
नई दिल्ली। किंगफिशर कंपनी के मालिक विजय माल्या को लंदन में गिरफ्तार किया गया। समाचार चैनल डीडी न्यूज के मुताबिक उन्हें मनी लॉर्डिंग केस में गिरफ्तार किया गया है, हालांकि एक घंटे के अंदर विजय माल्या को कोर्ट से जमानत मिल गई। इससे पहले भी माल्या को वेस्टमिंस्टर कोर्ट के आदेश पर 18 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था, हालांकि बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई थी।
6,027 करोड़ रुपये का लोन
जांच एजेंसियों के अनुसार शराब कारोबारी विजय माल्या ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले एक दर्जन बैंकों के कंसॉर्टियम से 2005 से 2010 के बीच 6,027 करोड़ रुपये का लोन उठाया था। बैंक सूत्रों के अनुसार अब ब्याज जोड़कर यह रकम 9000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई है। बता दें कि माल्या के खिलाफ ब्रिटिश सरकार ने जांच का आदेश दिया है जिससे यह पता किया जा सके कि क्या शेल कंपनियों के उसके कारोबार में माल्या की इंग्लैंड में रजिस्टर्ड कंपनियां भी शामिल हैं। आपको बता दें कि माल्या के प्रत्यर्पण से पहले भारतीय जांच एजेंसियों को इंग्लैंड की अदालत में यह साबित करना होगा माल्या ने सरकारी बैंकों के साथ धोखाधड़ी करते हुए मनी लॉन्डरिंग का सहारा लेकर देश से पैसा बाहर निकाला है।
ऐसे ठिकाने लगाई रकम
किंगफिशर के मालिक विजय माल्या को आईडीबीआई बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में दोषी करार दिया जा चुका है। जबकि पिछले साल से ही माल्या की इंग्लैंड से प्रत्यर्पण के प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले दिनों मई में दाखिल किए गए आरोप पत्र के अनुसार विजय माल्या ने आईडीबीआई बैंक से कर्ज के रूप में ली गई आधी राशि को आधा दर्जन शेल कंपनियों की सहायता से देश के बाहर निकाल दिया है। जांच में सामने आया है कि शेल कंपनियां खोलने के लिए विजय माल्या ने अपने निजी स्टॉफ और सेवानिवृत कर्मचारियों की सहायता ली थी। विजय माल्या राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं, हालांकि बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
Updated on:
03 Oct 2017 06:30 pm
Published on:
03 Oct 2017 05:38 pm

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