
फार्म पॉन्ड योजना से किसानों की खुशहाली
नागौर. शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु वाले नागौर जिले में फार्म पॉन्ड (खेत तलाई) योजना किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। बीते दो वर्षों में जिले में 6 हजार 606 फार्म पॉन्ड का निर्माण कराया गया। इन पर सरकार ने 42.32 करोड़ रुपए का अनुदान दिया । करीब 3 हजार फार्म पौण्ड इससे पहले बन चुके हैं, यानी जिले में सरकारी सहयोग से बनने वाले फार्म पौण्ड की संख्या 9 हजार से अधिक है, इसके साथ सैकड़ों किसान ऐसे भी हैं, जिन्होंने बिना सरकारी सहयोग के खुद के स्तर पर भी फार्म पौण्ड बनाए हैं, परिणामस्वरूप जिले का सिंचित क्षेत्र लगभग 18 से 20 हजार हैक्टेयर तक बढ़ गया है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती को स्थायित्व मिला है, वहीं फसलों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पान मैथी, सरसों, जीरा, मूंग आदि फसलों का उत्पादन बढ़ने से मंडियों में जिंसों की आवक बढ़ने के साथ जिले में उद्योगों को भी बढ़ावा मिला है। पिछले चार-पांच साल में जिले में पान मैथी व जीरा की प्रोसेसिंग यूनिट बढ़ने के साथ मूंग दाल की फैक्टरियां, सरसों की ऑयल मिल भी बढ़ी हैं, जहां कई श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नागौर जिले में अब तक सरकारी अनुदान से 9 हजार से अधिक फार्म पॉन्ड बनाए जा चुके हैं। इनसे जिले में कुल सिंचित क्षेत्रफल 18 से 20 हजार हैक्टेयर तक बढ़ चुका है। पहले किसान मानसून पर निर्भर रहते थे, वहीं अब खेत तालाबों में संचित पानी के सहारे वे रबी और खरीफ दोनों मौसमों में फसलों की बेहतर खेती कर रहे हैं। फार्म पॉन्ड योजना ने नागौर जिले की खेती की दिशा और दशा दोनों बदल दी है। सिंचित क्षेत्र बढ़ने से उत्पादन में वृद्धि हुई है। किसानों की आय में सुधार के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
सूखे जिले में जल सुरक्षा का मजबूत आधार
नागौर जिले में अपेक्षाकृत कम बारिश होने के कारण अक्सर सूखे जैसे हालात रहते हैं, वहीं मेड़ता, रियां, डेगाना तहसील क्षेत्रों में कई बार बारिश ज्यादा होने से खेतों में पानी भर जाता है और खरीफ की फसलें खराब हो जाती हैं, ऐसे में फार्म पॉन्ड ने किसानों को बड़ी राहत दी है। बरसात के दौरान खेतों में बहने व भरने वाले पानी को फार्म पौण्ड में संग्रहित किया जाता है, इस पानी का उपयोग बाद में सिंचाई में किया जाता है। कई बार फसलों को जीवन रक्षक सिंचाई देने में यही पानी काम आता है, इससे फसलें सूखती नहीं है।
सिंचाई सुविधा से बढ़ी उत्पादकता
फार्म पॉन्ड बनने के बाद किसानों को सिंचाई के लिए सालभर पानी उपलब्ध रहने लगा है। इससे किसान एक ही खेत में एक से अधिक फसलें लेने लगे हैं। दलहन, तिलहन, सब्जियों और चारे की फसलों का रकबा बढ़ा है। पानी की नियमित उपलब्धता से फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और प्रति हैक्टेयर उत्पादन भी बढ़ा है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ा है।
पशुपालन को मिला सहारा
नागौर जिले में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। फार्म पॉन्ड से पशुओं के लिए पीने का पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे पशुपालकों को दूर-दराज से पानी लाने की मजबूरी से राहत मिली है। इसके अलावा सिंचाई होने से पशुओं को गर्मियों के दिनों में भी हरा चारा भी मिलने लगा है।
मिट्टी और जल संरक्षण में अहम भूमिका
फार्म पॉन्ड वर्षा जल को बहकर नष्ट होने से रोकते हैं। इससे खेतों की उपजाऊ मिट्टी का कटाव कम होता है और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। मिट्टी में नमी बनी रहने से भूमि की गुणवत्ता सुधरती है, जिसका फायदा अगली फसलों को भी मिलता है। जल संरक्षण के साथ-साथ यह योजना पर्यावरण संतुलन में भी सहायक बन रही है।
ऊर्जा और लागत की बचत
खेत तालाब बनने से किसानों की बोरवेल पर निर्भरता कम हुई है। इससे बिजली और डीजल की खपत में कमी आई है। किसान फार्म पौण्ड के साथ सोलर सिस्टम लगाकर दिन के समय में सिंचाई कर लेते हैं। सिंचाई की लागत घटने से खेती अधिक लाभकारी हो गई है।
जलवायु पर सकारात्मक असर
फार्म पॉन्ड से स्थानीय जैव विविधता को भी बढ़ावा मिला है। तालाबों के आसपास नमी रहने से एक अनुकूल सूक्ष्म जलवायु विकसित होती है। इससे आसपास के खेतों और पौधों को लाभ मिलता है। कई स्थानों पर किसान इन तालाबों में मछली पालन भी कर रहे हैं, इससे अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित हुआ है।
सरकारी सहायता से मिली गति
फार्म पॉन्ड निर्माण के लिए सरकार सब्सिडी और वित्तीय सहायता देती है। इससे योजना को गति मिली है। अनुदान मिलने से बड़ी संख्या में किसान इस योजना से जुड़ रहे हैं। जिले में जल संकट से निपटने में फार्म पॉन्ड निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
- हरीश मेहरा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग, नागौर
Published on:
18 Jan 2026 12:05 pm

बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
