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बर्लिन। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लगार्ड ने कहा है कि अगले साल वैश्विक आर्थिक विकास निराश कर सकता है। जर्मन अखबार हैंडल्सब्लैट के मुताबिक लेगार्ड ने कहा, 'अमेरिका में ब्याज दरों में हुई बढ़ोतरी एवं चीन की आर्थिक सुस्ती वैश्विक विकास के लिए जोखिमपूर्ण है। विश्व व्यापार की रफ्तार लगातार धीमी बनी हुई है। कच्चे माल की कीमतों में गिरावट इस पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए समस्या खड़ी कर रहे हैं। वहीं, कई देशों के वित्तीय क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन के साथ ही उभरते बाजार वाले देशों के लिए वित्तीय जोखिम बढ़ रहा है। इन सब का अर्थ है कि वर्ष 2016 में वैश्विक विकास निराश करेगा।'
उन्होंने कहा कि निम्न उत्पादकता, बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और वैश्विक वित्तीय संकट के प्रभाव से दुनिया की आर्थिक विकास की गति को धीमी कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी मौद्रिक नीति का सामान्य होना एवं चीन का उपभोग आधारित विकास की ओर कदम बढ़ाना आवश्यक एवं स्वस्थ्य बदलाव हैं, लेकिन इसे जहां तक संभव हो कुशलतापूर्वक जारी रखने की जरूरत है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने करीब एक दशक में पहली बार ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है और आगे इसमें क्रमिक वृद्धि करने का संकेत दिया है।
लगार्ड ने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी उभरते बाजार वाली अर्थव्यवस्था एवं विकासशील देशों के सहित अन्य के लिए ऋण महंगा हो जाएगा। ऐसे में विकसित देश ब्याज दरों में वृद्धि के जोखिम से निपटने के लिए पहले की तरह पूर्ण रूप से तैयार हैं। लेकिन, ङ्क्षचताजनक स्थिति उन देशों के लिए है जो इस जोखिम को झेलने में सक्षम नहीं हैं। लेगार्ड ने चेतावनी दी है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी और डॉलर के महंगा होने से कई कंपनियां दिवालिया होने की कगार पर पहुंच सकती हैं। इससे देश और बैंक दोनों को नुकसान हो सकता है।
Published on:
30 Dec 2015 03:55 pm
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