scriptहर साल महंगा होता जा रहा बच्चे का स्कूल में पहला कदम, लूट रहे अभिभावक | Patrika News
शिक्षा

हर साल महंगा होता जा रहा बच्चे का स्कूल में पहला कदम, लूट रहे अभिभावक

प्राइवेट स्कूलों में बच्चे का पहला कदम अभिभावकों को काफी महंगा पड़ रहा है। नर्सरी, केजी वन में पढ़ाने में ही अभिभावकों के जेब ढीली हो जा रही है। क्योंकि महंगी फीस के अलावा महंगी कापी-किताबें और यूनिफार्म की कीमतों का बोझ असहनीय लग रहा है। इसके अलावा रही-सही कसर स्कूल वाहनों का किराया पूरी कर दे रहा है।

जांजगीर चंपाJul 03, 2024 / 10:13 pm

Sanjay Prasad Rathore

janjgir

oppo_2

अधिकतर निजी स्कूलों में हर साल फीस बढ़ा दी जाती है। नियमानुसार एकमुश्त 8 फीसदी से ज्यादा फीस नहीं बढ़ाई जा सकती लेकिन कई स्कूल प्रबंधन 10 से 15 फीसदी तक फीस बढ़ा देते हैं। कक्षा तीसरी की कुल किताबें ही 1500 रुपए तक मिल रही है तो कॉपी 600 में दी जा रही है। यानी कॉपी से 3 गुना महंगी बुक है। वहीं कक्षा 8वीं की बुक लगभग 2400 की बेची जा रही है और कॉपी के लिए 1400 परिजन को खर्च करना पड़ रहा है। कक्षा 9वीं से एनसीआरटी की बुक पढ़ाई जाने लगी है, जिसकी कीमत सिर्फ 920 है। बुक से महंगी कॉपी 1660 दुकानदारों के द्वारा बेची जा रही। यानीअभिभावक कॉपी व बुक खरीदें तो उन्हें कम से कम 3 से साढ़े 3 हजार खर्च करने पड़ रहे हैं। स्कूल अपने हिसाब से निजी पब्लिश की पुस्तकें चलाते हैं। बुक की कीमतें कई गुना अधिक महंगी रहती है लेकिन कीमत निर्धारण को लेकर किसी तरह कोई गाइडलाइन नहीं है। पब्लिकेशन जैसा चाहते हैं वैसा कीमत रख रहे हैं। बच्चों के भविष्य को देखते हुए अभिभावक खुद लूटने मजबूर हो रहे हैं।

अभिभावक बोले- आर्थिक बोझ बढ़ गया

किताब खरीदने पहुंचे शहर के आशु पांडे ने कहा कि बच्ची की कक्षा क्लास थ्री की किताबें 1450 रुपए में मिली। कॉपियों के दाम भी अधिक बढ़ चुके हैं। कापी भी करीब 500 रुपए में आई। लेकिन इस बढ़ते दाम पर किसी का कंट्रोल नहीं दिख रहा है। इससे सिर्फ हम जैसे लोगों पर आर्थिक बोझ अधिक पड़ रहा है। इसी तरह संदीप कुमार ने उनकी बच्ची एलकेजी है। इतनी छोटी कक्षा में किताबें और कापी मिलाकर 2100 रुपए देने पड़े। इसके अलावा डे्रस, जूते-मोजे का खर्च अलग से लगेगा।

25 में मिलने वाले रजिस्टर अब 35 रुपए में

कागज के रेट बढऩे का असर इस बार दामों पर नजर आ रहा है। 500 पेज की ए-4 साइज पेपर की रिम पहले 150-160 रुपए में बेची जा रही थी। उसके रेट बढ़कर इस बार 250-260 तक पहुंच चुके हैं। इसका असर कॉपी और रजिस्टरों पर भी है। 25 रुपए में मिलने वाले रजिस्टर अब 35 रुपए तक बेचे जा रहे हैं। 20 रुपए की कॉपी 25-30 रुपए तक दी जा रही है। स्टेशनरी रेट का इजाफा अन्य शिक्षण सामग्री को भी प्रभावित कर रहा है। दुकानदारों का कहना है कि ऊपर से ही दर बढ़ रहा है तो हम क्या कर सकते हैं।
अभिभावकों को किसी तय दुकानों से कापी-किताबें खरीदने दबाव नहीं बना सकते। फीस का निर्धारण तय गाइडलाइन के अनुसार करना है। अभिभावक इसकी शिकायत कर सकते हैं, कार्रवाई करेंगे।
अश्वनी भारद्वाज, डीईओ जांजगीर-चांपा

Hindi News/ Education News / हर साल महंगा होता जा रहा बच्चे का स्कूल में पहला कदम, लूट रहे अभिभावक

ट्रेंडिंग वीडियो