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शारदीय नवरात्रि 2019 का 7वां व 8वां दिन: शत्रु बाधा से मुक्ति व समस्त इच्छाओं की पूर्ति के लिए ऐसे करें देवी मां की पूजा

देवी मां का 7वां (सप्तमी) रूप : मां कालरात्रि..5 अक्टूबर 2019अ (शनिवार- saturday ) को... देवी मां का 8वां (अष्टमी) रूप : मां महागौरी, दुर्गा महा अष्टमी..6 अक्टूबर 2019, (रविवार - sunday ) को...

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शारदीय नवरात्रि 2019 का 7वां व 8वां दिन: शत्रु बाधा से मुक्ति व समस्त इच्छाओं की पूर्ति के लिए ऐसे करें देवी मां की पूजा

शारदीय नवरात्रि 2019 का 7वां व 8वां दिन: शत्रु बाधा से मुक्ति व समस्त इच्छाओं की पूर्ति के लिए ऐसे करें देवी मां की पूजा

नवरात्रि 2019- नवरात्रि हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है। नवरात्रि में नौ दिनों तक दुर्गा माता की पूजा-अर्चना की जाती है। आश्विन मास की शारदीय नवरात्रि 2019 की नौ प्रमुख तिथियों में देवी मां के अलग अलग रूपों को पूजा जाता है।

मान्यता है कि एक ओर जहां इन सभी नौ देवी मां को अलग अलग भोग लगता है। वहीं पूजा विधि में भी हर देवी मां का अलग अलग मंत्र है। इसके साथ ही इन देवी मां में हर देवी का अलग अलग आशीर्वाद होता है।

वहीं देवी मां की सवारी भी काफी हद तक अलग अलग है। इनमें जहां
1. प्रथम दिन की देवी मां शैलपुत्री वृषभ पर सवारी करती है।
2. द्वितीय माता बृह्मचारिणी स्वयं के पैरों पर चलते हुए वाहन का प्रयोग नहीं करती हैं।
3. तृतीय देवी मां चंद्रघंटा शेर पर सवारी करती है।
4. चतुर्थ माता कूष्मांडा भी शेर पर सवारी करती है।
5. पंचम देवी माता स्कंदमाता भी शेर पर ही सवारी करती है।
6. षष्ठ देवी मां कात्यायनी को भी सिंह पर सवार दिखाया गया है।
7. सप्तम देवी मां कालरात्रि देवी की सवारी-गधा है।
8. अष्टम महागौरी मां वृषभ पर सवारी करती है।
9. नवम मां सिद्धिदात्री देवी कमल पर विराजमान है।

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पंडित सुनील शर्मा के अनुसार देवी दुर्गा और माता पार्वती की सवारी क्रमश: सिंह और बाघ को माना जाता हैं। देवी दुर्गा के दो वाहन हैं। उन्हें कुछ मूर्तियों में शेर पर तो कुछ और चित्रों में बाघ पर विराजमान बताया गया है। महिषासुर का वध करते समय वह सिंह पर सवार थीं। इसके अलावा अन्य दैत्यों का वध करते समय वे बाघ पर सवार थीं।

ऐसे बना मां पार्वती का वाहन शेर!
एक कथा के अनुसार श‌िव को पत‌ि रूप में पाने के ल‌िए देवी पार्वती ने हजारों वर्ष तक तपस्या की। तपस्या से देवी सांवली हो गई। भगवान श‌िव से व‌िवाह के बाद एक द‌िन जब श‌िव पार्वती साथ बैठे थे तब भगवान श‌िव ने पार्वती से मजाक करते हुए काली कह द‌िया।

देवी पार्वती को श‌िव की यह बात चुभ गई और कैलाश छोड़कर वापस तपस्या करने में लीन हो गई। इस बीच एक भूखा शेर देवी को खाने की इच्छा से वहां पहुंचा। ले‌क‌िन तपस्या में लीन देवी को देखकर वह चुपचाप बैठ गया।

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शेर सोचने लगा क‌ि देवी कब तपस्या से उठे और वह उन्हें अपना आहार बना ले। इस बीच कई साल बीत गए लेक‌िन शेर अपनी जगह डटा रहा।

इस बीच देवी पार्वती की तपस्या पूरी होने पर भगवान श‌िव प्रकट हुए और पार्वती गौरवर्ण यानी गोरी होने का वरदान द‌िया।

इसके बाद देवी पार्वती ने गंगा स्नान क‌िया और उनके शरीर से एक सांवली देवी प्रकट हुई जो कौश‌िकी कहलायी और गौरवर्ण हो जाने के कारण देवी पार्वती गौरी कहलाने लगी।

