West Bengal Assembly Elections 2021: क्या भाजपा और तृणमूल लगा पाएंगी सेंध
कृष्णदास पार्थ
कोलकाता । West Bengal Assembly Elections 2021: कांग्रेस की साख पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दांव पर लगी है। सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी की भी प्रतिष्ठा दांव पर है। गढ़ मुर्शिदाबाद ही अधीर की प्रतिष्ठा को बचा सकता है, क्योंकि बंगाल का यही एकमात्र ऐसा जिला है जहां सिर्फ अधीर का जादू चलता है। 2011 विधानसभा चुनाव में ममता की लहर और 2014 व 2019 लोकसभा चुनाव में मोदी के तूफान में भी किला हिला नहीं था। तभी तो कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने तोहफे के तौर पर अधीर को लोकसभा में कांग्रेस का नेता बना दिया। सोमेन मित्रा के निधन के बाद उन्हें प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी सौंप दी। अब अधीर की परीक्षा है। सवाल यह है कि क्या वे इस बार भी अपने किले को बचा पाएंगे या भाजपा और तृणमूल कांग्रेस सेंध मारने में सफल हो जाएगी।
लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बड़ा अंतर: 2019 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल 22 में से 18 सीटों पर, 4 पर कांग्रेस और 1 पर भाजपा आगे थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा की जमीनी ताकत कुछ कम हुई है, वहीं कांग्रेस की बढ़ी है। तृणमूल कांग्रेस की भी स्थिति बेहतर है।
प्रचार से दूर रहे कांग्रेस के बड़े नेता -
इस बार प्रचार-प्रसार में भी कांग्रेस कमजोर साबित हुई है। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने इस चुनाव को उतना महत्त्व नहीं दिया। तभी तो केंद्रीय नेतृत्व ने चुनाव जीतने के लिए जोर नहीं लगाया। यहां सबकुछ अधीर पर ही निर्भर है। संयुक्त मोर्चा बनाने और इसमें अपनी साझेदारी तय करने में भी अधीर ने ही प्रमुख भूमिका निभाई।
अपने गढ़ को ही अधीर ने चुना-
संयुक्त मोर्चा के गठन के बाद सीट बंटवारे की जब बात आई तो कांग्रेस के हिस्से में 91 सीटें आई। उन्होंने समझदारी दिखाते हुए कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले मालदह व मुर्शिदाबाद पर ज्यादा फोकस किया। आखिरकार कांग्रेस को संयुक्त मोर्चा ने मुर्शिदाबाद की 22 में से 17 और मालदह की 12 सीटों में से 9 सीटें दे दी।
75 % अल्पसंख्यक आबादी मुर्शिदाबाद में -
75 फीसदी अल्पसंख्यक आबादी वाले मुर्शिदाबाद में भाजपा ने 5 अल्पसंख्यक प्रत्याशी उतारे हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने जिले में 6 सीटों पर वोट प्रतिशत बढ़ाया था। अब सवाल है कि पार्टी कितनी सीटें जीत पाती है। हालांकि भाजपा की नजर नौ सीटों पर है।