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मां छोटी देवकाली के दरबार में पूरी होती है हर अरदास

अयोध्या की नगर देवी के रूप में स्थापित मां देवकाली के प्रति नगरवासियों के साथ ही आसपास के कई जिले के लोगों का भी अटूट विश्वास है।

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Sujeet Verma

Apr 14, 2016

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अयोध्या.श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में इन दिनों शक्ति की आराधना इन दिनों चरम पर है। चैत्र रामनवमी मेले को लेकर जहां अयोध्या की गलियों में भगवान राम के जन्मोत्सव के उल्लास में बधाई गीत गाये जा रहें हैं। वहीं, वासन्तिक नवरात्र के मौके पर मां जगतजननी की आराधना करने वाले भक्तों की बड़ी संख्या है।

अयोध्या की नगर देवी के रूप में स्थापित मां देवकाली के प्रति नगरवासियों के साथ ही आसपास के कई जिले के लोगों का भी अटूट विश्वास है। वर्तमान में बाबू बाज़ार क्षेत्र के नाम से जाने वाले क्षेत्र में स्थापित मां छोटी देवकाली का मंदिर शक्ति परंपरा के वाहकों का बेहद महत्वपूर्ण स्थान है।

मंदिर के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि छोटी देवकाली मिथिलाधाम (जनकपुरी) की देवी सर्वमंगला पार्वती जी ही हैं। मां सीता जब पितृ गृह जनकपुरी से श्वसुर गृह अयोध्या के लिए चलीं तो पार्वती जी का विग्रह (प्रतिमा) अपने साथ ले गईं। महाराजा दशरथ ने अयोध्या स्थित सप्तसागर के ईशान कोण पर उसी समय पार्वती जी का मंदिर बनवाया, जहां मां सीता तथा राजकुल की अन्य रानियां पूजन के लिए जाती थीं।

उस दौरान इस मंदिर की मान्यता नगर देवी के रूप में थी। अयोध्या में आज भी ये परंपरा विद्यमान है। मां देवकाली को उमा, कात्यायनी, गौरी, कल्याणी, दैत्यमर्दिनी, दुर्गति नाशिनी, दुर्गा, शंकर प्राणवल्लभा, अपर्णा, पार्वती, काली, स्कंद और गणेश की माता, योगिनी, भुवनेश्वरी, सर्वमंगला नाम से जाना जाता है। साल में दो बार पड़ने वाले नवरात्रों में इस प्रसिद्ध सिद्धपीठ में भक्तों की भीड़ जमा होती है और बड़ी ही श्रद्धा आस्था के साथ लोग मां के इस मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से लगायी गयी हर अरदास पूरी होती है।

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