
नई दिल्ली। बीते कई सालों से हम किसानों की दयनीय स्थिति के बारे में पढ़, सुन और देख रहे हैं। कभी पानी की कमी वजह से उनके खेत सूख जाते हैं, तो कभी पानी इतना हो जाता है कि खेत के खेत बह जाते हैं। आज हम बात झांसी के उन गांवों की करेंगे जहां पानी की कमी वजह से 50 फीसदी से ज्यादा जमीन बंजर ही रहती थी। ना वो ठीक से कमा पाते थे और ना ही अपनी और अपने बच्चों की जिंदगी को ठीक से संवार पा रहे थे, एक छोटे से प्रयास ने झांसी के करीब आधा दर्जन किसानों की जिंदगी को बदलकर रख दिया। उनकी आय में आज दोगुना इजाफा हुआ है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर कौन से प्रयास हुए जिसकी वजह से उन गांवों किसानों की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई।
8 चैकडैम ने बदल दी पूरी जिंदगी
2013 में झांसी के पराछई, छतपुर और बिछौनी गांवों में पानी की कमी को देखते हुए कोका कोला इंडिया फाउंडेशन ने इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी एरिड ट्रॉपिक्स (आइसीआरआइएसएटी), नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एग्रो फॉरेस्ट्री (एसआरसीएएफ) और हरितिका संस्था के साथ मिलकर 8 चैकडैम का निर्माण किया। इन चेकडैम की वजह से बरसात का पानी उनमें जमा होने लगा। जिसके बाद मोटर के थ्रू वहां के तालाबों और कुओं तक उस पानी को पहुंचाया जाने लगा। आज करीब आसपास के गांवों के 150 से ज्यादा कुंओं को पानी यहीं से पहुंचाया जा रहा है। वहीं ग्राउंड वॉटर लेवल में भी काफी अंतर देखने को मिला। करीब तीन साल यानी 2016 तक इन चैकडैम पर काम किया। जिसके बाद उन चैकडैम को गांवों को सौंप दिया गया। इन चैकडैम से इन तीन गांवों के अलावा आसपास के तीन गांवों और लाभ हुआ।
खरीफ के साथ अब रबि की फसल भी होने लगी
हरितिका संस्था के फाउंडर अवनी मोहन सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि पराछई, छतपुर और बछौनी की ही बात करें तो तीनों गांवों में 1246 एकड़ पर फसल होती है। करीब चार पांच साल पहले हालात पूरी तरह से विपरीत थे। पानी ना होने के कारण जमीन बंजर रहती थी। करीब 50 फीसदी पर ही फसल होती थी। रबि का मौसम आने के बाद तो पानी बचता ही नहीं था। तो रबि की फसलें ना के बराबर होती थी। चैकडैम बनने के बाद काफी सुधार देखने को मिला है। खरीफ की फसलें जैसे मूंगफली, ज्वार, उड़द, सोयाबीन के अलावा यहां के किसान अब रबी की फसलें जैसे गेहूं, चना, मसूर और सरसो भी उंगाने लगे हैं। उन्होंने कहा कि खरीफ के समय में यहां पर 60 फीसदी फसल मूंगफली और रबी के मौसम में 65 फीसदी पर गेहूं उगाया जाता है।
आय हो गई दोगुनी
पराछाई गांव के किसान कोमल यादव बताते हैं कि उनके पास 16 एकड़ जमीन है। 2013 में पानी की कमी की वजह से 7 एकड़ पर ही फसल उगा पाते थे। जिससे 90 क्विंटल अनाज हो पाता था। 2016 के बाद से पानी की उपलब्धता बढ़ी है। इन चैकडैम से उन्हें काफी फायदा हुआ है। 2016 के बाद से अब वो पूरे 16 एकड़ पर पूरे साल खेती करते हैं और 200 क्विंटल अनाज पैदा करते हैं। जिससे उनकी आय में दो से तीन गुना का इजाफा हुआ है। किसाल मोहन सिंह बताते हैं कि उनके पास 8 एकड़ी जमीन है। पहले वो सिर्फ 40 फीसदी ही जमीन पर खेती कर पाते थे। अब वो पूरी जमीन पर खेती कर रहे हैं। जिससे उनकी आय में 100 फीसदी का इजाफा हुआ है। ऐसा ही कुछ किसाल छक्कीलाल का भी कहना है कि पानी की उपलब्धता होने से उनकी आय में इजाफा हुआ है। अब अपने बच्चों को ठीक से खिला भी पा रहे हैं और पढ़ा भी पा रहे हैं।
गांवों के लोगों की जिंदगी में हुआ सुधार
कोका कोला इंडिया फाउंडेशन के प्रोजेक्ट मैनेजर राजीव गुप्ता के अनुसार, जब हमने यहां आकर देखा तो खेतों में पानी की काफी समस्या थी। किसान पानी के लिए तरस रहे थे। बारिश के पानी को रोकने की कोई व्यस्था नहीं थी। जिसके बाद उनकी टीम ने सुनियोजित तरीके ऐसे चैकडैम तैयार करने के बारे में सोचा जिससे पानी की समस्या कभी भी ना रहे। बारिश के मौसम में डैम के थ्रू पानी रुके और किसानों को उसका फायदा मिले। आज किसानों की जिंदगी में काफी बदलाव देखने को मिला है।
Published on:
18 Aug 2019 08:41 pm
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