गंगा दरवाजा से लेकर टोका घाट, नीवलपुर तक लगभग 200 प्राचीन मंदिर थे।जिनमे कीमती पत्थर व अष्टधातु की मूर्तियां थी जो आज दिखाई नहीं देती है।इन सभी मंदिरों का अस्तित्व नहीं रहा खण्डर बन गए और गांव के लोगों ने सुन्दर घाटों को भूसा, उपले भरकर गंदा कर दिया है।घाटों की विश्रांतो मे राजस्थानी, ईरानी, अवध शैली में लाल पत्थर से बनी हुई है। इनके गुंमदों में राजस्थान, अवध की चित्रकारी आज अपनी कहानी कह रही है। जिनमे धार्मिक चित्र रामायण, महाभारत, मुगलकाल के नवाबों के चित्र जिनमे लोक कलाओं, लोक जीवन, अतीत काल की गाथा बखान कर रही है। इनके खण्डर अवषेशों में अतीत की कलाओं को संरक्षण की आवश्यकता है। गंगा घाट पर एक मंदिर वर्तमान में पत्थर वाली मठिया या नादिया वाला मंदिर जिसमे लाल राजस्थानी पत्थर की उकेरी गई मृण मूर्तियां आज भी आध्यामिकता झलकती है। जिसमे शेष नाग की सईया पर विष्णु भगवान पृष्ठभूमि पर नवग्रह, रामायण कालीन सीताहरण, दुर्गा- शिव विवाह, ऐसे धार्मिक चित्र आकर्षण का केन्द्र है। मंदिर के चबुतरे के नीचे भाग पर लोक कला, लोक जीवन, लोक उत्सव, अंकित सामाजिक चित्रण है। मंदिर के उत्तरी दिशा में विशाल नादियां शिवभक्तों के प्रहरी के रूप मे दरवाजे पर खडा है।