माता पार्वती को जब यह पता चला कि यह बाघ उनके साथ ही तपस्या में यहां सालों से बैठा रहा है तो माता ने प्रसंन्न होकर उसे वरदान स्वरूप अपना वाहन बना लिया।

तब से मां पार्वती का वाहन बाघ हो गया। इसका कारण यह था क‌ि बाघ ने देवी को खाने की प्रत‌िक्षा में उन पर नजर ट‌िकाए रखकर वर्षो तक उनका ध्यान क‌िया था।

देवी ने इसे बाघ की तपस्या मान ल‌िया और अपनी सेवा में ले ल‌िया। इसल‌िए देवी पार्वती के बाग और वृष दोनों वाहन माने जाते हैं।

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देवी मां के सातवें और अष्टम स्वरूप से जुड़ी हर बात जो आप जानना चाहते हैं ( Puja Vidhi, Bhog, Vrat vidhi, blessings, Maa ka Swaroop) ....

नवरात्रि में देवी मां का सातवां (सप्तमी)रूप : मां कालरात्रि...

दिन : 5 अक्टूबर 2019 (शनिवार- saturday )

मां का स्वरूप : मां दुर्गाजी की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं। मां कालरात्रि के पूरे शरीर का रंग एक अंधकार की तरह है, इसलिये शरीर काला रहता है। इनके सिर के बाल हमेशा खुले रहते हैं।

गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र हैं। ये तीनों नेत्र ब्रह्मांड के सदृश गोल हैं। इनसे विद्युत के समान चमकीली किरणें नि:सृत होती रहती हैं।

मां की नासिका के श्वास-प्रश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालाएं निकलती रहती हैं। इनका वाहन गर्दभ (गदहा) है। ये ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वरमुद्रा से सभी को वर प्रदान करती हैं।

दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभयमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का काँटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग (कटार) है।

मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं।

इसी कारण इनका एक नाम 'शुभंकारी' भी है। अत: इनसे भक्तों को किसी प्रकार भी भयभीत अथवा आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है।

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मां की पूजा विधि : सप्तमी पूजा के दिन तंत्र साधना करने वाले साधक आधी रात में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं तथा इस दिन मां की आंखें खुलती हैं। पूजा करने के बाद इस मंत्र से मां को ध्यान करना चाहिए-

एक वेधी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।
वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।

इसके बाद इनकी पूजा पूरी हो जाने के बाद शिव और ब्रह्मा जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए फिर आरती कर प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

मां का भोग : मां कालरात्रि को शहद का भोग लगाएं।

मंत्र -एक वेधी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।

वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।

आशीर्वाद : दुश्मनों से जब आप घिर जायें और हर ओर विरोधी नजऱ आयें, तो ऐसे में आपको माता कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से हर तरह की शत्रुबाधा से मुक्ति मिल जाती है।

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दुर्गा महा अष्टमी...

नवरात्रि में देवी मां का आठवां (अष्टमी) रूप : मां महागौरी

दिन : 6 अक्टूबर 2019, (रविवार - sunday )

मां का स्वरूप : मां की वर्ण पूर्णत: गौरवर्ण है। इनके गौरता की उपमा शंख, चन्द्र और कुन्द के फूल से दी जाती है। आठ वर्षीय महागौरी के समस्त वस्त्र तथा आभूषण आदि भी श्वेत हैं।

इनकी चार भुजाएं है तथा वाहन वृषभ (बैल) है। मां की मुद्रा अत्यन्त शांत है और ये अपने हाथों में डमरू, त्रिशूल धारण किए वर मुद्रा और अभय-मुद्रा धारिणी है।

मां की पूजा विधि : इनकी पूजा करने के लिए भक्त को नवरात्रा के आठवें दिन मां की प्रतिमा अथवा चित्र लेकर उसे लकड़ी की चौकी पर विराजमान करना चाहिए।

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इसके पश्चात पंचोपचार कर पुष्पमाला अर्पण कर देसी घी का दीपक तथा धूपबत्ती जलानी चाहिए।

मां के आगे प्रसाद निवेदन करने के बाद साधक अपने मन को महागौरी के ध्यान में लीन कर निम्न मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए: ॐ ऎं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ॐ महागौरी देव्यै नम:।।

मां का भोग : प्रसाद दूध का ही होना चाहिए।

मंत्र -श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

आशीर्वाद : इस मंत्र से मां अत्यन्त प्रसन्न होती है तथा भक्त की समस्त इच्छाएं पूर्ण करती हैं।

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