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आधार कार्ड बिना नहीं मिलेगी किसान सम्मान निधि की दूसरी किस्त, पहली के लिए चल जाएगा दूसरी आर्इडी से काम

किसानों की कर्जमाफी में एक ओर जहां आधार कार्ड न होने की बाधा किसानों के सामने आ रही है, वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) में भी आगे ऐसी ही दिक्कत आ सकती है।

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Saurabh Sharma

Feb 06, 2019

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आधार कार्ड बिना नहीं मिलेगी किसान सम्मान निधि की दूसरी किस्त, पहली के लिए चल जाएगा दूसरी आर्इडी से काम

नई दिल्ली। किसानों की कर्जमाफी में एक ओर जहां आधार कार्ड न होने की बाधा किसानों के सामने आ रही है, वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) में भी आगे ऐसी ही दिक्कत आ सकती है। योजना के तहत पहली किस्त पाने के लिए तो आधार को अनिवार्य नहीं किया गया है, पर आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक दूसरी किस्त के लिए आधार कार्ड होना जरूरी है। योजना को इसी साल लागू कर दिया गया है और इसकी पहली किश्त किसानों को इसी महीने में मिलेगी।


दूसरे पहचान पत्र भी मान्य
केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि किसानों को दी जाने वाली पहली किस्त में सत्यापन के लिए किसान के पास आधार कार्ड होना ही अनिवार्य नहीं है। आधार न होने की स्थिति में किसान सरकार द्वारा प्रदान किए गए दूसरे पहचान पत्र (मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, मनरेगा कार्ड) से भी सत्यापन करा सकेंगे। हालांकि दूसरी किस्त लेने के लिए किसान के पास आधार कार्ड का होना जरूरी होगा।

राज्य सरकार तैयार करें डाटाबेस
कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों से कहा है कि गावों में लाभार्थी किसानों का एक डेटाबेस तैयार करें। डेटाबेस की जानकारियों में किसानों के नाम, लिंग, एससी-एसटी, बैंक खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर शामिल हैं। सरकार ने लाभार्थी परिवार को जिस आधार पर परिभाषित किया है उसमें पति, पत्नी, 18 साल तक के बच्चे सहित वह परिवार हैं जिनके पास राज्य के भू-रेकार्ड के अनुसार दो हेक्टेयर तक खेती योग्य जमीन है। पीएम-किसान योजना की कट ऑफ तारीख 1 फरवरी 2019 है, योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिनका नाम सरकारी रेकार्ड में एक फरवरी 2019 से पहले दर्ज होगा। अब अगर किसी का नाम इसमें शामिल भी होता है तो अगले पांच साल तक उसे इसका फायदा नहीं मिल सकेगा। 1 फरवरी के बाद जमीन खरीदने वाले किसानों को भी लाभ नहीं मिलेगा।

सरकार के लिए चुनौती
योजना को लागू करने में बैंकों की भूमिका सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। महाराष्ट्र में किसानों की कर्जमाफी हो चाहे ओडिशा में कालिया योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में पहली किस्त के हस्तांतरण के बाद ऐसी खबरें थीं कि बैंक शाखाओं ने किसानों की पिछले बकाया में जमा धन को समायोजित कर दिया था।