वाराणसी के शहर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र में निर्मित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट "काशी विश्वनाथ धाम" ने तमाम विरोध और नाराजगी के एक बार फिर से बीजेपी के सिर जीत का ताज पहना दिया है। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के परिणाम ने ये साबित कर दिया कि क्षेत्र के मतदाताओं को काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण को लेकर कोई नाराजगी नहीं रही। यही नहीं बीजेपी ने पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र की सभी सीटों पर जीत का परचम लहरा दिया है।
वाराणसी. शहर का दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र जहां हाल ही में तैयार हुआ है काशी विश्वनाथ धाम जिसे लेकर कहा ये जा रहा था कि इससे क्षेत्र के लोगों में काफी नाराजगी है। इस बार इस क्षेत्र के मतदाता अपनी नाराजगी का इजहार ईवीएम बटन दबा करेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और बीजेपी प्रत्याशी डॉ नीलकंठ तिवारी, जीत का सिलिला जारी रखते हुए लगातार दूसरी बार विधायक बने। यानी 1989 से शुरू बीजेपी के जीत का क्रम 2022 तक जारी रहा। न केवल शहर दक्षिणी बल्कि वाराणसी की सभी आठ सीटों पर जीत हासिल कर एक बार फिर से बीजेपी गठबंधन ने क्लीन स्वीप किया है।
नीलकंठ तिवारी ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी गठबंधन के उम्मीदवार किशन दीक्षित को 10 हजार मतों के अंतर से पराजित किया।
वैसे वाराणसी की सभी आठ सीटों पर बीजेपी गठबंधन की जीत हुई है। शहर उत्तरी से रवींद्र जायसवाल, कैंट से सौरभ श्रीवास्तव, शिवपुर से अनिल राजभर, पिंडरा से डॉ. अवधेश सिंह, सेवापुरी से नीलरतन सिंह पटेल, अजगरा से त्रिभुवन राम और रोहनिया से भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी डॉ. सुनील पटेल (अपना दल-एस) विजयी हुए हैं।
विश्वनाथ धाम निर्माण को हुआ काफी विरोध
काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ होने के वक्त ही इसका विरोध शुरू हो गया। क्षेत्रीय नागरिकों ने अलग-अलग कमेटी गठित कर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। आए दिन धरना-प्रदर्शन होता रहा। मामला हाईकोर्ट तक गया। यहां तक कि विश्वनाथ धाम के लिए जो गंगा द्वार जलासेन घाट से शुरू हुआ है उसके बगल में ही है नेपाल नरेश द्वारा बनवाया पशुपति नाथ मंदिर। चर्चा शुरू हुई कि ये मंदिर भी टूटेगा तो इसे लेकर नेपाल सरकार तक हरकत में आई। अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बनते देख प्रशासन ने पशुपति नाथ मंदिर ने सफाई दी कि ये मंदिर नहीं टूटेगा। इस पूरे विवाद में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद भी कूदे। इसी बीच कई शिवलिंग एक नाले में मिले तो विरोध ज्यादा बढ़ा। आरोप लगा कि प्रशान शिवलिंग व देव विग्रहों को तोड़ कर जहां-तहां फिकवा रहा है। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कहे अनुसार सारे शिवलिंग लंका थाने में रखे गए, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य नित्य पूजन अर्चन करते हैं।
काशी विश्वनाथ धाम की खास बातें
-इस काशी विश्वनाथ धाम की नींव खुद पीएम मोदी ने 8 मार्च 2019 को रखी थी
-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 दिसंबर 2021 को काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया
-इस प्रोजेक्ट में मंदिर के आसपास की 300 से अधिक संपत्तियों की खरीद और अधिग्रहण शामिल है
-पीएम कार्यालय के अनुसार, लगभग 1,400 दुकानदारों, किरायदारों और मकान मालिकों को हटाया गया
-5 लाख वर्ग मीटर के एक बड़े परिसर में बनाए गए इस कॉरिडोर (विश्वनाथ धाम) को 3 भागों में बांटा गया है। इसमें 4 बड़े गेट हैं और प्रदक्षिणा पथ पर संगमरमर के 22 शिलालेख लगाए गए हैं, जिसमें काशी की महिमा के बारे में बताया गया है
-पहले ये मंदिर परिसर लगभग 3000 वर्ग फुट तक सीमित था, अब उसे इस प्रोजेक्ट की मदद से लगभग 5 लाख वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में जगह दी गई है
-परियोजना के पहले चरण में कुल 23 भवनों का उद्घाटन किया गया है। इनकी मदद से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों को कई तरह की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिनमें यात्री सुविधा केंद्र, पर्यटक सुविधा केंद्र, वैदिक केंद्र, मुमुक्षु भवन, भोगशाला, सिटी म्यूजियम, व्यूइंग गैलरी और फूड कोर्ट शामिल हैं।
-काशी विश्वनाथ धाम परिसर के भवन निर्माण पर 386.70 करोड़ रुपये व्यय हुए
-मंदिर विस्तार पर 489.05 करोड़ रुपये खर्च हुए
-काशी विश्वनाथ धाम में 27 मंदिरों की एक खास मणिमाला भी तैयार की गई है। यह वे मंदिर हैं, जिनमें कुछ काशी विश्वनाथ के साथ ही स्थापित किए गए थे और बाकी समय-समय पर काशीपुराधिपति के विग्रहों के रूप में यहां बसाए गए थे।
-गंगा स्नान के बाद जल लेकर चलने वाले भक्त इस मणिमाला को साक्षी मानकर ही गर्भगृह तक जाएंगे और यहां से दर्शन के बाद इन विग्रहों की परिक्रमा कर धर्मलाभ लिया जा सकेगा।
-दूसरे चरण में 97 विग्रह व प्रतिमाओं की स्थापना और तीसरे चरण में 145 शिवलिंगों को स्थापित किया जाएगा।