9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

देश के नेता खा जाते हैं 74 करोड़ का खाना, बच्‍चों के खाने पर लगाते हैं जीएसटी, कुछ ऐसा है हमारा सिस्‍टम

बीते पांच सालों में सांसदों के सस्ते भेाजन पर 73,85,62,474 रुपए बतौर सब्सिडी दी गई।

2 min read
Google source verification
School Canteen GST

नई दिल्‍ली। भले ही देश के माननीय उपवासों के दौर से गुजर रहे हों, लेकिन उन्‍होंने अपनी नीतियों और आदेशों से आम जनता का हाजमा जरूर खराब कर दिया है। वित्‍त मंत्रायल के नए आदेश के अनुसार अब देश के सभी शिक्षण संस्‍थानों की कैंटीन जीएसटी का लगाई जाएगी। लेकिन क्‍या आपको इस बात की जानकारी है कि देश के सबसे बड़े संस्‍थान संसद भवन की कैंटीन में देश के नेता कितने रुपए का खाना खा जाते हैं। जानेंगे तो आपके भी हलक से निवाला नहीं निगला जाएगा।

74 करोड़ का भोजन डकार गए नेता
लोकसभा सचिवालय की सामान्य कार्य शाखा के उप-सचिव मनीष कुमार रेवारी की ओर से दिए गए आरटीआई के जवाब में कहा है कि बीते पांच सालों में सांसदों के सस्ते भेाजन पर 73,85,62,474 रुपए बतौर सब्सिडी दी गई। इससे साफ है कि माननीय सेवकों ने हर वर्ष सिर्फ कैंटीन में किए गए भोजन से सरकार पर औसतन 15 करोड़ का भार बढ़ाया है। सूचना के अधिकार के तहत दिए गए ब्यौरे के मुताबिक, वर्ष 2012-13 से वर्ष 2016-17 तक संसद कैटीनों को कुल 73,85,62,474 रुपये बतौर सब्सिडी दिए गए। अगर बीते पांच वर्षो की स्थिति पर गौर करें तो पता चलता है कि वर्ष 2012-13 में सांसदों के सस्ते भोजन पर 12,52,01867 रुपये, वर्ष 2013-14 में 14,09,69082 रुपये सब्सिडी के तौर पर दिए गए। इसी तरह वर्ष 2014-15 में 15,85,46612 रुपये, वर्ष 2015-16 में 15,97,91259 रुपये और वर्ष 2016-17 में सांसदों को सस्ता भोजन मुहैया कराने पर 15,40,53,3654 रुपये की सब्सिडी दी गई।

हर मार डेढ़ लाख वेतन पाते हैं देश के सांसद
सांसदों को लगभग डेढ़ लाख रुपए मासिक वेतन व भत्ते मिलते हैं। साथ ही बिजली, पानी, आवास, चिकित्सा, रेल और हवाई जहाज में यात्रा सुविधा मुफ्त मिलती है। इतना ही नहीं, एक बार निर्वाचित होने पर जीवनपर्यंत पेंशन का भी प्रावधान है। वहीं दूसरी ओर संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में करोड़पति सांसदों की कमी नहीं है, उसके बावजूद उन्हें संसद परिसर में स्थित चार कैंटीनों में सस्ता खाना दिया जाता है। वास्तविक कीमत और रियायती दर पर दिए जाने वाले खाने के अंतर की भरपाई लोकसभा सचिवालय यानी सरकार को करनी होती है। औसतन हर वर्ष कैंटीन से सांसदों को उपलब्ध कराए जाने वाले सस्ते भोजन के एवज में 15 करोड़ की सब्सिडी के तौर पर भरपाई करनी होती है।

बच्‍चों के लंच बॉक्‍स पर बढ़ाया बोझ
वहीं दूसरी ओर से वित्‍त मंत्रालय ने देश के बच्‍चों के भोजन पर 5 फीसदी का जीएसटी लगा दिया है। अब देश के सभी शिक्षण संस्‍थानों की कैंटीन में 5 फीसदी जीएसटी लगाई है। जिसका भार देश की जनता पर पड़ना तय है। ताज्‍जुब की बात तो ये है कि सरकार अपनी इस पहल को एक बेहतर कदम बता रही है। सरकार का कहना है कि कैंटीन्‍स के फूड्स और ड्रिंक्‍स पर जीएसटी अच्‍छी पहल है। इन्‍हें 5 फीसदी के टैक्‍स स्‍लैब में रखा गया है। फाइनेंस मिनिस्‍ट्री की ओर से कहा गया, शैक्षिक संस्थानों के कैंटीन्‍स में फूड्स और ड्रिंक्‍स से जीएसटी रेट को हटाने का कोई विचार नहीं है। इन कैंटीन्‍स में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के बिना 5 फीसदी का जीएसटी अच्‍छी पहल है।