
नर्इ दिल्ली। 4 मर्इ को जीएसटी काउंसिल की 27 बैठक दिल्ली में होने वाली है। इस बैठक में सभी राज्यों के वित्त मंत्री हिस्सा लेंगें। वित्त मंत्री अरुण जेटली इस बैठक की अध्यक्षता करेंगें। हालांकि, बीमार होने के कारण जेटली वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक में डिजिटल लेनदेन पर छूट के अलावा यह प्रस्ताव भी रखे जाएंगे।
पेट्राेल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है
जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में पेट्रोल-डीजल को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। लंबे समय से पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की बात हो रही है। एेसे में संभावना है कि जीएसटी काउंसिल अपने इस बैठक में पेट्रोल-डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर एक बड़ा फैसला कर सकती है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान एक लंबे समय से इसकी मांग कर रहे हैं। सरकार भी आने वाले कर्इ राज्यों के चुनाव को देखते हुए किसी प्रकार का कोर्इ भी जोखिम नहीं उठाना चाहती है। खास बात ये है यदि जीएसटी काउंसिल पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाती है तो इनके दामों में कटौती देखने को मिल सकता है। माैजूदा समय में अभी इनपर कर्इ तरह के टैक्स वसूला जाता है।
चीनी पर लग सकता है सेस
इस बैठक में चीनी पर लगने वाले सेस को लेकर भी फैसला लिया जा सकता है। अभी गन्ना किसानों का करीब 19780 करोड़ रुपए का बकाया है। एेसे में सरकार इन पैसों को चुकाने के लिए चीनी पर सेस लगा सकती है। अनुमान है कि चीनी पर सेस लगाकर सरकार एक फंड बनाए जिससे गन्ना किसानों को पैसा चुकाया जाए। खबरों के मुताबिक सरकार 1 से 1.5 रुपए प्रति किलो का सेस लगा सकती है। चीनी पर सेस लगने से इस बढ़ोतरी का वहन आम लोगों को चुकाना पड़ सकता है।
सरल हाे सकता है जीएसटी रिटर्न भरना
जीएसटी रिटर्न को सरल बनाने के लिए सरकार कुछ अहम फैसले ले सकती है। ये सरकार के एजेंडे में टाॅप पर है आैर इस बैठक में इसपर चर्चा किया जा सकता है। मार्च में ही जीएसटी रिटर्न को दो फाॅर्म पर चर्चा किया गया था आैर इसे सरल बनाने के लिए मंत्रियों के समूह का भी गठन किया गया था। इस समूह ने एक माॅडल दिया है जिसमें टैक्सपेयर को रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं होगी। आइटी सिस्टम सप्लार्इ डेटा आैर इनवर्ड सप्लार्इ के जरिए आॅटोमेटिक रिटर्न जनरेट करेगा। इसमें जो लोग डिफाॅल्ट करेंगे उनकी एक लिस्ट भी शामिल किया जाएगा।
जीएसटीएन बन सकती है सरकारी कंपनी
जीएसटी काउंसिल के इस बैठक में जीएसटीएन को सरकारी कंपनी भी बनाया जा सकता है। जीएसटी से जुड़े सभी अार्इटी नेटवर्क का काम जीएसटीएन ही संभालती है। अभी इसमें देश के कर्इ बड़े आैर वित्तीय संस्थानों की 51 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा एटीएम, चेकबुक और डेबिट-क्रेडिट कार्ड जैसी बैंकिंग सेवाओं को जीएसटी के दायरे में लाने का प्रस्ताव।
डिजिटल ट्रांजैक्शन पर मिल सकता है छूट
100 रुपए तक मिलेगा डिस्काउंट सूत्रों के अनुसार डिजिटल ट्रांसजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए इस प्रस्ताव को राजस्व विभाग ने तैयार किया है। इस प्रस्ताव के अनुसार डिजिटल भुगतान करने वालों को एमआरपी पर डिस्काउंट दिया जाएगा। यह डिस्काउंट अधिकतम 100 रुपए होगा। सूत्रों के अनुसार डिजिटल होने पर उद्योगों को प्रोत्साहन के लिए कैशबैक दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि पीएमओ में हुई बैठक में डिजिटल ट्रांजेक्शन को प्रोत्साहित करने के लिए दिए जाने वाले इंसेटिव्स के तरीकों पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार राजस्व विभाग कैशबैक के विकल्प पर राजी हो गया है। एेसे में पूरी संभावना जताई जा रही है कि 4 मई को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में यह प्रस्ताव रखा जा सकता है।
Published on:
02 May 2018 03:02 pm

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