिवर्तन नहीं करती भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार नामुमकिन है। और अच्छे दिन के वादों के साथ आई सरकार की नीतियां लोगों को बुरे दिन ज़रूर महसूस कराएगी ।
फार्मा और ट्रैवेल इंडस्ट्री पर गिरेगी गाज-
इंडस्ट्री इंसाइडर्स का मानना है अप्रैल से मई के महीने तक कोरोना का असर फार्मा और ट्रैवेल इंडस्ट्री के ऊपर दिख सकता है । दरअसल जिस तरह के हालात दिख रहे हैं और देशों ने यात्राओं पर प्रतिबंध लगाया उससे ट्रैवेल और टूरिज्म के कारोबार पर असर पड़ना अवश्यंभावी है।
Updated on:
13 Mar 2020 05:49 pm
Published on:
13 Mar 2020 05:48 pm

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