रेटिंग-2.5
फेमस उपन्यासकार चार्ल्स डिकेंस के उपन्यास 'ग्रेट एक्सपेक्टेशंस' पर वैसे तो विश्व में कई फिल्में बन चुकी हैंं लेकिन बॉलीवुड में कश्मीर की खूबसूरती के साथ 'फितूर' को लेकर आए हैं अभिषेक कपूर।
फिल्म की कहानी पुरानी हिन्दी फिल्मों की याद दिलाएगी, जिसमें एक गरीब लड़के को एक अमीर लड़की से प्यार हो जाता है। बचपन की मुलाकात का प्यार में बदलना, लड़की की अमीर हमदर्दी और लड़के की गरीब मोहब्बत।
दोनों का बिछुडऩा और फिर मोहब्बत को पाने के लिए दोंनों की दीवानगी। अभिषेक कपूर ने ऐसी कहानी को कश्मीर के बैकड्रॉप में रखा है।
फिल्म में कम बोलने वाले कश्मीरी लड़का नूर (आदित्य राय कपूर) है जो अपने दीदी-जीजाजी के साथ रहता है, लेकिन जब वह एक अमीर और राजघराने से संबंध रखने वाली बेगम हजरत जान (तब्बू) की बेटी फिरदौस (कैटरीना कैफ) को पहली बार देखता है तो वह उसके प्यार में खो जाता है और उसके लिए सबको भुला देता है।
अमीर-गरीब के प्यार में जुदाई का मोड़ आता है और फिरदौस कश्मीर छोड़कर दिल्ली चली जाती है। कुछ बनने और लड़की के प्यार को हासिल करने की जिद नूर को दिल्ली पहुंचा देती है। जहां वह अपनी अंगुलियों के जादू से एक बड़ा पेंटर बन जाता है। यहां से प्यार को पाने की कहानी शुरू होती है।
फिल्म में प्यार करने वाले युवा प्रेमी जोड़े को दीवानगी की हद तक प्यार करते हुए पर्दे पर पेश किया गया है। कश्मीर की वादियों में बुनी गई कहानी इस फिल्म को एक नया आयाम और स्वरूप प्रदान करती है। बेगम के किरदार में तब्बू ने बेहतरीन अदाकारी की है जो फिल्म का मुख्य आकषर्ण बनकर उभरती है।
सही समय पर और अच्छे तरीके से पिरोए गए अजय देवगन, लारा दत्ता और अदिति राव हैदरी के कैरेक्टर फिल्म को बेहतर गति प्रदान करते हैं। अभिषेक कपूर ने कहानी आगे बढ़ाने में घटनाएं जोडऩे की पूरी आजादी ली है। इस कारण कई बार कैरेक्टर के संबंधों की व्याख्या सही नहीं लगती।
कहानी श्रीनगर, पाकिस्तान, दिल्ली और लंदन के बीच दिखाई गई है और इन जगहों पर करेक्टर्स का आने-जाने का तरीका भी थोड़ा बचकाना लगता है। फिल्म के गीत-संगीत पर काफी मेहनत की गई है। स्वानंद किरकिरे और अमित त्रिवेदी ने स्थानीय खूबियों को म्यूजिक में स्पेशल जगह दी है।
डायरेक्टर : अभिषेक कपूर
जॉनर : रोमांटिक ड्रामा
स्टारकास्ट : आदित्य राय कपूर, कैटरीना कैफ, तब्बू, राहुल भट्ट