18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चेहल्लुम के अलविदाई ताजियों में आखे हुई नम

इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला का चेहल्लुम शिया समुदाय ने गमगीन माहौल में मनाया।

2 min read
Google source verification

image

Abhishek Gupta

Nov 22, 2016

Imam Hussain

Imam Hussain

इटावा. इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला का चेहल्लुम शिया समुदाय ने गमगीन माहौल में मनाया। चेहल्लुम के अलविदाई ताजियों को नम आंखों के बीच सुपुर्दे खाक किया गया और घरों पर मजलिसों का आयोजन किया गया।

चेहल्लुम के अलविदाई ताजिए मौलाना सैयद अनवारुल हसन जैदी के नेतृत्व और राहत अकील व गुलामुस सैयदेन की देखरेख में अंजुमन स्कूल के पास से उठे और तहसील चौराहा, नौरंगाबाद चौराहा, नया शहर चौराहा, दरी मुहल्ला, महेरा चुंगी होकर दरगाह हजरत अब्बास महेरे पहुंचे जहां उन्हें गमगीन माहौल में सुपुर्दे खाक किया गया।

ताजियों के भ्रमण के दौरान रास्ते भर तस्लीम रजा, जाफर ईरानी, तनवीर हसन, अयाज हुसैन, राहिल सगीर, फरहान नकवी ने मातमी नौहाख्वानी की। शावेज नकवी, आतिफ, अहमर जाफरी, शयान, जीशान सलाम पढ़ रहे थे और अदनान जाफरी, शम्स अलम और हुसैनी परचम पकड़े आगे चल रहे थे। ताजियों में हाजी कमर अब्बास नकवी, हाजी रईस जाफरी, सईद नकवी, इंतजार नकवी, आलिम रिजवी, राहत हुसैन, एसएम हादी, अरशद मरगूब, टीएच रिजवी सहित सैकड़ों लोगों ने शिरकत की।

सुन्नी समाज के चेहल्लुम के अलविदाई ताजिए विभिन्न इमामबाड़ों से रामगंज तिराहा पर एकत्र हुए और जुलूस के रूप में नया शहर चौराहा, नौरंगाबाद चौराहा, पक्का तालाब, नुमाइश चौराहा होते हुए बाइस ख्वाजा कब्रिस्तान पहुंचे जहां उन्हें गमगीन माहौल में सुपुर्दे खाक किया गया। ताजियों के जुलूस में कई आकर्षक ताजियों सहित करीब एक दर्जन ताजिए, चौकियां, तुगरे, अलम शामिल थे। जुलूस में मरसियों की धुनें गूंज रही थीं। जगह-जगह अकीदतमंदों ने शर्बत, चाय, पानी की सबीलें लगाईं। जुलूस की व्यवस्था में खादिम अब्बास, हाजी फजल यूसुफ खां, मु. राशिद, डा. अयाज अली, रफत अली खां, मुमताज चौधरी, जमीर हसन, गुड्डू खलीफा, फैयाज खलीफा, मुश्ताक खलीफा, रशीद खलीफा का विशेष योगदान रहा। जुलूस में कई थानों की पुलिस तैनात की गई थी। एसएसपी शिवहरी मीना ने ताजियों के जुलूस पर नजर रखी। इसी प्रकार भरथना कस्बा में भी इमाम हुसैन का चेहल्लुम गमगीन माहौल में मनाया गया।