UP Assembly Elections 2022 : उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा के आम चुनाव से पहले भाजपा की पहली कोशिश थी कि किसी तरह से किसानों की नाराजगी दूर की जाए, ताकि पश्चिम यूपी सहित पूरे प्रदेश में अपने 2017 के प्रदर्शन को फिर से दोहरा सके। माना जा रहा है कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी का एलान भारतीय जनता पार्टी की इसी रणनीति का एक हिस्सा है।
लखनऊ. UP Assembly Elections 2022 : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुटी है। जिसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने तीनों कृषि कानूनों के वापस लेने के घोषणा कर मास्टर स्ट्रोक लगाने की कोशिश की है। तीनों कृषि कानून लेने का एलान शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान किया। पीएम मोदी ने यह संदेश देने की कोशिश की वह किसानों के साथ हैं। हालांकि किसान आंदोलन खत्म करेंगे या नहीं इस पर अभी संशय है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता महेंद्र सिंह टिकैत ने ट्वीट कर कहा है कि आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। वहीं प्रधानमंत्री के इस एलान के बाद सियासी दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी आई है।
किसान आंदोलन से बैकफुट पर थी भाजपा
बता दें कि 17 सितंबर 2020 को लोकसभा तीनों नए कृषि कानूनों का अध्यादेश पारित हुआ था। नए कृषि कानूनों का एलान होते ही किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन की शुरूआत कर दी थी। इन तीनों कानूनों के विरोध में किसानों में भारतीय जनता पार्टी और केंद्र की मोदी सरकार व उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा था। इसके बाद लखीमपुर में हिंसा हुई हिंसा से भाजपा की छवि को काफी धक्का लगा था।
एनडीए से अलग हुआ था अकाली दल
तीनों नए कृषि कानून से भाजपा की अगुवाई में बने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को भी कई झटके लगे थे। जिसमें सबसे पहले पंजाब की पार्टी अकाली दल ने भाजपा से पुरानी दोस्ती तोड़ते हुए एनडीए से अलग होने की घोषणा की थी। इतना ही अकाली दल में केंद्र सरकार में मंत्री रही हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा देकर बड़ा झटका दिया था। अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कृषि कानूनों के विरोध में अपना पद्म विभूषण सम्मान तक वापस कर दिया था। इसके बाद राजस्थान की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने भी एनडीए से अलग होने का एलान कर दिया था।
पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिली थी शिकस्त
कृषि कानून बनने के बाद पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा के आम चुनाव में भाजपा को शिकस्त का सामना करना पड़ा था। यहां पर भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन बहुमत से बहुत दूरी रही। हालांकि भाजपा यहां पर दूसरे नंबर पर रही थी। इसके अलावा हाल ही में संपन्न हुए तीन राज्यों हिमाचल, रास्थान और महाराष्ट्र में हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी मात खानी पड़ी थी। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब सहित देश के पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं। जिसमें भाजपा वर्तमान समय में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 2017 के नतीजों को दोहराने में कोई कसर नहीं बाकी रख रही है।
2017 के प्रदर्शन को दोहारने की तैयारी में भाजपा
भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व पूरी तरह से अपना ध्यान यूपी पर केंद्रित किए हुए है। जिसके तहत पीएम मोदी लगातार यहां पर विकास से जुड़ी कई योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर रहे हैं। इसके अलावा सभाओं को भी संबोधित कर रहे हैं। किसान आंदोलन और लखीमपुर हिंसा से बैकफुट में आई भाजपा डैमेज कंट्रोल करने में जुटी है। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा के आम चुनाव से पहले भाजपा की पहली कोशिश थी कि किसी तरह से किसानों की नाराजगी दूर की जाए, ताकि पश्चिम यूपी सहित पूरे प्रदेश में अपने 2017 के प्रदर्शन को फिर से दोहरा सके। माना जा रहा है कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी का एलान भारतीय जनता पार्टी की इसी रणनीति का एक हिस्सा है।
संसद में रद्द किए जाए तीनों कृषि कानून- टिकैत
वहीं किसान आंदोलन समाप्त होगा या नहीं इस पर अभी संशय है। भाकियू नेता राकेश टिकैत ने ट्वीट कर कहा है कि आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। टिकैत ने कहा कि सरकार एमएसपी के साथ ही किसानों के मुद्दे पर भी बात करे।
चुनाव में हार की डर से वापस लिए कृषि कानून- प्रियंका
कांग्रेस महासचिव ने प्रियंका गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा कि 600 से अधिक किसानों की शहादत
350 से अधिक दिन का संघर्ष, नरेंद्र मोदी जी आपके मंत्री के बेटे ने किसानों को कुचल कर मार डाला, आपको कोई परवाह नहीं थी। उन्होंने लिखा कि आपकी पार्टी के नेताओं ने किसानों का अपमान करते हुए उन्हें आतंकवादी, देशद्रोही, गुंडे, उपद्रवी कहा, आपने खुद आंदोलनजीवी बोला, उनपर लाठियाँ बरसायीं, उन्हें गिरफ़्तार किया। अब चुनाव में हार दिखने लगी तो आपको अचानक इस देश की सच्चाई समझ में आने लगी। प्रियंका ने लिखा कि किसान की सदैव जय होगी। 'जय जवान, जय किसान, जय भारत' ।