
कार्तिक मास का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व माना जाता है। इस बार कार्तिक का पवित्र महिना 14 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है और 12 नवंबर को समाप्त हो जाएगा। कार्तिक मास का महत्व भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं बताते हुए कहा है कि, पौधों में तुलसी, मासों में कार्तिक, दिवसों में एकादशी और तीर्थों में द्वारका मेरे हृदय के सबसे निकट है और मुझे प्रिय है।
पुराणों के अनुसार कार्तिक मास में भगवान विष्णु नारायण रूप में जल में निवास करते हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक हर दिन सूर्योदय से पहले नदी या तालाब में स्नान करना दूध से स्नान का पुण्य मिलता है। इसलिये कार्तिक में स्नान का बहुत अधिक महत्व माना जाता है।
रुक्मिणी ने किया था कार्तिक स्नान
स्थान मिला।
कार्तिक स्नान से सीधा बैकुंठ
कथा के अनुसार एक बार शंखासुर नामक असुर ब्रह्माजी से वेदों को चुराकर भाग रहा था। वेद उनके हाथों से छूटकर समुद्र में गिर गए। देवताओं की प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने कहा कि मैं मछली का रूप धारण करके अभी वेदों को लाता हूं। उसी समय भगवान ने कहा कि अबसे कार्तिक के महीने में सभी वेदों के साथ मैं स्वयं जल में रहूंगा। इस महीने में नियमित स्नान पूजन करने वाले पर कुबेर भी कृपा करेंगे और जो सच्चे मन से इस दौरान मेेरी पूजा-पाठ करेगा वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाएगा। उसे सीधा बैकुंठ प्राप्त होगा।
जानें कार्तिक मास में तुलसी पूजा का महत्व
पुराणों में कार्तिक माह का महत्व व कार्तिक मास में तुलसी पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। जो व्यक्ति अपने घर में हमेशा सुख शांति व सदैव सुख शान्ति की अपेक्षा रखता है उसे अपने घर में तुलसी की रोज पूजा करनी चाहिए। कहा जाता है कि जिस घर में शुभ कर्म होते हैं, वहां तुलसी हरी-भरी रहती है और जहां अशुभ कर्म होते हैं वहां तुलसी कभी भी हरी-भरी नहीं रहती। वहीं कार्तिक मास में तुलसी के पास दीपक जलाने से मनुष्य अनंत पुण्य का भागी बनता है। जो तुलसी को पूजता है, उसके घर मां लक्ष्मी हमेशा के लिए आ बसती हैं, क्योंकि तुलसी में साक्षात लक्ष्मी का निवास माना गया है।
Published on:
14 Oct 2019 11:57 am
