
CBSE Result 2019
इस साल नीट क्वालिफाई करने वाले महज 8.89 फीसदी विद्यार्थियों का ही डॉक्टरी की पढ़ाई का सपना पूरा होगा। जबकि करीब 91.11 फीसदी विद्यार्थियों को नीट परीक्षा पास होते हुए भी अन्य विकल्प तलाशने होंगे। यदि भारत के छात्र दुनिया के हर मेडिकल कॉलेज में भी दाखिला लें तो भी सभी छात्रों का डॉक्टरी का सपना पूरा नहीं हो सकता है। इस साल देशभर में 70 हजार 878 एमबीबीएस की सीटें है। जबकि इस साल नीट के जरिए 7,97,042 विद्यार्थी सफल हुए है। राजस्थान पत्रिका टीम ने युवाओं के टूटते सपनों को लेकर एक्सपर्ट से बातचीत की तो सामने आया कि देशभर में मेडिकल कॉलेजों की कमी के कारण 37 फीसदी से अधिक चिकित्सकों के पद रिक्त है।
हर साल बढ़ रहे हैं दो लाख छात्र
देशभर में डॉक्टरी का सपना देखने वाले विद्यार्थियों की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है। पिछले चार वर्षो के आंकडों पर गौर करें तो लगभग डेढ़ से दो लाख विद्यार्थी हर साल बढ़ रहे है। लेकिन मेडिकल कॉलेजों की संख्या महज 40 भी नहीं बढ़ पा रही है।
देश में एमबीबीएस की सीट कम होने के कारण काफी विद्यार्थी विदेश से भी डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे है। चीन, रूस, यूक्रेन देशों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हर वर्ष भारत के लगभग 13 हजार विद्यार्थी दाखिला लेते है। यदि जॉर्जिया, फिलिपिन्स, बांग्लादेश, नेपाल, कजाकिस्तान व अमेरिका सहित अन्य देशों में लगभग पांच हजार विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। एक्सपर्ट वेदप्रकाश बेनीवाल ने बताया कि पिछले पांच वर्षो में विदेश से दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।
एमसीआई की राहत
एमसीआई ने एक राहतभरा फैसला पिछले दिनों जरूर लिया था। इसके तहत एक बार नीट पास करने पर स्कोर तीन साल तक वैध माना जाएगा। एक्सपर्ट डॉ. अनिल धायल ने बताया कि वर्ष 2018 से पहले विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई करने पर नीट लागू नहीं होता था, वहां सीधे जाकर प्रवेश ले सकते थे। लेकिन वर्ष 2018 में एमसीआई के आदेश के बाद भी विदेश से डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए नीट लागू कर दिया गया। इसके बाद कुछ अभ्यर्थियों ने न्यायालय में याचिका लगाई तो छूट भी दी गई। अब पांच जून तक दाखिला लेने वालों को नीट में छूट है।
14 हजार रैंक तक सरकारी कॉलेज की उम्मीद
इस साल देश के 7,97,042 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा क्वालीफाई की है। पिछले साल 11 हजार तक रैंक हासिल करने वालों को सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल गया था। इस साल 13-14 हजार की रैंक वाले विद्यार्थियों को सरकारी कॉलेज मिलने की उम्मीद है। इसके बाद वाले विद्यार्थी निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले सकते है। वहीं वेटनरी, फिजियोथैरपी व फॉर्मेसी में भी आजकल नीट के अंकों के आधार पर दाखिला होता है। जिन विद्यार्थियों को देश से ही एमबीबीएस करनी है उनको रैंक सुधार के लिए दुबारा तैयारी करनी होगी।
- डॉ. पीयूष सुण्डा, सीकर
सबसे बड़ी खास बात यह है कि इस साल नीट परीक्षा में 720 में से मात्र 16.66 फीसदी यानी 107 अंक लाने वाले परीक्षार्थियों को भी परीक्षा में उत्तीर्ण घोषित किया गया है। इस प्रकार एनटीए ने 7,97,042 विद्यार्थियों को नीट क्वालिफाई करार दिया है।
परीक्षा में कुल रजिस्ट्रेशन - 15,19,375
परीक्षा में शामिल हुए 14,10,755
पास हुए कुल छात्र 07,97,042
देशभर में मेडिकल कॉलेज - 529
देश के मेडिकल कॉलेजों में कुल सीटें - 70,878
Published on:
09 Jun 2019 12:11 pm
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