Exclusive : शिवपाल यादव की गाड़ी और घरों से उतारे गये समाजवादी पार्टी के झंडे, देखें वीडियो

Exclusive : शिवपाल यादव की गाड़ी और घरों से उतारे गये समाजवादी पार्टी के झंडे, देखें वीडियो

Hariom Dwivedi | Publish: Sep, 03 2018 06:25:41 PM (IST) | Updated: Sep, 03 2018 06:29:33 PM (IST) Etawah, Uttar Pradesh, India

समाजवादी सेकुलर मोर्चा गठन के बाद फुलफार्म में शिवपाल यादव, इटावा में समर्थकों संग पहुंचे शिवपाल यादव, डीएम-एसपी से भी की मुलाकात...

दिनेश शाक्य
इटावा. समाजवादी सेकुलर मोर्चे के गठन के ऐलान के बाद शिवपाल यादव की गाड़ी से समाजवादी पार्टी का झंडा भी गायब हो गया है। इतना ही नहीं लखनऊ, इटावा और सैफई स्थित उनके आवासों से भी समाजवादी पार्टी के झंडे नदारद हैं। कहा जा रहा है कि घरों और गाड़ियों से झंडे उतारने की प्रक्रिया काफी पहले पूरी हो चुकी थी। शिवपाल की गाड़ी और आवासों से नदारद झंडे की चर्चा आज इसलिए हो रही है क्योंकि समाजवादी सेकुलर मोर्चा के ऐलान के बाद शिवपाल यादव पहली दफा इस तरह से इटावा आये। आये तो वो उस दिन भी थे, जिस दिन समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यसभा सदस्य दर्शन सिंह यादव का निधन हुआ था, लेकिन उस दिन ऐसा मौका नहीं था, जिसमें वो जोरदारी से अपने संगठन की चर्चा लोगों के बीच बैठकर करते।

सोमवार को शिवपाल यादव इटावा जिला सहकारी बैंक की 68वीं वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक में भाग लेने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जिले के डीएम और एसपी से भी मुलाकात की। इस दौरान शिवपाल यादव और उनके समर्थक अपनी-अपनी गाड़ियों से समाजवादी पार्टी का झंडा हटाकर इटावा पहुंचे हुए थे। इसके बाद राजनैतिक तौर पर चर्चाओं का बाजार गर्म होता नजर आ रहा है। इससे पहले रविवार को शिवपाल ने अपने ट्विटर हैंडल पर सपा के वरिष्ठ नेता का स्टेटस हटाते हुए खुद को समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का लीडर बता चुके हैं।

फुलफार्म में हैं शिवपाल
भले ही शिवपाल और उनके समर्थक इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन एक बात तो स्पष्ट हो चुकी है कि अब शिवपाल यादव फुलफार्म में आ चुके हैं। आपको बता दें कि इससे पहले भी शिवपाल यादव को बिना झंडे के देखा गया है। पहली बार 30 दिसंबर 2017 को शिवपाल यादव की गाड़ी को बिना झंडे के देखा गया था। उसके बाद से शिवपाल यादव के पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, तब शिवपाल सिंह यादव ने झंडा उतारे जाने के मुद्दे पर यह कहते हुए सफाई दी थी कि उनकी गाड़ी दिल्ली मे सर्विस के लिए गई हुई है, जिसमे झंडा लगा हुआ है। इस गाड़ी में झंडा लग नहीं सकता, इसलिए नहीं लगा है।

2017 चुनाव से पहले शिवपाल ने दिया था ये बयान
2017 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में चल रहे विवाद के दौरान शिवपाल सिंह यादव ने नई पार्टी बनाने का एलान किया था। उन्होंने कहा था कि वह समर्थकों संग समाजवादी सेक्युलर मोर्चा नाम से नई पार्टी बनाने जा रहे हैं। इस पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह होंगे। लेकिन शिवपाल सिंह यादव के इस मोर्चे की हवा खुद उनके भाई मुलायम सिंह यादव ने तब यह कह कर निकाल दी कि वह अपने बेटे को आर्शीवाद देते हैं। इससे शिवपाल और उनके समर्थकों में मायूसी दौड़ गई थी। दिवाली आई तो सैफई में पूरा मुलायम कुनबा एक साथ नजर आया। इनमें सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव, शिवपाल सिंह, अखिलेश यादव, धर्मेद्र यादव, तेजप्रताप सिंह, राजपाल सिंह, अभयराम यादव और अभिषेक यादव आदि शामिल रहे।

'आई परिवर्तन की आंधी है, शिवपाल हमारे गांधी हैं'
बीते जुलाई माह में इटावा में 'मुलायम के लोग' नामक संगठन के लोगों ने शिवपाल सिंह यादव को अपना नेता मानते हुए बड़े स्तर पर होर्डिंग बैनर लगाये। इनमें शिवपाल को उत्तर प्रदेश का बड़ा और अहम नेता बताते हुए नारे लिखे गये। नारों में लिखा था, 'गूंजे धरती और पाताल, प्रदेश के नेता हैं शिवपाल, मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों से आती आवाज यही, शिवपाल लाओ प्रदेश बचाओ करते हैं सब बात यही', 'आई परिवर्तन की आंधी है, शिवपाल हमारे गांधी हैं'।


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