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बेशर्मी की चादर!

आनासागर की दुर्दशा पर टिप्पणी

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अजमेर

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Anil Kailay

Mar 17, 2023

बेशर्मी की चादर!

बेशर्मी की चादर!

मैं अजमेर हूं। आज मैं बड़े ही दुखी मन से यह कहने पर विवश हो रहा हूं कि पुरखों की विरासत को ’मिट्टी में मिलते हुए’ किसी को देखना है तो उसे अजमेर का दौरा कर लेना चाहिए। मन यह देखकर और व्यथित हो जाता है कि इस ऐतिहासिक धरोहर बचाने के लिए कोई भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। मेरे शहर की जनता मूक दर्शक बनकर देख रही है। जनप्रतिनिधि केवल आरोप प्रत्यारोप में राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और सरकार ’बेशर्मी की चादर’ ओढ़े सो रहे हैं। मैं बात कर रहा हूं मेरे आनासागर की। प्रकृति की बरती गई यह नेमत दूर से ही देखने में अच्छी लग रही है। जैसे-जैसे आप इसके करीब जाआगे आपको दूर भागने पर विवश होना पड़ेगा। अब इसका पानी सड़ने लगा है। पानी का रंग हरा होना शुरू हो गया। एक दर्जन से अधिक सीवेज नालों की गंदगी झील में गिर रही है। जलकुम्भी बढ़ रही है। पानी में ऑक्सीजन की मात्रा दिनों दिन घट रही है। ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़ा है। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कबाड़ हो गए हैं। तीस से अधिक किस्म के जलीय जीवों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है। लेकिन इसकी देखरेख की जिम्मेदारी वाले महकमों के अफसरों को जैसे इस झील से कोई सरोकार ही नहीं रह गया। वे तो आज भी रोजाना मर रही इस झील से कुछ ’कमा’ लेने की जुगाड़ में लगे हैं।

मैं तो बार बार अपनी जनता, जनप्रतिनिधियों और सरकारी हुक्मरानों से सवाल पूछता रहूंगा। झील क्षेत्र को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित करने के बावजूद सेवन वंडर्स सहित अवैध निर्माण किसकी शह पर बने हैं ? उच्च न्यायालय और झील संरक्षण समिति की फटकार के बावजूद जिम्मेदार अफसर किसके इशारे पर अतिक्रमियों के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे ? झील के पानी को ऑक्सीजन देने वाले संयंत्र की देखरेख के जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ क्या कोई कार्रवाई होगी ? ऑक्सीजन कंसंट्रेटरों को क्यों कबाड़ होने दिया गया ? झील में बोटिंग तो हो रही है। ऐसी क्या ’मजबूरी’ है कि यहां क्रूज चलाने की तैयारी की जा रही है ? क्यों जलकुम्भी की समस्या का अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया ? जनप्रतिनिधि कब अपने विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर समूचे शहर के लिए एकजुटता दिखाएंगे ? जनता क्या सोती ही रहेगी ? जनता को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी कमजोरी की वजह से ही शहर को खुले रूप में ’लूटा’ जा रहा है। चुनाव आने वाले हैं। सरकारी अफसर तो इधर-उधर किए जाएंगे। इसलिए मुझे उनसे तो इंसाफ की उम्मीद कतई नहीं है। क्यों ना चुनाव लड़ने वालों से शहर के अहम मसलों को समयबद्ध हल करवाने के लिए लिखित में शपथ पत्र भरवा लिया जाए ?

anil.kailay@epatrika. com