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कोरोना को लेकर भारत में 14 अप्रैल तक का लॉकडाउन, जानिये इस दिन क्या है खास

13 अप्रैल संक्रांति का ये सच आप नहीं जानते होंगे...

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secrets behind the 21 days lock down in india

secrets behind the 21 days lock down in india

पूरे देश दुनिया में तेजी से फैल रहे कोरोना महामारी को रोकने के लिए तमाम देशों की ओर से कोशिशें की जा रही हैं। इन्हीं सब को देखते हुए भारत में भी 21 दिन का लॉकडाउन किया गया है। जो 14 अप्रैल 2020 तक चलेगा।

एक ओर जहां सरकार की ओर से इस लॉकडाउन को सोशल डिस्टेंस के चलते प्रयोग में लाया गया। वहीं ज्योतिष व धर्म शास्त्र के जानकारों की मानें तो इसे 14 अप्रैल तक किए जाने के पीछे एक खास वजह बताई जा रही है।

जानकारों की मानें तो इस साल 2020 में 13 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही मेष संक्रांति मनाई जाएगी। इसे विषपत संक्रांति या वैशाख संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। वैशाख को हिन्दू नववर्ष का दूसरा माह माना जाता है।

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साल में आने वाली 12 संक्रांति में मेष संक्रांति का भी महत्वपूर्ण स्थान है। इस दिन जगत के प्राण दाता भगवान सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में चले जाएंगे । इस शुभ दिन यानी की मेष संक्रांति पर लोग भगवान सूर्य नारायण की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। इस मेष संक्रांति को वैशाख संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है।

विष व रोगों का हो जाता है नाश
इस दिन स्नान का खास महत्व माना गया है, वहीं मान्यता के अनुसार इस दिन नीम के पानी से नहाना अति उत्तम माना जाता है, इस संबंध में पंडित सुनील शर्मा के मुताबिक हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन नीम के जल से स्नान करने से सभी प्रकार के रोगों का नाश हो जाता है। वहीं इस दिन स्नान द्वारा शरीर से विषाक्तता निकलने के चलते इसे विषपत संक्रांति भी कहते हैं।

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एक ओर जहां पूरे देश में इस दिन को वैशाख संक्रांति या मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, वहीं देवभूमि उत्तरांचल में इस दिन को विषपत या विषुवत संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, देवभूमि में मान्यता है कि इस दिन वहां मिलने वाली कहरू नाम घास, जिसमें कि नीम के समान औषधीय गुण होते हैं, उसे पानी में डाल कर स्नान करने से शरीर के सभी प्रकार के विष नष्ट हो जाते हैं या बाहर निकल जाते हैं।

वहीं इस दिन अरिष्ट निवारण के लिए स्नान और दान का विशेष महत्व होने के साथ ही चांदी और अन्य सामग्री के दान का भी महत्व बताया जाता है।

वहीं धर्म के जानकारों के अनुसार इस समय कोरोना वायरस को देखते हुए इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

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कोरोना भी एक विष समान!
जानकारों की मानें तो कोरोना भी एक प्रकार का विष ही हमारे अंदर निर्मित करता है, अत: ऐसे में इस दिन का विशेष स्नान लोगों को काफी राहत दे सकता है। चूकिं इस स्नान को शरीर से विष निकालने वाला माना जाता है, ऐसे में 13 अप्रैल को स्नान इस बार कई तरह से महत्वपूर्ण हो गया है।

ज्योतिष के कई जानकार को यह तक कह रहे हैं कि 13 अप्रैल को नीम के पानी से स्नान के बाद लोगों को 14 अप्रैल के रूप में एक दिन और सोशल डिस्टेंस के लिए मिलेगा, ऐसे में जहां 13 अप्रैल को नीम के पानी का स्नान उन्हें राहत देगा, वहीं 14 अप्रैल को भी सोशल डिस्टेंस कोरोना को हराने के लिए बड़ा हथियार सिद्ध हो सकता है।

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