फर्रुखाबाद. उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू किसानों के मीडियम साइज का आलू खरीदने के लिए 549 रुपया निर्धारण किए थे, लेकिन किसानों के आलू को व्यापारियों द्वारा ऊँचे दामों में खरीदे जाने के 13 दिन बाद आज तक कोई किसान अपना आलू सरकारी क्रय केंद्र पर लेकर नहीं पहुंचा। इसका कारण यह है कि एशिया की सबसे बड़ी आलू मंडी सातनपुर में किसानों के आलू को व्यापारी 800 रुपये से लेकर 915 रुपये में खरीद रहे हैं। सरकारी आलू खरीद को लेकर जिले के किसानों के लिए प्रचार प्रसार भी नहीं किया गया है। किसानों को यह भी नहीं मालूम है कि सरकारी आलू खरीद के लिए कहा पर केंद्र बनाया गया है। दूसरी तरफ किसानों को अभी तक जो नुकसान हुआ है, उसकी इस साल आलू की बिक्री से कही न कही भरपाई हुई है। आलू के रेट बढ़ने से पिछले वर्ष की अपेक्षा किसान कोल्ड स्टोरेज की तरफ न जाकर मंडी में अपना आलू बेच रहा है। उसी वजह से अभी कोल्ड स्टोरेज 50 प्रतिशत खाली पड़े हैं।
मंडी में आलू बेचने से उनको नकद रुपया मिल जाता है। बहुत से किसान अपनी बेटी का विवाह इसलिए रोककर रखते है कि जब आलू बिक जाएगा तो बेटी का विवाह धूमधाम से करेंगे। किसान का यह सपना पूरा हो रहा है। सरकार ने जो रेट तय किए हैं उससे किसानों की लागत भी वसूल नहीं हो पा रही है।
आखिर महंगा क्यों हुआ आलू-
प्रदेश सरकार के आलू निर्धारण के बाद से लगातार आलू के दाम बढ़ते जा रहे हैं। जब तक किसी सरकार ने खरीद शुरू नहीं की थी तब तक व्यापारी अपनी मन मर्जी से आलू की खरीद करते थे। इस कारण आलू किसान अपनी लागत भी निकाल पाता था। आज किसान के घरों में खुशहाली दिखाई दे रही है। इसका मुख्य कारण सरकारी आलू खरीद का शुरू होना है, चाहे सरकार एक क्विंटल आलू भी न खरीद सके, लेकिन किसानों को उसका भरपूर लाभ मिल रहा है। यदि इसी प्रकार से किसानों की फसलों का अच्छा दाम मिलता रहेगा तो आने वाले सालो में किसान गरीब नहीं रहेगा।