
equalisation levy tax on facebook
नई दिल्ली। सरकार ने Google और Facebook जैसी कंपनियों पर ऐडवर्टाइजर्स की ओर से चुकाई जाने वाली फीस पर छह पर्सेंट की 'इक्वलाइजेशन लेवी लगाने की योजना बनाई है। डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग प्लेटफार्म पर सीधा टैक्स लगाने की बजाय सरकार ने यह अप्रत्यक्ष रूप से टैक्स वसूलने का रास्ता निकाला है। 'इक्वलाइजेशन' इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सरकार प्रतिस्पर्धा के लिए बराबरी का माहौल तैयार कर रही है और गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों को उस रकम पर टैक्स चुकाना होगा, जो वे लोकल ऐडवर्टाइजर्स से हासिल करती हैं। इससे विदेश में होने वाले डिजिटल ट्रांजैक्शंस पर टैक्स लगाया जा सकेगा और ऐडवर्टाइजर्स के लिए कॉस्ट बढ़ जाएगी।
स्थाई ठिकाना नहीं
सरकार ने इसके पीछे कारण यह दिया है कि मल्टीनेशनल डिजिटल प्लेटफॉम्र्स के पास भारत में 'स्थाई ठिकाना' नहीं है, जिससे उन पर टैक्स देनदारी नहीं बन पाती है। उन पर दोहरा टैक्स भी नहीं लगाया जा सकता था। ऐसे में सरकार को इन प्लेटफार्म के प्रॉफिट में से कुछ हिस्सा हासिल करने का तरीका खोजना है।
फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने सोमवार को अपने बजट भाषण में कहा था कि स्थायी ठिकाना न रखने वाली 'विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों' को ऑनलाइन ऐडवर्टाइजिंग के लिए एक वर्ष में एक लाख रुपए से अधिक की पेमेंट पर छह पर्सेंट का टैक्स लगेगा। इसका बोझ पूरी तरह गूगल, ऐडवर्टाइजर या दोनों को उठाना पड़ेगा।
4,108 करोड़ रुपए का रेवेन्यू
गौरतलब है कि 2014-15 में गूगल को भारत से 4,108 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला था। फेसबुक की इसी अवधि में भारत से आमदनी 123.5 करोड़ रुपये की थी। वहीं सरकार के इस फैसले पर गूगल ने कहा कि वह प्रस्तावित टैक्स का रिव्यू कर रहा है जबकि इस बारे में फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, याहू और ट्विटर ने ईटी की ओर से भेजी गई ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया।
ब्रिटेन में भी हुआ था विवाद
इंटरनेट कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली इंटरनेट ऐंड मोबाइल असोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि वह अपनी मेंबर कंपनियों पर इस टैक्स के असर का अध्ययन कर रही है। गूगल जैसी कंपनियों पर टैक्स लगाने के मुद्दे से कई देशों में टैक्स अथॉरिटीज जूझ रही हैं। इसे लेकर हाल ही में ब्रिटेन में भी एक विवाद हुआ था।
18.5 करोड़ डॉलर चुकाने की सहमति
गूगल ने ब्रिटेन की बजाय आयरलैंड की राजधानी डबलिन में अपनी ट्रांजैक्शन पूरी कर उस देश में टैक्स के तौर पर मामूली रकम चुकाई थी, जहां उसका रेवेन्यू 6.5 अरब डॉलर से अधिक था। हालांकि गूगल ने ब्रिटेन में पिछले टैक्स के तौर पर 18.5 करोड़ डॉलर चुकाने के लिए सहमति दी थी।
तेजी से बढ़ रहा है ऑनलाइन ऐडवर्टाइजिंग मार्केट
टैक्स एक्सपट्र्स का कहना है कि यह टैक्स धनी ओईसीडी देशों और जी20 के बीच को-ऑर्डिनेशन का नतीजा है। जी20 में भारत भी शामिल है। सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब ऑनलाइन ऐडवर्टाइजिंग मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।
Published on:
02 Mar 2016 12:47 pm
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