
Diabetes
मुंबई। मधुमेह से भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। देश में हर साल इस बीमारी के प्रबंधन में अरबों रुपए का खर्च आता है। मुंबई के एसआरएल अस्पताल के डॉक्टर अविनाश फड़के का कहना है, 'देश पर मधुमेह से होने वाला वित्तीय बोझ अगले 10 सालों में और बढ़ जाएगा। इसके साथ ही इससे कर्मचारियों की उत्पादकता और राष्ट्रीय आय भी प्रभावित होगी।'
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उन्होंने कहा कि हर साल इस बीमारी के प्रबंधन का खर्च बढ़ रहा है जो आर्थिक दृष्टि से सही नहीं है। इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए इस पर ध्यान देने की जरूरत है। इस्ट एंग्लिया यूनिवर्सिटी के ताजा अध्ययन के अनुसार मधुमेह लोगों के रोजगार और वेतन को तेजी से प्रभावित करता है। यह बीमारी उन पर वित्तीय बोझ को बढ़ाती है। एक मैग्जीन ने भी पिछले साल मधुमेह टाइप-2 से विश्व की अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले प्रभाव संबंधी लेख को प्रकाशित किया था। खास बात है कि केवल उच्च अर्थव्यवस्था वाले देश ही नहीं कम और मध्यम आय वाले देशों पर भी इस बीमारी के प्रबंधन का भारी बोझ है।
इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता टिल सीङ्क्षरग का कहना है, 'पूरी दुनिया में 38.2 करोड़ लोग मधुमेह से पीडि़त हैं और साल 2035 तक यह संख्या बढ़कर 59.2 करोड़ होने की आशंका है। यह एक दीर्घकालिक (लंबी) बीमारी है जिसने हाल के कुछ दशकों में व्यापक रूप से अपना विस्तार किया है।' तेजी से वृद्धि करने की वजह से मधुमेह एक संभावित माहमारी का रूप ले रही है जो वर्तमान में करीब 6.2 करोड़ लोगों को प्रभावित कर रही है। फड़के के अनुसार, साल 2030 तक मधुमेह से करीब 79.4 करोड़ लोग प्रभावित हो सकते है।
Published on:
07 Dec 2015 09:11 am
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