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Carpenter In Civil Service कारपेंटर के पास है कलक्टर बनने का मौका, बी. वोक. को मिली मान्यता

Carpenter In Civil Service अब देश में व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास को नई पहचान और प्रतिष्ठा मिल रही है। अब आप वोकेशनल कोर्स करके...

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Deovrat Singh

Apr 22, 2018

Carpenter In Civil Service

Carpenter In Civil Service

Carpenter In Civil Serviceअब देश में व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास को नई पहचान और प्रतिष्ठा मिल रही है। अब आप वोकेशनल कोर्स करके भी शानदार कॅरियर बना सकते हैं। इससे आपको रोजगार पाने के साथ-साथ उद्यमी बनने का मौका भी मिल सकता है। जानते हैं इसके बारे में-

क्या हम कभी यह कल्पना भी कर सकते थे कि एक कारपेंटर (खाती, सुथार) क्षेत्र का प्रशिक्षित हुनरमंद एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थी या कारीगर कलक्टर या अन्य उच्च पद पर कार्य करने वाला अधिकारी भी बन सकता है? अब तक परंपरा और धारण यही थी कि होशियार विद्यार्थी तो महाविद्यालयों में जाकर उच्च शिक्षा की डिग्री लेकर संघ लोक सेवा आयोग/ राज्य लोक सेवा आयोगों की परीक्षा देकर उच्च अधिकारी बनेंगे या वैज्ञानिक/इंजीनियर/ डॉक्टर आदि बनेंगे। जो कमजोर विद्यार्थी हैं वे आईटीआई जैसे संस्थानों में शिक्षा लेकर कामगार बनेंगे तथा वे कामगार बन गए तो ताउम्र कामगार ही बने रहेंगे। पर अब धीरे-धीरे परिदृश्य बदल रहा है तथा अब हमारे युवाओं को कौशल शिक्षा (स्किल/ वोकेशनल एजुकेशन) में स्नातक डिग्री बी.वोक. करने के बाद भी अन्य समकक्ष स्नातक डिग्रीधारियों (बीए, बीएससी, बीकॉम) की तरह संघ लोक सेवा आयोग/राज्य लोक सवा आयोगों एवं अन्य संस्थानों के माध्यम से राजकीय सेवाओं में अवसर मिल सकता है।


बी. वोक. को मान्यता B.Voc Candidates eligible In Civil Service
देश में उच्च शिक्षा को नियंत्रित करने वाली केंद्रीय संस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपने आदेश क्रमांक एफ.नंबर 5-1/2012 (सीपीपी-2) दिनांक 14 दिसंबर 2012 द्वारा बी. वोक. की डिग्री को अन्य स्नातक उपाधियों (बीए, बीएससी, बीकॉम) के समकक्ष मानते हुए इसे आधिकारिक तौर पर विज्ञापित कर दिया है। व्यावसायिक एवं कौशल शिक्षा को औपचारिक विद्यालयी शिक्षा से जोडऩे के लिए पिछले अनुभवों से हमने अपना सबक सीख लिया है तथा अब व्यावसायिक शिक्षा (वोकेशनल/स्किल) को भारत सरकार एक राष्ट्रीय मिशन स्किल इंडिया (कौशल भारत- कुशल भारत) के रूप में प्रभावी रूप से लागू कर रही है। कौशल विकास के क्षेत्र में हमारा राजस्थान पूरे देश में अग्रणीय रहा है।

व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास के माध्यम से हर युवा को कॅरियर में सफलता पाने के मौके मिल सकते हैं।

1849 आईटीआई हैं राजस्थान में। इनमें से 150 सरकारी व 1699 निजी क्षेत्र में हैं।

स्किल यूनिवर्सिटी की स्थापना से होगा फायदा Skill University
निजी क्षेत्र में स्थापित भारतीय कौशल विकास विश्वविद्यालय महेन्द्रा वल्र्ड सिटी में है। इस विश्वविद्यालय में नवीनतम मशीनों/उपकरणों के माध्यम से उच्च प्रशिक्षित भारतीय एवं स्विस प्रशिक्षकों द्वारा स्विस-ड्यूल सिस्टम ऑफ टे्रनिंग की अवधारणा के अनुरूप विद्यार्थियों को कौशल विकास सिखाया/ पढ़ाया जा रहा है। राजकीय क्षेत्र में स्थापित राजस्थान आईएलडी कौशल विश्वविद्यालय जयपुर के आगरा रोड पर जामडोली गांव में भारत सरकार द्वारा स्थापित संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ लीडरशिप डवलपमेंट के परिसर में संचालित हो रहा है। राजस्थान कौशल विश्वविद्यालय वर्ष 2018 के जुलाई माह से आरंभ होने वाले नए शैक्षिक सत्र से विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त 20 कौशल विकास संस्थानों/ महाविद्यालयों के माध्यम से पूरे राज्य में युवाओं को कौशल विकास के 45 से भी अधिक कोर्सेज द्वारा शिक्षित/प्रशिक्षित किया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है। इन मान्यता प्राप्त संस्थानों की सूची, प्रवेश प्रक्रिया व विषयों का विवरण कौशल विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर मौजूद रहेगा।

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कौशल मित्र/वरिष्ठ कौशल मित्र
राजस्थान के विद्यालयों के विद्यार्थियों को विद्यालय के ही एक प्रशिक्षित शिक्षक (कौशल मित्र) द्वारा उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। कौशल मित्रों को राजस्थान कौशल विश्वविद्यालय द्वारा विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। प्रदेश के महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए महाविद्यालय में पद स्थापित कर एक व्याख्याता को 'वरिष्ठ कौशल मित्र' के रूप में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे युवा हुनरमंद बन सकेंगे।


धर्मा-कर्मा की अवधारणा
धर्मा कर्मा की प्रस्तावित अवधारणा यह है कि हमारे धार्मिक स्थल और परिसरों के अधीन सराय, धर्मशालाएं, न्याती नोहरे और अन्य उपयुक्त परिसरों में कौशल विकास केंद्रों की स्थापना की जाए।इनका उपयोग सर्वसम्मति से सबकी सुविधानुसार उसी समाज के युवाओं को प्रशिक्षित करने में किया जा सके। इसके लिए वहां छोटे-छोटे कौशल विकास केंद्र/मिनी आईटीआई खोलने का प्रयास किया जाए, ताकि युवाओं को इनका फायदा मिले।

अकेडमिक इंडस्ट्री मैट्रिक्स का गठन
राजस्थान राज्य कौशल विश्वविद्यालय एक स्थाई समिति अकेडमिक इंडस्ट्री मैट्रिक्स का गठन करने जा रहा है जिसमें राज्य के अग्रणीय एवं प्रतिष्ठित उद्यमियों तथा व्यावसायिक एवं कौशल शिक्षा के अनुभवी प्रोफेसर तथा विद्वानों को शामिल किया जाएगा ताकि दोनों के समन्वय एवं सुझावों के आदान प्रदान से विद्यार्थियों को विशिष्ट क्षेत्रों/व्यवसायों/स्किल्स में प्रशिक्षित किया जाए।