
पाकिस्तान ने CPEC के लिए चीन से मिले 2400 करोड़ रुपए का किया हेरफेर, पाक मीडिया ने सरकार पर लगाए चोरी के आरोप
नई दिल्ली। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटीव ( BRI ) से ठीक पहले चीन-पाकिस्तान को लेकर एक बार फिर विवाद उठ चुका है। पाकिस्तान ? पर अब कथित तौर पर आरोप लगा है कि उसने बीआरआई के अंतर्गत आने वाले चीन के साथ ज्वाइंट इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के 171.6 मिलियन डॉलर (करीब 2,400 करोड़ रुपए ) का इस्तेमाल अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए कर रहा है।
पाकिस्तानी मंत्री ने रकम को दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए इस्तेमाल करने के लिए दिए आदेश
CPEC इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए चीन ने 62 अरब डॉलर के करार के तहत यह रकम पाकिस्तान को दिया था। हालांकि, पाकिस्तान के प्लानिंग एंड डेवलपमेंट मंत्रालय ने एक आदेश दिया था कि यूनाइटेड नेशन्स सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स प्रोग्राम के लिए इस 2,400 करोड़ रुपए की इस रकम का इस्तेमाल किया जाए। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान का यह कदम प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ( PTI ) द्वारा डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए दिया गया है। पाकिस्तानी लोकल मीडिया के मुताबिक, "बीआरआई के लिए स्थानान्तरित 2,700 करोड़ रुपए में से 2,400 करोड़ रुपए का इस्तेमाल सरकार ने अपन अन्य डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में खर्च करने के लिए चुराया है।"
पाक कैबिनेट मंत्री ने सीपीईसी प्रोजेक्ट को टालने की कही थी बात
हाल के दिनों में ही चीन और पाकिस्तान की इमरान खान के बीच सीपीईसी को लेकर कई तरह के मतभेद सामने आएं हैं। पाक सरकार के कैबिनेट मंत्री रजाक दावुद ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि सीपीईसी प्रोजेक्ट एक साल के लिए टाल दिया जाना चाहिए। रजाक दावुद ने कहा था कि इससे पाकिस्तान को कुछ खास फायदा नहीं होने वाला है। वहीं, सिंध बिजनेस लॉबी का मानना है कि केवल सीपीईसी से केवल पंजाब बिजनेस को ही फायदा होने वाला है।
चीन ने सीपीईसी के पास बढ़ाई सैनिकों की संख्या
अभी कुछ समय पहले ही स्पुतनिक नाम की रूसी वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सीपीईसी की सुरक्षा के लिए चीन ने भारत बॉर्डर पर सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है। सीपीईसी पर सैनिकों की संख्या बढ़ाने की एक वजह यह भी था कि चीन यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल ( unsc ) में चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने से बचा लिया था। चीन को सीपीईसी प आतंकी हमला होने का खतरा है। बता दें कि सीपीईसी के माध्यम से ही चीन हिंद महासागर क्षेत्र को पश्चिमि एशिया व अफ्रीका से ट्रांसपोर्टेशन के लिए इस्तेमाल करना चाहता है।
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Published on:
01 Apr 2019 03:00 pm
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