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कांशीराम आवास योजना में डूडा की घपलेबाजी, नहीं हुए सही आवंटन

जनपद में सियासत ने करवट ली तो कांशीराम कालोनियों में रहने वाले गरीबों पर निजाम की नजरें टेंड़ी हो गई हैं।

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Kanshiram housing scheme

फर्रुखाबाद. जनपद में सियासत ने करवट ली तो कांशी राम कालोनियों में रहने वाले गरीबों पर निजाम की नजरें टेंड़ी हो गई हैं। अब तक 426 गरीबों को 10 दिन में मकान खाली करने के नोटिस जारी किए जा चुके हैं। नोटिस कालोनी के हर ब्लाक में चस्पा कर दिए गए हैं। फिलहाल लोग गुस्से में हैं और मारने मरने को तैयार हैं पर कोई भी मकान छोड़कर जाने को तैयार नहीं है।

मायावती सरकार में गरीबों के लिए हजारों आवास बनाए गए थे। जो आदमी किसी जाति धर्म का हो जांच करने के बाद उसको आवास आवंटन किए गए थे। लेकिन सैकड़ों लोग उन आवासों में रहने के लिए नहीं गए जिस कारण डूडा के अधिकारियों ने गरीब जनता से 25 से 30 हजार लेकर दूसरे लोगों को वही आवास आवंटन कर दिए। जब प्रसाशन से उसकी जांच की गई तो वह उन्हीं के नाम रिकार्ड में दर्ज हैं जिनके नाम पहले आवंटन किए गए थे। जिस कारण टाउनहॉल के पास बनी कालोनियों में लगभग 450 लोगों को आवास खाली करने के नोटिस जारी कर दिए गए है। जिनमें बहुत से ऐसे लोग जो अपने आवास को किराए पर दिए हुए हैं। बहुत से लोगों ने पैसे देकर अपने नाम आवंटन इसलिए करवा लिए ताकि रात को उसके अंदर अय्याशी कर सके। जिसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

गरीबों के लिए बनाए गए आवासों को आठ साल हो चुके हैं। डूडा विभाग की घपले बाजी की बजह से जिनके चार-चार फोर व्हीलर वाहन हैं खेती भी है उनको भी आवास आवंटित कर दिए गए हैं। दूसरी तरफ जब से यह कालोनियां बनकर तैयार हुई तब से अब तक उनके रख रखाव का कोई ध्यान नहीं रखा गया है। अच्छे समाज के लोग शाम के बाद वहां जाना भी पसन्द नहीं करते हैं।

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उधर जिस आधार पर लोगों को आवास आवंटन करने चाहिए थे वह नहीं किए दूसरी तरफ जिन लोगों को आवास मिलने चाहिए थे नहीं मिले। जिसका फायदा डूडा के अधिकारियों व दलालों ने उठाया फर्जी तरीके से पैसे लेकर आवंटन कर दिया। उसके साथ-साथ जो रिकार्ड हैं उनमें उनके नामों को सम्मलित नहीं किया गया। क्या जिला प्रसाशन जिनका उन आवासों पर अधिकार है उन्हें उन आवासों में बसने का मौका दिला पाएगा। बहुत से लोगों से इस बात को लेकर बात की गई तो उन्होंने अपने अपने प्रमाण पत्र दिखा दिए जो किसी के पास जिलाधिकारी द्वारा आवंटन किए कुछ लोगों के पास डूडा द्वारा के प्रमाण पत्र सभी में अलग अलग साइन दिखाई दे रहे हैं। कुछ वहीं के रहने वालों का कहना है कि यदि जनता को न्याय नहीं मिला तो वह न्यायालय के दरबाजे पर जाएंगे।