
tomato price hike
नई दिल्ली। इस साल आम आदमी पर महंगाई की तिहरी मार पड़ रही है। आलू और टमाटर के दाम तो आसमान छू ही रहे थे, अब दाल एक बार फिर पहुंच से दूर नजर आ रही है। गुरुवार (16 जून) को दलहन की कीमत 200 रुपए किलो के करीब पहुंच गई।
पिछले दो सालों में अरहर की कीमत दोगुनी हुई है, जबकि उड़द की कीमत में करीब 120 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। दालों की कीमत में बढ़ोतरी की स्थिति यह है कि बड़ी मात्रा में उत्पादित होने वाली चना दाल तक की कीमत में इस साल 85 फीसदी का इजाफा हुआ है।
उधर रोजाना सब्जियों में इस्तेमाल होने वाले आलू और टमाटर का मामला यह है कि दोनों की ही फसल कम अवधि में तैयार हो जाती है, लेकिन इनके दामों में भी जबर्दस्त बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। टमाटर का पौधा लगाने के 60 से 70 दिनों के बाद टमाटर तैयार हो जाता है, जबकि आलू 75 से 120 दिनों में तैयार होता है।
फिलहाल बाजार में जो टमाटर आ रहा है उसे मार्च में बोया गया था। उस समय तापमान बेशक अधिक था, लेकिन इसका टमाटर की फसल पर कोई असर नहीं पड़ा था, फिर भी टमाटर की कीमतें आसमान छू रही हैं। उधर आलू के उत्पादन में कमी का अनुमान पहले ही लगाया जा चुका था। अनुमान था कि पिछले साल के 4.8 करोड़ टन के मुकाबले इस साल 4.6 करोड़ टन आलू का उत्पादन होगा। आलू की फसल का एक बड़ा हिस्सा हर साल कोल्ड स्टोरेज में चला जाता है, जिसमें बाद में बाजार में लाया जाता है। इसलिए आलू की महंगाई सप्लाई और डिमांड पर आधारित नहीं है। इस साल आलू के महंगे होने के पीछे कारण बंगाल में पाले का गिरना हो सकता है।
खुफिया एजेंसियां करेंगी जांच
सरकार ने देश में दाल की कमी पूरी करने के लिए आपूर्ति बढ़ाने के सारे रास्ते खोल दिए हैं, साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर शिकंजा कसने के पुख्ता इंतजाम भी कर लिए हैं। इसके लिए राज्यों के पुलिस महानिदेशक, खुफिया एजेंसियों के प्रमुख, राजस्व खुफिया विभाग, आयकर विभाग और केंद्रीय खुफिया एजेंसी इंटेलीजेंस ब्यूरों का सहयोग लिया जा रहा है। बीते दिन वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई अच्च स्तरीय बैठक में दालों के बफर स्टॉक को डेढ़ लाख टन से बढ़ाकर आठ लाख टन करने का फैसला भी लिया गया।
Published on:
17 Jun 2016 10:50 am
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