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RBSE Board Result: कई सरकारी स्कूलों में सारे बच्चे हुए फेल, 113 बेटियों ने दी परीक्षा, 20 हुई पास

कक्षा दस में अध्ययनरत कुल 113 बेटियों में से इस बार महज 20 ही उत्तीर्ण हुई हैं।

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जयपुर

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Sunil Sharma

Jun 07, 2019

Punjab Govt Schools

Punjab Govt Schools

यहां स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की कक्षा दस में अध्ययनरत कुल 113 बेटियों में से इस बार महज 20 ही उत्तीर्ण हुई हैं। प्रथम श्रेणी में मात्र 2 ही बालिकाएं पास हुई हैं। वहीं 8 बालिकाएं सैकंड तथा 10 बालिकाएं थर्ड डिवीजन पास हुई हैं। यहां 93 छात्राएं फेल हो गई। स्कूल का परिणाम 17.70 प्रतिशत रहा है। इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक मिथलेश शर्मा का कहना है कि राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय का मामला दिखवाकर कार्रवाई की जाएगी।

दस कक्षाओं पर दो शिक्षक, दसवीं का परिणाम शून्य
करौली जिले के मण्डरायल उपखण्ड मुख्यालय के संस्कृत स्कूल में दस कक्षाओं पर मात्र दो ही शिक्षक है। इस स्थिति में पढ़ाई व्यवस्था चरमराने का नतीजा यह सामने आया कि प्रवेशिका (दसवीं) के सभी विद्यार्थी फेल हुए है। इस स्कूल में प्रवेशिका (दसवीं) की परीक्षा में छह विद्यार्थी नामांकित थे। इनमें से पांच विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से सभी पांचों विद्यार्थी फेल हो गए। मण्डरायल का यह स्कूल क्षेत्र का संकुल कन्द्र है, जो ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की तरह काम करता है। इसके अधीन लांगरा, भांकरी व दरगवां के स्कूल भी आते हैं। इस बारे में संस्कृत शिक्षा, भरतपुर स्थित संभाग अधिकारी डॉ. महेन्द्र कुमार का कहना है कि सभी विद्यार्थियों के फेल होना गम्भीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी। मण्डरायल के स्कूल में शिक्षकों की व्यवस्था भी की जाएगी।

बाड़मेर के दो सरकारी स्कूल: 36 में से 1 तो दूसरे में 43 में 2 छात्र पास
बाड़मेर जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालय मेवाणियों की ढाणी में 09 अध्यापक कार्यरत है। जबकि यहां 36 में से 01 छात्र ही उत्तीर्ण हुआ है तो रामावि आटी स्कूल में 43 में से 02 छात्र ही उत्तीर्ण हुए हैं। यहां 08 शिक्षक कार्यरत है। परिणाम आने के बाद दोनों ही विद्यालयों के अभिभावकों ने प्रधानाध्यापक और अध्यापकों को यह अल्टीमेटम भी दे दिया है कि अब वे विद्यालय आने से पहले यह जवाब तैयार रखे कि ऐसा क्यों हुआ? गौरतलब है कि दोनों ही विद्यालय जिला मुख्यालय से महज 10-15 किमी की दूरी पर है। इधर दोनों ही स्कूल के संस्था प्रधानों ने कॉल रिसीव नहीं किए।

10 परीक्षार्थियों में से एक भी नहीं हुआ उतीर्ण
पीपल्दाकलां कस्बे में स्थित दो सरकारी स्कूलों का बोर्ड परीक्षा का परिणाम चौंकाने वाला रहा है। यहां करवाड़ रोड स्थित राजकीय प्रवेशिका संस्कृत स्कूल में 10 छात्र-छात्राओं ने 10वीं बोर्ड (प्रवेशिका) की परीक्षा दी थी लेकिन इनमें से एक भी पास नहीं हुआ। दो के पूरक आई और 8 अनुत्तीर्ण हुए हैं। यहां स्कूल में 70 बच्चों का नामांकन था। 7 अध्यापक कार्यरत हैं। इसी तरह राजकीय आदर्श बालिका स्कूल में 4 छात्राओं ने 10 वीं बोर्ड की परीक्षा दी, लेकिन इनमें से एक ही छात्रा उतीर्ण हुई है, दो अनुतीर्ण रही। एक छात्रा को अंग्रेजी में पूरक आई है। यहां 9 अध्यापक व अध्यापिकाएं हैं। उतीर्ण छात्रा के भी 52.33 प्रतिशत अंक आए। विद्यालय में कुल नामांकन 86 विद्यार्थियों का था।

स्कूल में 23 शिक्षक, दसवीं में नौ ने परीक्षा दी, 6 फेल
गांव बुडाना के स्वतंत्रता सेनानी श्रीबालाराम सीनियर सैकंडरी स्कूल बुडाना संस्था प्रधान समेत 23 शिक्षक हैं और यहां पर दसवीं में पढऩे वाले महज दस विद्यार्थी। जिनमें नौ ने परीक्षा दी और उत्तीर्ण हुए महज तीन विद्यार्थी। यहां पर छह विद्यार्थी फेल हो गए हैं। यहां का परिणाम 33.33 फीसदी रहा है। इसी प्रकार उदयपुरवाटी उपखंड के गांव छोपाली के राजकीय सीनियर सैकंडरी स्कूल का दसवीं का परिणाम इस बार महज 31.17 फीसदी रहा है। यहां पर दसवीं में पढऩे वाले 52 छात्रों में से 51 ने परीक्षा दी और महज 16 छात्र उत्तीर्ण हो पाए तथा 35 छात्र फेल हो गए। जबकि यहां पर संस्था प्रधान से लेकर चपरासी तक 29 का स्टाफ है और विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले यहां पर लैब असिस्टेंट को मिलाकर 24 शिक्षक हैं। इसके अलावा उदयपुरवाटी उपखंड के गांव इंद्रपुरा का शहीद देवीसिंह राजकीय आदर्श सीनियर सैकंडरी स्कूल का ऐसा ही हाल है। यहां पर दसवीं में 15 विद्यार्थियों में छह जने पास हुए और नौ फेल। यहां पर स्टाफ की बात की जाए तो 13 शिक्षक हैं, जिन्होंने इन विद्यार्थियों को पढ़ाया है। यहां का कुल परिणाम 40 फीसदी रहा है।

शिक्षकों ने नहीं पढ़ाया, इसलिए हुए फेल
कातर बड़ी राजकीय आदर्श मा. वि. की कक्षा 10वीं में कुल 9 विद्यार्थियों में से केवल एक छात्र के पास होने का मामला गंभीर हो गया है। नौ छात्रों में कुल 7 लड़कियां थी, एक भी पास नहीं हुई। एक लडक़ा पास हुआ। पत्रिका टीम गुरुवार को विद्यार्थियों से मिली, तो उन्होंने बताया कि पढ़ाई के अभाव में वे फेल हो गए। गुरुजी से कक्षाएं लेने के लिए बोलते तो गुरुजी कभी आते व कभी नहीं आते। परिजनों ने बताया कि गांव में 10वीं तक केवल एक स्कूल है। बेटियों को बाहर दूसरे गांव कहां भेजे?