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निजी स्कूलों की मनमानी बना फीस एक्ट में लचीलापन, किताबें-कॉपियां व अन्य खर्च नहीं किए शामिल

NCERT Books 2018-19 जो किताब सिर्फ रूपए 50 की, उसी के वसूल रहे रूपए 500

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Deovrat Singh

Mar 28, 2018

education News

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NCERT Books 2018-19 जो किताब सिर्फ रूपए 50 की, उसी के वसूल रहे रूपए 500

स्कूलों में शिक्षा के नाम पर कारोबार ही नहीं हो रहा बल्कि बेधड़क लूट मची है। मनमानी फीस वसूलने के साथ किताबों, ड्रेस, स्टेशनरी के नाम पर भी अभिभावकों की जेब से पैसे ऐंठे जा रहे हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की जो किताबें 25 से 200 रुपए में मिल रही हैं, निजी प्रकाशकों और स्कूलों की आपसी मिलीभगत से उनके 500 से 800 रुपए वसूले जा रहे हैं। कई किताबें ऐसी हैं, जिनकी वास्तविक कीमत 50 रुपए है लेकिन 500 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। राजधानी सहित राज्यभर के ज्यादातर निजी स्कूल अभिभावकों को सूची थमाकर चिह्नित दुकान से ही किताबें, कॉपियां और स्टेशनरी लेने का दबाव बना रहे हैं।

जानकारों के अनुसार किताब-कॉपियों के जरिए लूट का खेल निजी प्रकाशक, वितरक व स्कूलों की मिलीभगत से चल रहा है। मोटे कमीशन और कमाई के फेर में पहले चहेता प्रकाशक चुना जाता है। फिर वितरक, स्कूलों का कमीशन जोड़कर किताब का अंकित मूल्य तय किया जाता है। जो किताब 500 रुपए में छात्र को बेची जा रही है, उसकी वास्तविक कीमत 100-150 रुपए के बीच है। मगर स्कूल अपने कमीशन के कारण खुद किताबें बेच रहे हैं या दुकानें तय कर अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं।

NCERT New Updatesएनसीईआरटी की जो किताबें रूपए 25 से रूपए 200 तक

छोटे बच्चे, वसूली का बड़ा खेल

रूपए 3 से 4 हजार तक बेची जा रही हैं नर्सरी और प्रेप जैसी छोटी कक्षाओं की किताबें भी

रूपए 6000 का पड़ रहा है पहली से पांचवीं कक्षा की किताबों का सेट

रूपए 500 से 800 प्रति पुस्तक है नर्सरी से बारहवीं कक्षा की किताबों की कीमत

रूपए 8000 तक पड़ता है पूरा सैट

रूपए 4-5 हजार रुपए लिए जा रहे हैं यूनिफॉर्म, जूते व अन्य सामग्री के

1-2 दुकानों पर ही मिलती हैं यूनिफॉर्म, वहीं से खरीदना अभिभावकों के लिए है मजबूरी


एनसीईआरटी की किताबें इतनी सस्ती
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की किताबें महज 25 रुपए से 200 रुपए में उपलब्ध हैं। आठवीं कक्षा तक की किताबों की कीमत केवल 50 रुपए प्रति किताब है। ग्यारहवीं व बारहवीं कक्षा में किताबों की कीमत 100 से 200 रुपए तक ही है।

चौथी कक्षा की किताबें 5200 की, जबकि एनसीईआरटी की मिल रहीं रुपए 300 में एक अभिभावक ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि उनकी बेटी प्रतापनगर स्थित एक स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ रही है। किताबों का सैट 5200 रुपए में दिया गया है। जबकि एनसीईआरटी में चौथी कक्षा की किताबें केवल 300 रुपए में मिल रही हैं।


Education News निजी प्रकाशकों की वे ही किताबें रूपए 500 - 800 तक

किताबें-कॉपियां व अन्य खर्च फीस एक्ट में शामिल ही नहीं
फीस पर लगाम के लिए बने फीस अधिनियम में किताबें-कॉपियों, यूनिफॉर्म का खर्च आदि शामिल ही नहीं किए गए हैं। फीस एक्ट के तहत इनके दाम ज्यादा वसूलने पर कार्यवाही भी नहीं होती।

भीलवाड़ा में 15-20 अभिभावकों ने क्लब बनाया है, जो पिछले सत्र की किताबें लेता है। कोई भी अभिभावक बच्चे की पिछले सत्र की किताबें देकर अगली कक्षा की ले सकता है। क्लब एनसीईआरटी व राजस्थान बोर्ड , दोनों की किताबें अभिभावकों को उपलब्ध करा रहा है। इससे कई बच्चों को किताबें नि:शुल्क मिल रही हैं।

यह है नियम
शिक्षा विभाग के अनुसार हर स्कूल को किताबों के लेखक और प्रकाशक की सूची छात्रों के एक माह पहले बतानी होगी। वे किताबें कम से कम 3 दुकानों पर मिलनी चाहिए।


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