
Ravi Kishan
जाने माने फिल्म अभिनेता रवि किशन ने कहा कि देश के चर्तुमुखी विकास के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रचलन कम करने के साथ ही सरकारी स्कूलों की हालत में सुधार करना होगा। अपनी आने वाली फिल्म 'डीसेंट बायज' के प्रमोशन पर आए रवि ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि हाल के वर्षों में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की तादाद कुकरमुत्ते की तरह बढ़ रही है जबकि सरकारी स्कूलों की दशा दिन पर दिन खराब हो रही है जो शुभ संकेत नहीं है। अगर देश को तेजी से तरक्की करनी है तो गुरूकुल और सरकारी स्कूलों को अधिक तवज्जो देनी होगी। जापान, फ्रांस और जर्मनी समेत दुनिया के तमाम ऐसे देश हैं जहां राष्ट्र भाषा को अहमियत दी जाती है। इन देशों के लोग अंग्रेजी भाषा को जानने समझने की जरूरत नहीं समझते, लेकिन तरक्की के मामले में ये अन्य देशों से पीछे नहीं हैं।
फिल्म में शिक्षा माफिया का रोल निभा रहे रवि किशन ने कहा कि उनकी फिल्म इंग्लिश मीडियम स्कूलों के बढ़ते प्रचलन की खिलाफत और सरकारी स्कूलों की पैरवी करने के साथ ही शिक्षा माफियाओं के खिलाफ विद्रोह का शंखनाद करेगी। उन्होने कहा कि सरकारी स्कूलों से पढ़े लिखे कई लोगों ने देश दुनिया में अहम पदों पर रहकर लोकप्रियता के आयाम गढ़े हैं। उन्होने कहा, मैं खुद सरकारी स्कूल में पढ़ा हूं। पिताजी पुजारी थे, उनकी इतनी आमदनी नहीं थी कि कांवेंट का खर्चा उठा सकें, मगर वह अब दुनिया की अधिसंख्य भाषाओं को न सिर्फ जानते समझते हैं, बल्कि उन भाषाओं की 500 से अधिक फिल्मों में किरदार भी निभा चुके हैं।
फिल्म अभिनेता ने कहा कि देश की 80 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है जहां संसाधनों की बेहद कमी है। सरकारी स्कूलों के मूलभूत ढांचे में सुधार कर बच्चों को सुनहरे भविष्य की ओर अग्रसर किया जा सकता है, वहीं शिक्षा को व्यवसाय बनाने की प्रवृत्ति रखने वाले लोगों पर सरकार को सख्ती से पेश आना चाहिए। इस मौके पर फिल्म के निर्देशक शहाब इलाहाबादी ने कहा कि लखनऊ, उन्नाव और आसपास के क्षेत्रों में फिल्म की शूटिंग को रिकॉर्ड 16 दिनों में पूरा किया गया। करीब डेढ़ करोड़ के बजट वाली इस फिल्म के मुख्य किरदारों में जानेमाने फिल्म अभिनेता रवि किशन और गोविंद नामदेव के अलावा ध्रुव कुमार,जीत सिंह, मंजुल आजाद और रोहित मिश्रा आदि हैं।
फिल्म में शिक्षा माफिया की भूमिका अदा कर रहे रवि किशन एक हिन्दी मीडियम स्कूल को अंग्रेजी माध्यम में तब्दील करना चाहते हैं। इसकी मान्यता की जिद पर अड़े रवि अपने बड़े बेटे का विवाह मंत्री मंजुल आजाद की बेटी से करने को तैयार हो जाते हैं, मगर उनका छोटा बेटा विद्रोह कर देता है। फिल्म में गोविंद नामदेव स्कूल के संस्थापक और रोहित मिश्रा अध्यापक की भूमिका में नजर आएंगे।
फिल्म निर्देशक ने बताया कि फिल्म बनाने का विचार उन्हें दो फरवरी 1835 में अंग्रेज लार्ड मैकाले की ब्रिटिश संसद में दिए गए उस बयान के मद्देनजर आया जिसमे उसने कहा था कि भारत पर राज करने के लिए उसकी संस्कृति और शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ को तोडऩा होगा। उन्होंने कहा कि आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी हमारी शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजी के आसपास घूमती है। वहीं आज के युवा अपनी संस्कृति को भुलाकार पश्चिमी देशों का अनुसरण करने की होड़ में रहते हैं।
Published on:
04 Dec 2018 07:39 pm
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