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स्टूडेंट ने एग्जाम में लिखी अपनी लव स्टोरी, नतीजा क्या रहा, यहां जानें

कुछ स्टूडेंट ने तो अपनी उत्तर पुस्तिका में प्रश्न का उत्तर न आने पर टीचर के लिए पैसे रखकर पास करने की गुहार लगाई।

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Kamal Singh Rajpoot

Jun 20, 2018

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स्टूडेंट ने एग्जाम में लिखी अपनी लव स्टोरी, नतीजा क्या रहा, यहां जानें

उत्तरप्रदेश एजुकेशन बोर्ड ने इस बार अपनी बोर्ड परीक्षाओं (10वीं और 12वीं) के परिणाम घोषित कर दिए है। बोर्ड परीक्षा में स्टूडेंट पास होने के लिए किस—किस तरह के हथकंडे अपनाते है, इसका ताजा उदाहरण यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियां जांचने के दौरान सामने आया। आप उस मामले के बारे में जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। इस बार यूपी बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान विद्यार्थियों की ओर से प्रश्न के उत्तर न आने पर उत्तर पुस्तिका में अलग अलग तरह के जवाब देखने को मिले।

कुछ स्टूडेंट ने तो अपनी उत्तर पुस्तिका में प्रश्न का उत्तर न आने पर टीचर के लिए पैसे रखकर पास करने की गुहार लगाई। कई उत्तर पुस्तिकाओं में 100—100 रुपए के नोट देखने को मिले है। छात्रों ने अपनी आंसर सीट में 100 रुपए का नोट रखकर पास करने की प्रार्थना की। इतना ही नहीं एक छात्र ने सारी हदों कों पार करते हुए अपनी उत्तर पुस्तिका में अपनी दर्द भरी प्रेम कहानी लिख डाली।

अपनी प्रेम कहानी का जिक्र करते हुए छात्र ने आंसर सीट में लिखा कि इस इश्क ने हमें पढ़ाई से दूर कर दिया। इस इश्क की वजह से हम पढ़ाई से दूर हो गए। यूपी के मुजफ्फरनगर के एक छात्र ने एग्जाम में लव स्टोरी का जिक्र करते बताया कि वो आखिर किस वजह से पढ़ नहीं पाया। छात्र ने बताया कि प्यार में होने की वजह से उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता है। एक उत्तर पुस्तिका में स्टूडेंट ने अपने प्यार का इजहार करते हुए लिखा, I Love My Pooja । वहीं एक और छात्र ने लिखा था कि गुरुजी को नमस्कार , कृपया पास कर दें।

इन सबके बीच सबसे ज्यादा सोचने की बात यह है कि आखिर एग्जाम के दौरान स्टूडेंट्स के मन में इस तरह के आइडिया कहां से आते है। परीक्षा के दौरान जहां छात्रों को अपने पेपर हल करने के अलावा कुछ नहीं सूझता, वहीं कुछ छात्रों के मन में इस तरह के अजीबोगरीब ख्याल आना बड़ी शर्म की बात है। क्या छात्रों के मन में बोर्ड परीक्षा के प्रति कोई डर नहीं है ? खैर जो भी हो लेकिन इसे देखकर इतना तो जरुर कहा जा सकता है कि स्टूडेंटस की इस तरह की उत्तर पुस्तिकाएं कही ना कही समाज की ही सोच की नाकामयाबी को दर्शाती है और इस पर हमें विचार करने की जरूरत है।