
नई दिल्ली. स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल शुरू किए गए महत्वाकांक्षी ‘स्टार्टअप इंडिया इनिशिएटिव’ केंद्र की कई दूसरी योजनाओं की तरह विफल साबित हो रहा है। ये इनिशिएटिव ४ साल तक हर साल स्टार्टअप्स को 2500 करोड़ रु. की पूंजी मुहैया कराने के लिए शुरू हुआ था, जबकि दो साल बीत जाने के बाद भी इसके जरिए 75 स्टार्टअप्स को कुल 337 करोड़ की पूंजी ही मिली है।
फंड ऑफ फंड्स का चुना था रास्ता
स्टार्टअप इंडिया इनिशिएटिव के तहत सरकार ने सीधे स्टार्टअप्स को पूंजी देने की बजाए फंड ऑफ फंड्स का रास्ता चुना था। इसमें सरकार को सिडबी के जरिए बाजार नियामक सेबी के तहत रजिस्टर्ड वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) को पैसे देने थे और एआईएफ को योग्य स्टार्टअप्स को चुन कर उसमें पैसे लगाने थे।
5350 स्टार्टअप्स को मान्यता
राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, सिडबी ने 2015-16 में 500 करोड़ और 2016-17 में 100 करोड़ रु. 17 एआईएफ को जारी किए। इसमें से भी एआईएफ ने 337 करोड़ का इस्तेमाल ही 75 स्टार्टअप्स को पैसे देने में किया। अब तक 5350 स्टार्टअप्स को देश में मान्यता दी जा चुकी है, जिसमें 40 हजार से अधिक कर्मी हैं।
स्टार्टअप इंडिया को 16 जनवरी 2016 को मोदी सरकार द्वारा शुरु किया गया था। ये अभियान देश के युवाओं के लिये नये अवसर प्रदान करने के लिये बनाया गया है। पी.एम. मोदी ने 15 अगस्त 2015, को नई दिल्ली, लाल किले से राष्ट्र को सम्बोधित करते हुये इस अभियान के बारे में बात की थी। ये पहल युवा उद्यमियों को उद्यमशीलता में शामिल करके बहुत बेहतर भविष्य के लिये प्रोत्साहित करेगी। कार्यक्रम के अनुसार, लगभग 125 लाख बैंकों की शाखाएँ युवाओं (कम से कम एक दलित या आदिवासी और एक महिला उद्यमी) को ऋण प्रदान करके प्रोत्साहित करेंगी।
Published on:
27 Dec 2017 11:46 am
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