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World Bank: ऑटोमेशन से 69% नौकरी पर खतरा, ILO ने भी भारत में घटती नौकरियों पर जताई चिंता

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर में बेरोजगारी की दर बढ़कर 7.7 फीसदी तक पहुंच गई है।

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Job Crisis In India

नई दिल्ली। इकोनॉमिक स्लोडाउन से भारत समेत पूरी दुनिया में दुविधा का माहौल बना हुआ है। हालांकि सरकार साफ तौर पर ये मानने को तैयार नही है कि भारत आर्थिक मंदी की चपेट में है, लेकिन इससे इनकार भी नही किया जा सकता। सरकार का मानना है कि तेजी से बदलते डिजिटल इंडिया में सबकुछ सही राह पर चल रहा है। लेकिन आज से दो साल पहले ही विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ऑटोमेशन तकनीक के आने से भारत में करीब 69 फीसदी नौकरियों को खतरा है। वही चीन की बात करें तो यहां ये आंकड़ा 77 फीसदी पर है, तो क्या वाकई ऑटोमेशन तकनीक लोगों के रोजगार और देश के आर्थिक विकास के लिए खतरे का संकेत हैं । आज यह बात इसलिए भी अहम है कि मौजूदा दौर में खुद सरकारी आकड़ों में कई बार ये बात सामने आई है कि देश में रोजगार के मौके कम हुए है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर में बेरोजगारी की दर बढ़कर 7.7 फीसदी तक पहुंच गई है। इसे जानने के लिए पत्रिका ने विश्व बैंक की उस रिपोर्ट पर रिसर्च किया जिसमे कई चीजें निकल कर सामने आईं।

Automation से नौकरियों पर खतरा

भारत में बेरोजगारी की दर पर अतंराष्ट्रीय संगठनों ने तो चिंता जताई ही है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने रोजगार की समस्या से जूझ रहे नौकरियों पर खतरे के लिए ऑटोमेशन को जिम्मेदार बताया है। ILO की हालिया रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक भारत में बेरोजगारी बीते 45 वर्षों के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। अब अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ( ILO ) का कहना है कि देश में हाथ से की जाने वाली 51.8 फीसदी गतिविधियों को मशीनों की सहायता से संचालित किया जा सकता है। नौकरियों के क्षेत्र में ऑटोमेशन का खतरा लगातार गंभीर होता जा रहा है। आईएलओ की रिपोर्ट में इस खतरे के प्रति आगाह करते हुए ऐसे कामों का जिक्र किया गया है जिनमें मौजूदा तकनीक के सहारे ऑटोमेशन से किया जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के मामले में 51.8 फीसदी गतिविधियों को ऑटोमेशन के सहारे किया जा सकता है।

McKinsey की रिपोर्ट ने भी किया आगाह

मैकेन्जी की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में गिरते रोजगार की अवसरों की वजह से 58 फीसदी वर्किंग फ्रोफेशनल्स को अपनी अजिविका बचाने के लिए नए स्कील सीखने पड़ेंगे।

तकनीक से विकास

पहले बात करते हैं कि तकनीक से दुनिया की दिग्गज कंपनियों का कितना विकास हुआ है। वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कैसे विकासशील देशों के लिए तकनीक ने सबसे अहम रोल अदा किया है। यूरोपियन मल्टीनेशनल कंपनी IKEA ने साल 1973 में अपना पहला स्टोर खोला था तो वही दुनिया सबसे बड़ी रिटेल कंपनी Walmart 1991 में ग्लोबल हुआ। और यह तकनीक का ही कमाल था कि 2017 तक Walmart के 28 देशों में करीब 11,718 स्टोर्स खुल चुके थे।

तकनीक से खतरा

विश्व बैंक की रिपोर्ट में देखा गया कि तकनीक के कारण इन कंपनियों ने कैसे पूरी दुनिया में अपनी दबदबा कायम किया है। लेकिन वहीं खतरे की बात करें तो खुद वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष जिम किम ने कहा कि "जैसे-जैसे हम ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रहे हैं, वैसे ही हमें भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए भी इन्फ्रास्ट्रक्चर के बारे में सोचना होगा। किम के बयान से यह साफ होता है कि ग्रोथ के साथ-साथ हमे भविष्य में इसको खपाया कैसे जाए यह सोचने की जरुरत ज्यादा है। क्योंकि केवल चीन और भारत ही नही बल्कि दुनिया के कई देशों में ऑटोमेशन से लोगों की नौकरी पर खतरा है। विकासशील देश इथोपिया की बात करें तो यह आकंड़ा 85 फीसदी पर है।

तकनीक के बाद के प्रभाव

तकनीक से जिंदगी में बदलाव तो आता है ये बात तो हम सबको पता है कि लेकिन क्या आपको पता है कि तकनीक ने कंपनियों की पॉलिसी और उनके बिजनेस मॉडल तक को कैसे प्रभावित किया है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में दिखाया गया है कि जैसे जैसे कंपनियो ने नई तकनीक को अपनाया है उनके यहां काम करने वालो के स्किल उनका बिजनेस मॉडल तक प्रभावित हुआ है। उदाहरण के तौर पर जब IKEA ने अपना पहला स्टोर खोला था, तो वो केवल फर्नीचर सेलिंग के लिए जानी जाती थी, लेकिन तकनीक के बदलते प्रभाव ने इस कंपनी की पूरी रुपरेखा बदल डाली।

आर्थिक प्रगति को बाधित करता तकनीक

वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट में जो सबसे चौकाने वाली बात है वो यह है कि तकनीक मौलिक रूप से विकासशील देशों की आर्थिक प्रगति को बाधित कर सकता है। वर्ल्ड बैंक के अलावा कुछ दूसरी रिपोर्ट्स में भी पाया गया है कि दुनिया भर में नई तकनीक कई पेशों को खत्म कर रही है। ऐसे में भारत जैसे देश के लिए यह और सोचने वाली बात है क्योंकि यहां की आधी आबादी युवा है।

भारत में रोजगार की मौजूदा स्थिति

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर में बेरोजगारी की दर बढ़कर 7.7 फीसदी तक पहुंच गई है। जबकि नवंबर 2019 में देश में बेरोजगारी की दर 7.48 फीसदी थी। आपको बता दें इसके पहले अक्टूबर 2019 में देश की बेरोजगारी दर 8.45 फीसदी के तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हम सही मायने मे बदलती तकनीक का फायदा उठा पा रहे हैं या हमे इस पर सोचने की जरुरत है।